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Indore: ससुर, बहू-बेटे की सजा बरकरार, चावल एक्सपोर्ट के नाम पर बैंक से पौने दो करोड़ की धोखाधड़ी का मामला
Mon, 11 Jul 2022 03:25 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 11 Jul 2022 03:25 PM IST
सार
इंदौर में बैंक से 1 करोड़ 77 लाख की जालसाजी के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने ससुर के अलावा बहू व बेटे की तीन साल की सजा कायम रखी है।
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- फोटो : istock
विस्तार
मध्य प्रदेश के इंदौर में बैंक से 1 करोड़ 77 लाख की जालसाजी के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने ससुर के अलावा बहू व बेटे की तीन साल की सजा कायम रखी है। भोपाल के इस उद्योगपति परिवार ने चावल एक्सपोर्ट के नाम पर लोन लेकर बैंक को चपत लगाई थी।
सूत्रों के मुताबिक आरके ओवरसीज भोपाल के पार्टनर आरके गर्ग व उनकी बहू कविता ने अपने पति हेनरी गर्ग (आरकेजी एक्सपोर्ट प्रालि भोपाल के डायरेक्टर) के साथ मिलकर वर्ष 2005 में इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया था। पहले ससुर व बहू ने फर्जी दस्तावेजों के जरिये भारतीय स्टेट बैंक से चावल एक्सपोर्ट के लिए 1.97 करोड़ रुपए की केश लिमिट ली, फिर हेनरी के साथ रूबि फूड स्टफ ट्रेडिंग कंपनी, दुबई के मैनेजिंग डायरेक्टर विकास बंसल व सिंगापुर की ओलम इंटरनेशनल के साथ निर्यात किया, किंतु लोन की रकम भारतीय स्टेट बैंक के खाते में जमा नहीं कराई और विकास ने बाले-बाले ही सीधे आरकेजी को भुगतान कर दिया।
करीब 10 साल केस चलने के बाद 20 अक्टूबर 2015 को इंदौर के सीजेएम दीपककुमार पांडेय ने आरके गर्ग, कविता, हेनरी को आईपीसी की धारा 420, 471 व 120 (बी) में धोखाधड़ी, दस्तावेजों में हेरफेर व साजिश रचने के इल्जाम में दोषी पाकर तीन-तीन साल की सजा और 12-12 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई थी, जबकि विकास को साजिश रचने में साथ देने पर एक साल की सजा दी गई थी। इसके खिलाफ चारों ने सीबीआई की विशेष अदालत में अपील की थी।
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सूत्रों के मुताबिक आरके ओवरसीज भोपाल के पार्टनर आरके गर्ग व उनकी बहू कविता ने अपने पति हेनरी गर्ग (आरकेजी एक्सपोर्ट प्रालि भोपाल के डायरेक्टर) के साथ मिलकर वर्ष 2005 में इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया था। पहले ससुर व बहू ने फर्जी दस्तावेजों के जरिये भारतीय स्टेट बैंक से चावल एक्सपोर्ट के लिए 1.97 करोड़ रुपए की केश लिमिट ली, फिर हेनरी के साथ रूबि फूड स्टफ ट्रेडिंग कंपनी, दुबई के मैनेजिंग डायरेक्टर विकास बंसल व सिंगापुर की ओलम इंटरनेशनल के साथ निर्यात किया, किंतु लोन की रकम भारतीय स्टेट बैंक के खाते में जमा नहीं कराई और विकास ने बाले-बाले ही सीधे आरकेजी को भुगतान कर दिया।
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करीब 10 साल केस चलने के बाद 20 अक्टूबर 2015 को इंदौर के सीजेएम दीपककुमार पांडेय ने आरके गर्ग, कविता, हेनरी को आईपीसी की धारा 420, 471 व 120 (बी) में धोखाधड़ी, दस्तावेजों में हेरफेर व साजिश रचने के इल्जाम में दोषी पाकर तीन-तीन साल की सजा और 12-12 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई थी, जबकि विकास को साजिश रचने में साथ देने पर एक साल की सजा दी गई थी। इसके खिलाफ चारों ने सीबीआई की विशेष अदालत में अपील की थी।
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