{"_id":"665c6baa9b6d68b1e001ad7f","slug":"indore-safina-who-fought-for-girls-education-honored-received-honorary-doctorate-degree-from-london-2024-06-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Indore: लड़कियों की शिक्षा के लिए संघर्ष करने वालीं सफीना को सम्मान, लंदन से मिली मानद डॉक्टरेट की उपाधि","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Indore: लड़कियों की शिक्षा के लिए संघर्ष करने वालीं सफीना को सम्मान, लंदन से मिली मानद डॉक्टरेट की उपाधि
Sun, 02 Jun 2024 06:25 PM IST
दिनेश शर्मा
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, इंदौर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sun, 02 Jun 2024 06:25 PM IST
सार
सफीना हुसैन लड़कियों की शिक्षा के महत्वपूर्ण मुद्दे पर कार्य करने वाली अग्रणी सामाजिक महिला हैं। वे तकनीकी नवाचार और सांस्कृतिक बुद्धिमत्ता के संयोजन के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।
विज्ञापन
सफीना हुसैन को सम्मानित किया गया।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
भारत में लड़कियों की शिक्षा में अनुकरणीय योगदान देने के लिए लगातार काम कर रहीं सफीना हुसैन को उनके इस काम के लिए सम्मान मिला है। उन्हें लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस (एलएसई) ने 29 मई, 2024 को लंदन में मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया। यह सम्मान गैर-लाभकारी संस्था एजुकेट गर्ल्स के माध्यम से सफीना के रचनात्मक कार्य के लिए दिया गया है।
बता दें कि सफीना के नेतृत्व में उनकी संस्था ने स्कूल नामांकन के लिए 18 लाख से अधिक लड़कियों को प्रेरित किया है और भारत के सबसे जरूरतमंद समुदायों में लगभग 20,000 समुदाय-आधारित जेंडर चैंपियंस के प्रयासों के माध्यम से 22 लाख से अधिक छात्रों को उपचारात्मक शिक्षा में सहायता प्रदान की है। वर्ष 2007 में स्थापित संस्था राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार के दूरदराज गांवों में लड़कियों की शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने के लिए समर्पित है।
सफीना एलएसई मानद डॉक्टरेट प्राप्तकर्ताओं के एक प्रतिष्ठित समूह में शामिल हो गई हैं, जिनमें प्रो. मुहम्मद यूनुस (ग्रामीण बैंक के संस्थापक एवं नोबेल शांति पुरस्कार विजेता), प्रो. टिम बर्नर्स-ली (इंटरनेट के आविष्कारक) और प्रो. क्लॉस श्वाब (विश्व आर्थिक मंच के कार्यकारी अध्यक्ष) शामिल हैं। विशेष रूप से, रघुराम राजन और जगदीश भगवती जैसी प्रतिष्ठित भारतीय हस्तियों को भी मानद डॉक्टरेट उपाधि प्राप्त हुई है। एलएसई की पूर्व छात्रा रहीं सफीना ने शिक्षा में लैंगिक असमानता को दूर करने के लिए संसाधनों और अत्याधुनिक तकनीक के जरिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाई है। वर्ष 2023 में, सफीना डब्ल्यूआईएसई पुरस्कार विजेता बनने वाली पहली भारतीय महिला बनीं, जो वैश्विक शिक्षा परिदृश्य में सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक है।
विज्ञापन
एलएसई के अध्यक्ष और कुलपति प्रोफेसर लैरी क्रेमर ने बताया कि सफीना हुसैन लड़कियों की शिक्षा के महत्वपूर्ण मुद्दे पर कार्य करने वाली अग्रणी सामाजिक महिला हैं। उन्होंने जिस अभिनव सोशल यूनिकॉर्न का आविष्कार किया है, वे तकनीकी नवाचार और सांस्कृतिक बुद्धिमत्ता के संयोजन के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।
विज्ञापन
बता दें कि सफीना के नेतृत्व में उनकी संस्था ने स्कूल नामांकन के लिए 18 लाख से अधिक लड़कियों को प्रेरित किया है और भारत के सबसे जरूरतमंद समुदायों में लगभग 20,000 समुदाय-आधारित जेंडर चैंपियंस के प्रयासों के माध्यम से 22 लाख से अधिक छात्रों को उपचारात्मक शिक्षा में सहायता प्रदान की है। वर्ष 2007 में स्थापित संस्था राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार के दूरदराज गांवों में लड़कियों की शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने के लिए समर्पित है।
विज्ञापन
सफीना एलएसई मानद डॉक्टरेट प्राप्तकर्ताओं के एक प्रतिष्ठित समूह में शामिल हो गई हैं, जिनमें प्रो. मुहम्मद यूनुस (ग्रामीण बैंक के संस्थापक एवं नोबेल शांति पुरस्कार विजेता), प्रो. टिम बर्नर्स-ली (इंटरनेट के आविष्कारक) और प्रो. क्लॉस श्वाब (विश्व आर्थिक मंच के कार्यकारी अध्यक्ष) शामिल हैं। विशेष रूप से, रघुराम राजन और जगदीश भगवती जैसी प्रतिष्ठित भारतीय हस्तियों को भी मानद डॉक्टरेट उपाधि प्राप्त हुई है। एलएसई की पूर्व छात्रा रहीं सफीना ने शिक्षा में लैंगिक असमानता को दूर करने के लिए संसाधनों और अत्याधुनिक तकनीक के जरिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाई है। वर्ष 2023 में, सफीना डब्ल्यूआईएसई पुरस्कार विजेता बनने वाली पहली भारतीय महिला बनीं, जो वैश्विक शिक्षा परिदृश्य में सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक है।
विज्ञापन
एलएसई के अध्यक्ष और कुलपति प्रोफेसर लैरी क्रेमर ने बताया कि सफीना हुसैन लड़कियों की शिक्षा के महत्वपूर्ण मुद्दे पर कार्य करने वाली अग्रणी सामाजिक महिला हैं। उन्होंने जिस अभिनव सोशल यूनिकॉर्न का आविष्कार किया है, वे तकनीकी नवाचार और सांस्कृतिक बुद्धिमत्ता के संयोजन के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।
