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शुभ संयोगः दीपावली से पहले आज रवि-पुष्य का दुर्लभ संगम, बाजारों में उमड़ेगी भीड़, देखें खरीदारी के मुहूर्त
Sun, 01 Nov 2026 09:31 AM IST
अर्जुन रिछारिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Sun, 01 Nov 2026 09:31 AM IST
सार
इंदौर सहित देशभर में दीपावली से पूर्व 1 नवंबर को 22 घंटे का रवि-पुष्य नक्षत्र रहेगा। सर्वार्थसिद्धि व राजयोग के संयोग में सोना, चांदी, वाहन व प्रॉपर्टी खरीदारी के लिए यह महामुहूर्त अत्यंत शुभ और समृद्धिदायक रहेगा।
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इंदौर के सराफा बाजार में लौटी रौनक। फोटो- जयेश मालवीय।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
विस्तार
दीपावली से 7 दिन पहले 1 नवंबर को खरीदारी का महामुहूर्त पुष्य नक्षत्र 22 घंटे तक रहेगा। ज्योतिर्विदों के अनुसार दीपावली से पूर्व आने वाले पुष्य नक्षत्र का विशेष महत्व होता है। जब यह गुरुवार या रविवार के दिन पड़ता है, तब इसका फल कई गुना बढ़ जाता है। इस बार 1 नवंबर को रविवार होने के कारण रवि-पुष्य नक्षत्र का दुर्लभ संयोग बन रहा है।
अनेक शुभ योगों में होगी खरीदारी
इस विशेष दिन पर सर्वार्थसिद्धि, लक्ष्मीनारायण, श्रीवत्स, मालव्य और राजयोग के साथ-साथ अहोई अष्टमी का पर्व भी मनाया जाएगा। रवि-पुष्य का संयोग बनने से यह दिन भूमि, भवन, सोना, चांदी और वाहन सहित सभी प्रकार की चल एवं अचल संपत्ति की खरीदारी के लिए अत्यंत फलदायी माना जा रहा है।
खरीदारी का शुभ समय और अवधि
ज्योतिर्विद् आचार्य शिवप्रसाद तिवारी के अनुसार पुष्य नक्षत्र 1 नवंबर को सुबह 6.31 बजे शुरू होगा और 2 नवंबर को सुबह 4.30 बजे तक रहेगा। इस प्रकार यह महामुहूर्त कुल 21 घंटे 59 मिनट तक बना रहेगा। इस नक्षत्र का मुख्य गुण वृद्धि के साथ स्थिरता प्रदान करना है। इसी कारण शास्त्रों में इस दिन किए जाने वाले कार्यों को लंबे समय तक लाभ और स्थायित्व देने वाला माना गया है। ज्योतिष शास्त्र में इसे पोषण, वृद्धि और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
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पुष्य नक्षत्र के शुभ होने के मुख्य कारण
वैदिक ज्योतिष में 27 नक्षत्रों के बीच पुष्य को नक्षत्रों का राजा माना गया है। इसके अधिष्ठाता देवता बृहस्पति हैं, जो ज्ञान, धर्म, समृद्धि और सद्बुद्धि के प्रतीक हैं। वहीं, इस नक्षत्र के स्वामी शनि देव हैं, जिन्हें अनुशासन, कर्म, स्थिरता और परिश्रम का कारक माना जाता है। पुष्य शब्द का सीधा संबंध पोषण और विकास से है, इसलिए इसे सभी शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
चौघड़ियानुसार खरीदी के लिए मुहूर्त
चर : सुबह 07:56 से 09:21 एवं रात 8.59 से 10.35 बजे तक।
लाभ: सुबह 09.21 से 10.45 बजे तक।
अमृत : सुबह 10:45 से दोपहर 12:10 एवं शाम 7.24 से 8.59 बजे तक।
शुभ : दोपहर 1.35 से दोपहर 2.59 एवं शाम 5.49 से 7.24 बजे तक।
स्थिर लग्ननुसार खरीदारी
वृश्चिक : सुबह 7.49 से सुबह 10.08 बजे तक।
कुंभ : दोपहर 1.54 से दोपहर 3.22 बजे तक।
वृषभ : शाम 6.22 से शाम 8.17 बजे तक।
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अनेक शुभ योगों में होगी खरीदारी
इस विशेष दिन पर सर्वार्थसिद्धि, लक्ष्मीनारायण, श्रीवत्स, मालव्य और राजयोग के साथ-साथ अहोई अष्टमी का पर्व भी मनाया जाएगा। रवि-पुष्य का संयोग बनने से यह दिन भूमि, भवन, सोना, चांदी और वाहन सहित सभी प्रकार की चल एवं अचल संपत्ति की खरीदारी के लिए अत्यंत फलदायी माना जा रहा है।
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खरीदारी का शुभ समय और अवधि
ज्योतिर्विद् आचार्य शिवप्रसाद तिवारी के अनुसार पुष्य नक्षत्र 1 नवंबर को सुबह 6.31 बजे शुरू होगा और 2 नवंबर को सुबह 4.30 बजे तक रहेगा। इस प्रकार यह महामुहूर्त कुल 21 घंटे 59 मिनट तक बना रहेगा। इस नक्षत्र का मुख्य गुण वृद्धि के साथ स्थिरता प्रदान करना है। इसी कारण शास्त्रों में इस दिन किए जाने वाले कार्यों को लंबे समय तक लाभ और स्थायित्व देने वाला माना गया है। ज्योतिष शास्त्र में इसे पोषण, वृद्धि और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
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पुष्य नक्षत्र के शुभ होने के मुख्य कारण
वैदिक ज्योतिष में 27 नक्षत्रों के बीच पुष्य को नक्षत्रों का राजा माना गया है। इसके अधिष्ठाता देवता बृहस्पति हैं, जो ज्ञान, धर्म, समृद्धि और सद्बुद्धि के प्रतीक हैं। वहीं, इस नक्षत्र के स्वामी शनि देव हैं, जिन्हें अनुशासन, कर्म, स्थिरता और परिश्रम का कारक माना जाता है। पुष्य शब्द का सीधा संबंध पोषण और विकास से है, इसलिए इसे सभी शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
चौघड़ियानुसार खरीदी के लिए मुहूर्त
चर : सुबह 07:56 से 09:21 एवं रात 8.59 से 10.35 बजे तक।
लाभ: सुबह 09.21 से 10.45 बजे तक।
अमृत : सुबह 10:45 से दोपहर 12:10 एवं शाम 7.24 से 8.59 बजे तक।
शुभ : दोपहर 1.35 से दोपहर 2.59 एवं शाम 5.49 से 7.24 बजे तक।
स्थिर लग्ननुसार खरीदारी
वृश्चिक : सुबह 7.49 से सुबह 10.08 बजे तक।
कुंभ : दोपहर 1.54 से दोपहर 3.22 बजे तक।
वृषभ : शाम 6.22 से शाम 8.17 बजे तक।
