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Indore:जैन धर्मवलंबियों के तलाक से जुडे मामलों की याचिका निरस्त नहीं होगी, हाईकोर्ट की रोक

Mon, 17 Feb 2025 07:09 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Mon, 17 Feb 2025 07:09 PM IST
सार

जैन परिवारों से जुड़े वैवाहिक मामलों का निराकरण हिंदू विवाह अधिनियम के तहत हो रहा है, लेकिन अब फैमेली कोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम में इस प्रकरणों का निराकरण नहीं होने के हवाला देकर याचिका निरस्त कर दी।

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Indore: Petition related to divorce of Jain followers will not be rejected, High Court's stay
हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इंदौर हाईकोर्ट ने जैस परिवारों के तलाक से जुड़ी याचिकाएं निरस्त करने के फैमेली कोर्ट के फैसले पर रोक लगाई है। कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट एके सेठी को मामले में न्याय मित्र नियुक्त किया है। वे इस मामले में अलग-अलग बिंदुओं पर अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार करेंगे और कोर्ट को अवगत कराएंगे। इसके बाद कोर्ट आगे की सुनवाई करेगी।

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अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी।अल्पसंख्यक होने के हवाला देते हुए फैमेली कोर्ट ने जैन समाज से जुड़े दंपत्तियों की तलाक से जुड़ी 27 याचिकाए निरस्त कर दी थी। कोर्ट का तर्क था कि जैन दंपत्तियों से जुड़े वैवाहिक मामलों का निराकरण हिंदू विवाह अधिनियम के तहत नहीं किया जा सकता, लेकिन अब फैमेली कोर्ट इस आधार पर फिलहाल कोई याचिका निरस्त नहीं कर सकेगा।

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27 याचिकाएं निरस्त करने के बाद याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई। कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार ने दस साल पहले जैन समाज को अल्पसंख्यक घोषित किया है। उसके बाद से जैन परिवारों से जुड़े वैवाहिक मामलों का निराकरण हिंदू विवाह अधिनियम के तहत हो रहा है, लेकिन अब फैमेली कोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम में इस प्रकरणों का निराकरण नहीं होने के हवाला देकर याचिका निरस्त कर दी। हाईकोर्ट ने एक अधिवक्ता नियुक्त कर इस मामले में अध्ययन करने को कहा है।

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आपको बता दे कि वर्ष 2014 में जैन समाज को केंद्र सरकार ने अल्पसंख्यक घोषित किया था। पक्षकार की तरफ से पैरवी कर रहे एडवोकेट पंकज खंडेलवाल ने कोर्ट को बताया कि कुटुम्ब न्यायालय की पांच खंडपीठ में से चार जैन धर्मावलंबियों के मामलों की सुनवाई हिंदू विवाह अधिनियम के तहत कर रही हैं, जबकि एक खंडपीठ ने ऐसे मामलों की सुनवाई करने से इंकार करते हुए 28 अलग-अलग याचिकाएं निरस्त कर दी।

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