Indore News: उपराष्ट्रपति और मुख्यमंत्री ने बताए अटल बिहारी वाजपेई के अनसुने किस्से
Indore News: इंदौर के डेली कॉलेज में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में 'शून्य से शतक' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शिरकत की।
विस्तार
राजनीति में स्थापित किए नए आदर्श
डेली कॉलेज में आयोजित 'शून्य से शतक: एक शताब्दी अटल भारत की' स्मरणोत्सव कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि अटल जी ने राजनीति में कई ऐसी मिसालें और आदर्श स्थापित किए हैं, जिन्हें देश हमेशा याद रखेगा। उन्होंने उनके व्यक्तित्व को सर्वसमावेशी बताते हुए नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बताया। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने समारोह में कहा कि मां अहिल्या की पावन धरती पर आकर उन्हें विशेष प्रसन्नता है। उन्होंने कहा कि अटल जी संवाद, समावेशी विकास और मानवीय सुशासन में विश्वास रखते थे। सांसद, कवि और प्रधानमंत्री हर भूमिका में उन्होंने सार्वजनिक विमर्श को गरिमा दी और सिद्ध किया कि राजनीति सिद्धांतनिष्ठ और करुणामय हो सकती है। उन्होंने अटल सरकार की प्रमुख उपलब्धियों प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना, दिल्ली मेट्रो, नए राज्यों का गठन (झारखंड, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड) तथा पोखरण परमाणु परीक्षण का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पहलों ने आधुनिक भारत की नींव मजबूत की।
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2 लाख करोड़ से अधिक के औद्योगिक निवेशों/विकास कार्यों का भूमिपूजन अटल जी को समर्पित
इस अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी अपने विचार साझा किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेई के जीवन और उनके सिद्धांतों से हमने बहुत कुछ सीखा है। उनके द्वारा स्थापित किए गए मूल्य आने वाली पीढ़ियों को सदैव सही मार्ग दिखाते रहेंगे और देश के विकास में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। मुख्यमंत्री ने कहा अटल जी प्रचारक, लेखक, पत्रकार, कवि, राजनेता और अनेकों रूपों में अपनी छाप छोड़ गए। विपक्ष में रहकर लंबे समय तक वे सत्ता को सही दिशा दिखाते रहे। पहली बार संयुक्त राष्ट्र संघ में अटल जी ने हिंदी में भाषण दिया। इमरजेंसी में इतने बड़े नेता होते हुए भी वे सहज रूप से जेल चले गए। 24 दलों के साथ मिलकर सरकार चलाने का काम सिर्फ अटल जी ही कर सकते थे। परमाणु परीक्षण करके उन्होंने पूरी दुनिया में भारत की शक्ति का परिचय करवाया।
ममता, मायावती, जयललिता... अटलजी ने सभी को साधा
सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ममताजी को तो आज भी कंट्रोल करना मुश्किल है, अटलजी ने सरकार कैसे चलाई होगी। क्या ममता, क्या जयललिता...पता नहीं अटल जी कैसे इन्हें पूरा पाढ़ते (झेलते) होंगे। कैसे काम चलता होगा। सब एक से बढ़कर एक...क्या मायावती, क्या जयललिता, क्या ममता सब जगदंबा ही जगदंबा...आनंद ही आनंद। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी राष्ट्र नीति के शिखर पुरुष, राजनीति के अजातशत्रु और भारतीय लोकतंत्र की मर्यादा के प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि अटल जी का जीवन विचारों की दृढ़ता, राष्ट्रधर्म और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अटूट समर्पण का अनुपम उदाहरण है। अटल जी का व्यक्तित्व ऐसा था जिसने हर काल और हर युग में भारतीय राजनीति को दिशा दी। उनकी राजनीतिक यात्रा भारतीय लोकतंत्र की प्रेरक गाथा है। लोकसभा में उनके ओजस्वी भाषणों से सत्ता और विपक्ष दोनों ही अपने कर्तव्यों के प्रति सजग होते थे। बांग्लादेश युद्ध से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक भारत का मान बढ़ाया। संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी में दिया गया उनका भाषण देश की सांस्कृतिक अस्मिता का ऐतिहासिक क्षण रहा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अटल जी की सरकार चलाने की शैली पवित्रता और नैतिक साहस की मिसाल थी, चाहे गठबंधन सरकार हो या एक वोट से बहुमत का प्रश्न। परमाणु परीक्षणों के माध्यम से उन्होंने भारत को आत्मसम्मान और सामर्थ्य का संदेश दिया। कारगिल संघर्ष के समय उनके नेतृत्व ने देश की सीमाओं और स्वाभिमान की रक्षा का संकल्प दृढ़ किया। उन्होंने अटल जी की कविताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका साहित्य जीवन, समाज और लोकतंत्र को समभाव से आगे बढ़ने की सीख देता है। यह हम सबके लिए मार्गदर्शक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 25 दिसंबर को जन्म शताब्दी वर्ष के समापन अवसर पर ग्वालियर से 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक के औद्योगिक निवेशों/विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण अटल जी को समर्पित किया जाएगा, यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
विराट व्यक्तित्व के नेता थे अटल जी
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने अटल जन्म शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि आज भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्म शताब्दी के पावन अवसर पर विचार अभिव्यक्त करने का अवसर मिलना उनके लिए गर्व और हर्ष का विषय है। उन्होंने कहा कि अटल जी की जन्म शताब्दी केवल पुण्य स्मरण का प्रसंग नहीं, बल्कि उनके विराट व्यक्तित्व, उच्च आदर्शों और दूरदर्शी नेतृत्व से प्रेरणा प्राप्त करने का पावन क्षण है। उन्होंने स्वयं को भाग्यशाली बताते हुए कहा कि उन्हें अटल जी के सानिध्य में कार्य करने का अवसर मिला, जहां उनके महान आभामंडल में रहकर उन्हें करीब से देखने, समझने और उनसे प्रेरित होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
अटल फाउंडेशन का अभियान
अटल फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में शहर के प्रबुद्धजन बड़ी संख्या में एकत्रित हुए। आयोजन समिति के अभिषेक तिवारी ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य अटल जी के जीवन मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाना है। उन्होंने संकल्प दोहराया कि भविष्य में भी इस तरह के आयोजनों के माध्यम से उनके विचारों का प्रसार जारी रहेगा।
इन विभूतियों को मिला ‘अटल अलंकरण’
इस अवसर पर सत्यनारायण सत्तन (प्रसिद्ध कवि), सत्यनारायण जटिया (पूर्व केंद्रीय मंत्री), संजय जगदाले (भारतीय क्रिकेट टीम चयन समिति के पूर्व चयनकर्ता) तथा पारंग शुक्ला (सागर) को ‘अटल अलंकरण’ से सम्मानित किया गया। समारोह में स्व. अटल जी के जीवन पर आधारित एक भावपूर्ण लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। साथ ही, अटल जी से जुड़े संस्मरणों पर आधारित पुस्तक सदा अटल महाग्रंथ के तृतीय संस्करण के कवर पेज तथा केलेण्डर का विमोचन भी किया गया। अटल फाउंडेशन की माला तिवारी वाजपेई ने अतिथियों का सम्मान किया।
