Indore News: दुनिया एक ग्लोबल विलेज, इसे अब सामूहिक जिम्मेदारी से चलाना होगा
Indore News: अखिल भारतीय शांति एवं एकजुटता संगठन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में डॉ. एवलिन ग्रेडा लिंडनर ने व्यक्त किए विचार, वर्तमान दौर में शांति और मानव गरिमा के विषय पर आयोजित हुआ जन-संवाद।
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आज व्यक्ति और राष्ट्रों के बीच संबंध बाजार की कीमत और मुनाफे से तय और संचालित होते हैं। सामूहिक हित और जिम्मेदारी की भावना विलुप्त हो रही है। यही कारण है कि सामाजिक और पारिस्थितिक अपराध बढ़ रहे हैं। हिंसा, नफरत और आतंकवाद का सीधा संबंध संसाधनों, अहम और प्रतिष्ठा के लिए प्रतिस्पर्धा और वर्चस्व की भावना से है।
ये विचार ह्यूमन डिग्निटी एंड ह्यूमिलेशन स्टडीज (एचडीएचएस) की संस्थापक अध्यक्ष एवं वर्ल्ड डिग्निटी यूनिवर्सिटी की सह-संस्थापक डॉ. एवलिन ग्रेडा लिंडनर ने ''वर्तमान दौर में शांति और मानव गरिमा'' विषय पर आयोजित जन-संवाद में व्यक्त किए। कार्यक्रम का आयोजन अखिल भारतीय शांति एवं एकजुटता संगठन और स्टेट प्रेस क्लब मध्य प्रदेश द्वारा गांधी शहादत दिवस के अवसर पर किया गया था।
सहभागी प्रबुद्ध नागरिकों से संवाद करते हुए डॉ. लिंडनर ने मानव गरिमा कायम रखने और अवमान से ऊपर उठने की दिशा में अपने दीर्घकालिक कार्य अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि युद्ध के साथ ही आर्थिक, सामाजिक, लैंगिक गैर बराबरी, अवसरों की असमानता, क्षेत्रीय विषमता, पर्यावरणीय संकट जैसे कारक न केवल दुनिया में जारी युद्धों और विवादों की वजह है अपितु वे मानवता को भी लगातार अपमानित करते हैं और मानव गरिमा और विश्व शांति की राह में बाधा हैं। राष्ट्रों की एक दूसरे के प्रति असुरक्षा की भावना हथियारों की होड़ का कारण बनती है। उदारवाद की नजर में बाजार और व्यापार युद्ध टाल सकते हैं।
संयुक्त नागरिकता को अपनाना होगा
एक व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के रूप में हमें सामूहिक जिम्मेदारी से गरिमामय वैश्विक सहयोग की ओर बढ़ना होगा। दुनिया को एक ग्लोबल विलेज की तरह सामूहिक जिम्मेदारी से चलाना होगा जहां हर नागरिक एक वैश्विक नागरिक के रूप में अपना योगदान दे। संवाद और मोहब्बत मजबूत सहयोग का आधार होता है। वैश्विक संघवाद की भावना को प्रबल करना होगा। संयुक्तराष्ट्र के स्थान पर संयुक्त नागरिकता को अपनाना होगा।
शांति स्वयं एक मार्ग
महात्मा गांधी को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा कि शांति का कोई मार्ग नहीं है अपितु शांति स्वयं एक मार्ग है। गांधी के अहिंसा, प्यार और सहकारिता के सूत्र इस दिशा में हमारा मार्गदर्शन करते हैं। तेजी से बदलती तकनीक के दौर में जब एआई से दुनिया संचालित करने के प्रयास हो रहे हैं, ऐसे समय में मानवीय मूल्यों के संरक्षण हेतु एक नई विचारधारा विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है, इस हेतु मैं पिछले 50 वर्षों से दुनिया का भ्रमण कर रही हूं। दुनिया में समानता और सम्मान पूर्वक जीवन जीने का सबको अवसर मिलना चाहिए।
संवाद का समन्वय और अनुवाद रेनेसां विश्वविद्यालय, इंदौर के कुलपति डॉ. राजेश दीक्षित नीरव ने किया। अतिथि स्वागत स्टेट प्रेस क्लब के अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल, ऐप्सो के शिवाजी मोहिते, हरनामसिंह, रामस्वरूप मंत्री, सुनील चंद्रन, डॉ. कीर्ति यादव, अर्चना सेन, सारिका श्रीवास्तव, शफी शेख, विजय दलाल, अजीत केतकर, मिलिंद रावल ने किया। अतिथि परिचय ऐप्सो के महासचिव अरविंद पोरवाल ने दिया, संचालन विवेक मेहता और आभार प्रदर्शन श्याम सुंदर यादव ने किया।
