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Indore News: डकैतों को मारा, पदक के लिए सुप्रीम कोर्ट में लड़ी लड़ाई, अब मिलेगा सम्मान
Sat, 09 Aug 2025 07:38 PM IST
अर्जुन रिछारिया
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Sat, 09 Aug 2025 07:38 PM IST
सार
Indore News: 2003 में ग्वालियर के जंगलों में दो खूंखार डकैतों का एनकाउंटर करने वाले अफसर विवेक सिंह चौहान को 22 साल बाद राष्ट्रपति पुलिस पदक मिलने का रास्ता सुप्रीम कोर्ट के फैसले से साफ हो गया।
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विवेक सिंह
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
विस्तार
दो खूंखार डकैतों का एनकाउंटर करने वाले अफसर विवेक सिंह चौहान को 22 साल बाद राष्ट्रपति पुलिस पदक मिलने का रास्ता साफ हुआ। वीरता का सम्मान पाने के लिए विवेक सिंह को लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। साल 2003 में उन्होंने दो डकैतों को मार गिराया था। उस मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने मेरिट के आधार पर उनके पक्ष में फैसला सुनाया। वर्तमान में चौहान इंदौर में एसीपी पद पर पदस्थ हैं। उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील मृगेंद्र सिंह, जयदीप कौरव और शांभवी श्रीवास्तव ने पैरवी की। इससे पहले विवेक सिंह हाईकोर्ट की डबल बेंच में भी केस जीत चुके हैं।
ग्वालियर के जंगलों में दो डकैतों को मारा, खुद भी गंभीर घायल हुए
24 जून 2003 में यह घटना हुई थी। ग्वालियर जिले के घाटीगांव थाना क्षेत्र में डांडाखिड़क के घने जंगल हैं। यहां पर विवेक सिंह की डकैतों से मुठभेड़ हुई थी। तब विवेक सिंह वहां एसआई थे। मुठभेड़ के दौरान उन्होंने अदम्य साहस दिखाते हुए डकैतों को घेरकर मार गिराया था। मुठभेड़ के दौरान उनके साथ उनके साथी होमगार्ड भी थे। इस घटना में विवेक सिंह खुद गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस बहादुरी पर राज्य सरकार ने राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक के लिए अनुशंसा भेजी थी।
केंद्र ने कहा प्रस्ताव समयसीमा में नहीं मिला
राज्य सरकार की सिफारिश के बावजूद केंद्र ने इस मामले में फैसला नहीं लिया था। केंद्र के द्वारा कारण बताया गया था कि प्रस्ताव समयसीमा में नहीं मिला था। इसके बाद विवेक सिंह ने मप्र हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने 9 जनवरी 2025 को उनके पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बाद केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई बीआर गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस एवी अंजरिया की बेंच ने केंद्र सरकार की अपील खारिज करते हुए विवेक सिंह के हक में फैसला सुनाया। अब उन्हें यह पदक मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
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ग्वालियर के जंगलों में दो डकैतों को मारा, खुद भी गंभीर घायल हुए
24 जून 2003 में यह घटना हुई थी। ग्वालियर जिले के घाटीगांव थाना क्षेत्र में डांडाखिड़क के घने जंगल हैं। यहां पर विवेक सिंह की डकैतों से मुठभेड़ हुई थी। तब विवेक सिंह वहां एसआई थे। मुठभेड़ के दौरान उन्होंने अदम्य साहस दिखाते हुए डकैतों को घेरकर मार गिराया था। मुठभेड़ के दौरान उनके साथ उनके साथी होमगार्ड भी थे। इस घटना में विवेक सिंह खुद गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस बहादुरी पर राज्य सरकार ने राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक के लिए अनुशंसा भेजी थी।
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केंद्र ने कहा प्रस्ताव समयसीमा में नहीं मिला
राज्य सरकार की सिफारिश के बावजूद केंद्र ने इस मामले में फैसला नहीं लिया था। केंद्र के द्वारा कारण बताया गया था कि प्रस्ताव समयसीमा में नहीं मिला था। इसके बाद विवेक सिंह ने मप्र हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने 9 जनवरी 2025 को उनके पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बाद केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई बीआर गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस एवी अंजरिया की बेंच ने केंद्र सरकार की अपील खारिज करते हुए विवेक सिंह के हक में फैसला सुनाया। अब उन्हें यह पदक मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
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