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Indore News: इंदौर में रातों-रात सील हुईं कई और होटलें, विधायक की शिकायत के बाद जागा निगम
Sun, 17 May 2026 07:22 PM IST
Arjun Richhariya
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Sun, 17 May 2026 07:22 PM IST
सार
Indore News: महालक्ष्मी नगर और चिकित्सक नगर में निगम ने आवासीय प्लॉट पर अवैध रूप से संचालित हो रहीं तीन और होटलों को सील कर दिया है, जिसके बाद सील की गई होटलों की संख्या 19 हो गई है। विधायक महेंद्र हार्डिया ने विधानसभा में यह मुद्दा उठाया था।
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इंदौर में कई होटलें सील।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
विस्तार
इंदौर शहर के महालक्ष्मी नगर क्षेत्र में नगर निगम ने अवैध रूप से संचालित व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ अपनी कार्रवाई को तेज कर दिया है। निगम की टीम ने हाल ही में आवासीय भूखंडों पर नियमों के विरुद्ध बनाई गईं तीन और होटलों को पूरी तरह से सील कर दिया है। इस नए एक्शन के बाद अब तक इस विशेष इलाके में सील की जा चुकी होटलों की कुल संख्या बढ़कर 19 हो गई है।
प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, नगर निगम द्वारा पूर्व में यहां कुल 25 होटलों को नियमों के उल्लंघन को लेकर नोटिस जारी किए गए थे, जिसके बाद यह कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी तेज हो गई है कि निगम प्रशासन आवासीय भूखंडों पर धड़ल्ले से चल रहे अवैध हॉस्टलों के खिलाफ वैसी तत्परता नहीं दिखा रहा है, जैसी होटलों के खिलाफ देखी जा रही है।
जोन नंबर आठ के विभिन्न वार्डों में चला निगम का डंडा
नगर निगम के जोन नंबर 8 के अंतर्गत आने वाले वार्ड क्रमांक 37 के महालक्ष्मी नगर और चिकित्सक नगर में निगम के अमले ने अचानक पहुंचकर तीन होटलों पर तालाबंदी की कार्रवाई को अंजाम दिया। ये होटलें पूरी तरह से आवासीय अनुमति वाले भवनों में अवैध रूप से व्यावसायिक तौर पर संचालित की जा रही थीं। निगम की टीम ने इस अभियान के दौरान महालक्ष्मी नगर स्थित होटल न्यू आरके, चिकित्सक नगर की होटल एकोदिया और होटल गोल्डन स्टाफ को सील करने की वैधानिक कार्रवाई पूरी की है। गौरतलब है कि इससे ठीक पहले भी निगम ने इसी क्षेत्र की स्कीम नंबर 94 सेक्टर ईबी में एक साथ 16 होटलों को सील करने का बड़ा कदम उठाया था। इस पूरी मुहिम को मिलाकर अब तक कुल 19 होटलों को बंद कराया जा चुका है। क्षेत्र की पार्षद संगीता महेश जोशी ने इस कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि इससे स्थानीय रहवासियों को बहुत बड़ी राहत मिली है, लेकिन मुख्य और प्रभावी कार्रवाई होना अभी भी बाकी है।
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नोटिस के बाद भी बंद नहीं हुए थे संस्थान, अनैतिक गतिविधियों की शिकायत
स्थानीय पार्षद ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि नगर निगम ने इस पूरे क्षेत्र में चिन्हित की गईं 25 होटलों को पहले ही कानूनी नोटिस थमा दिए थे। इनमें से 19 होटलों को अब तक सील कर दिया गया है, जबकि 6 अन्य होटलों पर अभी भी कार्रवाई होना शेष है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि रहवासी इलाकों के बिल्कुल बीचों-बीच चल रही होटलों पर कार्रवाई करना बेहद अनिवार्य है, क्योंकि इन स्थानों पर लगातार कई प्रकार के अनैतिक काम होने की शिकायतें मिल रही थीं, जिससे पूरे क्षेत्र का सामाजिक और पारिवारिक माहौल पूरी तरह दूषित हो रहा था। पार्षद ने एक और महत्वपूर्ण आंकड़ा साझा करते हुए बताया कि निगम प्रशासन ने इस इलाके में कुल 39 अवैध हॉस्टलों को भी नोटिस जारी किए थे। ये सभी हॉस्टल भी बिना अनुमति के पूरी तरह से आवासीय भूखंडों पर व्यापारिक तौर पर चलाए जा रहे हैं, लेकिन बेहद आश्चर्य की बात है कि इनमें से किसी भी हॉस्टल के खिलाफ निगम ने अभी तक कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया है।
शहर के अन्य क्षेत्रों में उदासीनता पर खड़े हुए सवाल
इस पूरी मुहिम के पीछे की राजनीतिक और प्रशासनिक पृष्ठभूमि की बात करें तो स्थानीय विधायक महेंद्र हार्डिया द्वारा विधानसभा के पटल पर इस गंभीर मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाया गया था। विधायक के इस हस्तक्षेप के बाद ही दबाव में आए नगर निगम ने इस विशेष क्षेत्र में तो आवासीय भूखंडों पर चल रही होटलों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई कर दी, परंतु शहर के अन्य किसी भी वॉर्ड या क्षेत्र में इस प्रकार की कोई कार्रवाई निगम की किसी भी टीम द्वारा अब तक शुरू नहीं की गई है। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि जब आवासीय नियमों का उल्लंघन करके होटल के रूप में व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन करना पूरी तरह से गैरकानूनी है, तो फिर इस प्रकार की दंडात्मक और सुधारात्मक कार्रवाई को सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित न रखकर पूरे इंदौर शहर में समान रूप से लागू किया जाना चाहिए।
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प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, नगर निगम द्वारा पूर्व में यहां कुल 25 होटलों को नियमों के उल्लंघन को लेकर नोटिस जारी किए गए थे, जिसके बाद यह कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी तेज हो गई है कि निगम प्रशासन आवासीय भूखंडों पर धड़ल्ले से चल रहे अवैध हॉस्टलों के खिलाफ वैसी तत्परता नहीं दिखा रहा है, जैसी होटलों के खिलाफ देखी जा रही है।
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जोन नंबर आठ के विभिन्न वार्डों में चला निगम का डंडा
नगर निगम के जोन नंबर 8 के अंतर्गत आने वाले वार्ड क्रमांक 37 के महालक्ष्मी नगर और चिकित्सक नगर में निगम के अमले ने अचानक पहुंचकर तीन होटलों पर तालाबंदी की कार्रवाई को अंजाम दिया। ये होटलें पूरी तरह से आवासीय अनुमति वाले भवनों में अवैध रूप से व्यावसायिक तौर पर संचालित की जा रही थीं। निगम की टीम ने इस अभियान के दौरान महालक्ष्मी नगर स्थित होटल न्यू आरके, चिकित्सक नगर की होटल एकोदिया और होटल गोल्डन स्टाफ को सील करने की वैधानिक कार्रवाई पूरी की है। गौरतलब है कि इससे ठीक पहले भी निगम ने इसी क्षेत्र की स्कीम नंबर 94 सेक्टर ईबी में एक साथ 16 होटलों को सील करने का बड़ा कदम उठाया था। इस पूरी मुहिम को मिलाकर अब तक कुल 19 होटलों को बंद कराया जा चुका है। क्षेत्र की पार्षद संगीता महेश जोशी ने इस कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि इससे स्थानीय रहवासियों को बहुत बड़ी राहत मिली है, लेकिन मुख्य और प्रभावी कार्रवाई होना अभी भी बाकी है।
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नोटिस के बाद भी बंद नहीं हुए थे संस्थान, अनैतिक गतिविधियों की शिकायत
स्थानीय पार्षद ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि नगर निगम ने इस पूरे क्षेत्र में चिन्हित की गईं 25 होटलों को पहले ही कानूनी नोटिस थमा दिए थे। इनमें से 19 होटलों को अब तक सील कर दिया गया है, जबकि 6 अन्य होटलों पर अभी भी कार्रवाई होना शेष है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि रहवासी इलाकों के बिल्कुल बीचों-बीच चल रही होटलों पर कार्रवाई करना बेहद अनिवार्य है, क्योंकि इन स्थानों पर लगातार कई प्रकार के अनैतिक काम होने की शिकायतें मिल रही थीं, जिससे पूरे क्षेत्र का सामाजिक और पारिवारिक माहौल पूरी तरह दूषित हो रहा था। पार्षद ने एक और महत्वपूर्ण आंकड़ा साझा करते हुए बताया कि निगम प्रशासन ने इस इलाके में कुल 39 अवैध हॉस्टलों को भी नोटिस जारी किए थे। ये सभी हॉस्टल भी बिना अनुमति के पूरी तरह से आवासीय भूखंडों पर व्यापारिक तौर पर चलाए जा रहे हैं, लेकिन बेहद आश्चर्य की बात है कि इनमें से किसी भी हॉस्टल के खिलाफ निगम ने अभी तक कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया है।
शहर के अन्य क्षेत्रों में उदासीनता पर खड़े हुए सवाल
इस पूरी मुहिम के पीछे की राजनीतिक और प्रशासनिक पृष्ठभूमि की बात करें तो स्थानीय विधायक महेंद्र हार्डिया द्वारा विधानसभा के पटल पर इस गंभीर मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाया गया था। विधायक के इस हस्तक्षेप के बाद ही दबाव में आए नगर निगम ने इस विशेष क्षेत्र में तो आवासीय भूखंडों पर चल रही होटलों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई कर दी, परंतु शहर के अन्य किसी भी वॉर्ड या क्षेत्र में इस प्रकार की कोई कार्रवाई निगम की किसी भी टीम द्वारा अब तक शुरू नहीं की गई है। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि जब आवासीय नियमों का उल्लंघन करके होटल के रूप में व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन करना पूरी तरह से गैरकानूनी है, तो फिर इस प्रकार की दंडात्मक और सुधारात्मक कार्रवाई को सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित न रखकर पूरे इंदौर शहर में समान रूप से लागू किया जाना चाहिए।
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