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Indore News: गनमैन और कैमरों के सामने ATM से चुराए 40 लाख, शातिरों की ट्रिक देखकर पुलिस भी हैरान

Sun, 05 Jul 2026 05:05 PM IST
Arjun Richhariya न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Arjun Richhariya Updated Sun, 05 Jul 2026 05:05 PM IST
सार

ऑडिट के दौरान खुलासा होने पर पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है जिन्होंने यह पूरी रकम ऑनलाइन गेमिंग और आईपीएल सट्टे में उड़ा दी थी।

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अभिषेक और दीपक - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर

विस्तार

इंदौर के लसूड़िया थाना क्षेत्र में विभिन्न बैंकों के एटीएम में नकदी जमा करने वाले दो सुरक्षा कर्मचारियों ने बड़ी हेराफेरी को अंजाम दे दिया। सुरक्षा के कड़े इंतजामों और पुख्ता निगरानी के बीच भी दोनों कस्टोडियन एटीएम मशीनों में पैसे डालते वक्त चालाकी से नोटों की गड्डियां गायब कर देते थे। यह सिलसिला पिछले छह महीनों से लगातार चल रहा था और आरोपियों को पूरा भरोसा था कि उनकी यह चालाकी कभी पकड़ी नहीं जाएगी। हालांकि, सालाना वित्तीय ऑडिट की प्रक्रिया शुरू होते ही उनके इस काले कारनामे की कलई खुल गई और दोनों सीधे पुलिस की गिरफ्त में आ गए।
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पुलिस द्वारा की गई शुरुआती पूछताछ में जो खुलासे हुए हैं, उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों और बैंक प्रबंधन को हैरान कर दिया है। पकड़े गए दोनों ही कर्मचारियों ने बताया कि वे इंटरनेट की दुनिया में शॉर्टकट से अमीर बनने के चक्कर में पड़ गए थे। उन्होंने चुराई गई लगभग पूरी रकम ऑनलाइन गेमिंग और आईपीएल क्रिकेट के मैचों पर लगने वाले सट्टेबाजी के अवैध कारोबार में झोंक दी थी। लसूड़िया पुलिस ने जब दोनों शातिरों को दबोचा, तो उनके पास से गबन की गई कुल राशि में से महज दो लाख रुपए ही बरामद हो सके। फिलहाल पुलिस की टीमें बाकी की बड़ी रकम का पता लगाने के लिए लगातार जुटी हुई हैं और आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।
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सुरक्षा घेरे को ठेंगा दिखाकर करते थे चोरी
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त पराग सैनी ने इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह आपराधिक मामला सीएमएस नामक कैश मैनेजमेंट कंपनी से जुड़ा हुआ है। इस प्रतिष्ठित कंपनी में अभिषेक और दीपक नाम के दो कर्मचारी पिछले एक वर्ष से कार्यरत थे, जिन्हें तकनीकी भाषा में कस्टोडियन कहा जाता है और इन्हीं के पास एटीएम का पासवर्ड और नकदी की जिम्मेदारी होती थी। ये दोनों युवक हर रोज कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मुख्य कार्यालय से नोटों से भरी हुई भारी-भरकम पेटी को कैश वैन में लोड करते थे और गनमैन के साथ अलग-अलग इलाकों के एटीएम काउंटरों तक ले जाते थे। लेकिन रोज-रोज करोड़ों रुपए की नकदी को अपनी आंखों के सामने देखकर इन दोनों कर्मचारियों की नीयत पूरी तरह से डोल गई और उन्होंने कंपनी को ही चूना लगाने की साजिश रच डाली।
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एटीएम के भीतर लगे अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरों, बाहर तैनात सुरक्षा गार्ड और कैश वैन में हमेशा मौजूद रहने वाले सशस्त्र गनमैन की मौजूदगी के बावजूद दोनों आरोपी बेहद शातिराना तरीके से इस काम को अंजाम देते थे। जब वे एटीएम मशीन के भीतर कोड डालकर नकदी बॉक्स खोलते थे, तो जनता के लिए पैसे जमा करने के दौरान चुपके से नोट निकाल लेते थे। पिछले 6 महीनों के दौरान उन्होंने हर चक्कर में कभी एक लाख तो कभी डेढ़ लाख रुपए की नकदी गायब करना शुरू कर दिया था। इस चालाकी का शुरुआत में किसी को भी भनक तक नहीं लगी, जिससे उनके हौसले सातवें आसमान पर पहुंच गए। इसी तरह धीरे-धीरे करके उन्होंने महज 6 महीने के भीतर कंपनी को 40 लाख रुपए की भारी वित्तीय चपत लगा दी।

वित्तीय ऑडिट में भंडाफोड़ और पुलिसिया कार्रवाई
पुलिस अधिकारी पराग सैनी के मुताबिक, हाल ही में जब कंपनी के खातों और एटीएम मशीनों में मौजूद नकदी का आंतरिक ऑडिट किया गया, तब जाकर इस सुनियोजित गबन का खुलासा हुआ। ऑडिट रिपोर्ट में साफ हुआ कि अलग-अलग एटीएम मशीनों से पिछले छह महीनों के अंतराल में कुल 40 लाख रुपए की राशि गायब है। इस बड़े वित्तीय घोटाले की लिखित शिकायत जून महीने में लसूड़िया पुलिस थाने में दर्ज कराई गई थी, जिसके तुरंत बाद पुलिस प्रशासन ने गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच के लिए विशेष टीमों का गठन कर दिया।

पुलिस की तकनीकी टीम ने मामले की गहराई से पड़ताल शुरू की और कंपनी के संदिग्ध कर्मचारियों को रडार पर लेकर एक-एक कर उनसे पूछताछ का सिलसिला तेज कर दिया। जैसे ही आरोपी अभिषेक और दीपक को भनक लगी कि पुलिस की सुई उनकी तरफ घूम चुकी है और वे पकड़े जाने वाले हैं, तो वे तुरंत शहर से फरार हो गए। हालांकि, पुलिस टीमों ने उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दी और तकनीकी सर्विलांस के जरिए लगातार दबाव बनाए रखा, जिसके परिणामस्वरूप आखिरकार दोनों आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार करने में सफलता हासिल कर ली।

ऑनलाइन गेमिंग और सट्टे की लत ने किया बर्बाद
गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने दोनों आरोपियों की तलाशी ली, तो उनके पास से गबन किए गए 40 लाख रुपए में से केवल दो लाख रुपए की नकदी ही हाथ लग सकी। जब पुलिस अधिकारियों ने बाकी के 38 लाख रुपए के बारे में सख्ती से पूछताछ की, तो आरोपियों ने चौंकाने वाला सच उगला। उन्होंने कुबूल किया कि एटीएम से चुराई गई रकम को वे तुरंत अलग-अलग ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स और आईपीएल मैचों के दौरान सट्टेबाजी के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगा देते थे। सट्टे और गेमिंग की बुरी लत के कारण वे जीत नहीं पाए और देखते ही देखते पूरी की पूरी रकम इस दलदल में हार गए।


लसूड़िया थाना पुलिस अब इन दोनों आरोपियों के बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट के लेन-देन की बारीकी से स्क्रूटनी कर रही है। पुलिस बैक-ट्रैकिंग और फोरेंसिक वित्तीय जांच के माध्यम से यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है कि यह पैसा किन-किन सटोरियों या ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों के खातों में ट्रांसफर किया गया था। पुलिस इस कोशिश में है कि कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए जितनी भी राशि वापस रिकवर की जा सके, उसे बरामद किया जाए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एटीएम मशीनों में भारी मात्रा में नकदी का प्रवाह होता था, जिसका इन कर्मचारियों ने गलत फायदा उठाया। फिलहाल दोनों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं ताकि यह पता चल सके कि उन्होंने पहले भी कहीं इस तरह की धोखाधड़ी तो नहीं की है।
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