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Indore News: उर्दू की महफिल में हुआ हिंदी का सम्मान, शायरी कविताओं से रोशन हुई रात
Sat, 01 Feb 2025 10:12 PM IST
अर्जुन रिछारिया
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Sat, 01 Feb 2025 10:12 PM IST
सार
Indore News: लोकप्रिय कवि सत्यनारायण सत्तन के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम जश्न ए सत्तन को देखने के लिए उमड़ पड़ा शहर। देश के नामचीन कवियों और शायरों से गुलजार हुई रात।
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श्रोताओं को संबोधित करते सत्यनारायण सत्तन।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
विस्तार
शनिवार रात हुए अनोखे आयोजन ने शहरवासियों का दिल जीत लिया। लोकप्रिय कवि सत्यनारायण सत्तन के सम्मान में आयोजित जश्न ए सत्तन में कई नामचीन हस्तियों ने शिरकत की। बास्केटबॉल कॉम्प्लेक्स में आयोजित कार्यक्रम को देखने के लिए खासी भीड़ उमड़ी और शुभारंभ से पहले ही पूरा सभागृह श्रोताओं से खचाखच भरा नजर आया।
उर्दू की महफिल में हिंदी का सम्मान
कार्यक्रम की टैग लाइन ने सभी को खासा आकर्षित किया जिसमें लिखा गया कि उर्दू की महफिल में हिंदी का सम्मान। सत्यनारायण सत्तन ने अपने लिए आयोजित इस मुशायरे और कवि सम्मेलन के लिए सभी कवियों, शायरों और शहरवासियों का धन्यवाद दिया। उन्होंने कार्यक्रम की शुरुआत में कविताओं, शायरी का महत्व बताते हुए कहा कि किस तरह से हर दौर में इंसान को इंसान से जोड़ने के लिए इन्होंने अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने अहिल्या नगरी की सांस्कृतिक विरासत और मालवा निमाड़ के महत्व को रेखांकित करते हुए भविष्य के इंदौर का खाका खींचने का भी प्रयास किया। बातों ही बातों में उन्होंने इंदौर के जिम्मेदारों और शहरवासियों को कई जरूरी संदेश भी दे दिए।
इन्हें सुनने के लिए बेसब्र नजर आए श्रोता
शकील आज़मी, अबरार काशिफ, महशर आफरीदी, संपत सरल, शकील जमाली, नदीम शाद, स्वयं श्रीवास्तव, नदीम फर्रुख, नईम फ़राज़, जीशान इब्राहिम, हिमांशी बाबरा, मुश्ताक़ अहमद मुश्ताक, मनिका दुबे, अहमद निसार, तजदीद साक़ी, इमरान यूसुफजई ने कार्यक्रम की शान बढ़ाई।
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उर्दू की महफिल में हिंदी का सम्मान
कार्यक्रम की टैग लाइन ने सभी को खासा आकर्षित किया जिसमें लिखा गया कि उर्दू की महफिल में हिंदी का सम्मान। सत्यनारायण सत्तन ने अपने लिए आयोजित इस मुशायरे और कवि सम्मेलन के लिए सभी कवियों, शायरों और शहरवासियों का धन्यवाद दिया। उन्होंने कार्यक्रम की शुरुआत में कविताओं, शायरी का महत्व बताते हुए कहा कि किस तरह से हर दौर में इंसान को इंसान से जोड़ने के लिए इन्होंने अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने अहिल्या नगरी की सांस्कृतिक विरासत और मालवा निमाड़ के महत्व को रेखांकित करते हुए भविष्य के इंदौर का खाका खींचने का भी प्रयास किया। बातों ही बातों में उन्होंने इंदौर के जिम्मेदारों और शहरवासियों को कई जरूरी संदेश भी दे दिए।
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इन्हें सुनने के लिए बेसब्र नजर आए श्रोता
शकील आज़मी, अबरार काशिफ, महशर आफरीदी, संपत सरल, शकील जमाली, नदीम शाद, स्वयं श्रीवास्तव, नदीम फर्रुख, नईम फ़राज़, जीशान इब्राहिम, हिमांशी बाबरा, मुश्ताक़ अहमद मुश्ताक, मनिका दुबे, अहमद निसार, तजदीद साक़ी, इमरान यूसुफजई ने कार्यक्रम की शान बढ़ाई।
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