Indore News: इंदौर में कार्बाइड गन के शिकार तीन बच्चों की रोशनी लौटना संभव नहीं
इंदौर में गन का शिकार हुए 9 केस सामने आए है। गन से निकली गैस और कार्बाइड के टुकड़ों से आंखे खराब हुई है। तीन बच्चों की आंख में ज्यादा नुकसान हुआ है। उनकी रोशनी लौटना संभव नहीं है। बाकी बच्चों का इलाज जारी है।
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इंदौर में भी कार्बाइड गन के शिकार 9 बच्चे हुए है। इंदौर की तुलना में भोपाल में सवा सौ से ज्यादा बच्चे इस गन का शिकार होकर आंखों की परेशानी झेल रहे है। इंदौर के एमवाय असप्ताल में भर्ती तीन बच्चों को उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई,जबकि तीन बच्चों की आंखों की स्थिति गंभीर है। उनकी रोशनी लौटना अब संभव नहीं है। इंदौर में भी प्रशासन ने दुकानों पर छापे मारे, लेकिन यहां कार्बाइड गन की बिक्री नहीं पाई गई। जो बच्चे शिकार हुए है। उन्होंने घर पर इसे प्लास्टिक की बोतल में तैयार किया था।
शुक्रवार को कलेक्टर शिवम वर्मा ने इंदौर में इस गन को बेचने, चलाने पर प्रतिबंध लगा दिया है, हालांकि इंदौर में इस तरह की गन की बिक्री के मामले सामने नहीं आए है। एमवाय अस्पताल की नेत्र रोग विशेषज्ञ डाॅ. प्रीति रावत ने बताया कि इंदौर में गन का शिकार हुए 9 केस सामने आए है। गन से निकली गैस और कार्बाइड के टुकड़ों से आंखे खराब हुई है। तीन बच्चों की आंख में ज्यादा नुकसान हुआ है। उनकी रोशनी लौटना संभव नहीं है। बाकी बच्चों का इलाज जारी है। इंदौर के अलावा देवास, आगर मालवा, खंडवा, खरगोन में भी इस तरह के कुछ केस मिले है।
इंदौर की दो दवाएं अमानक मिली
केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन ने देशभर की 12 दवाईयों के सैंपल लिए थे। उनकी रिपोर्ट अब आ गई है। इसमें इंदौर में बनी दो दवाएं अमानक मिली है। संगठन ने सबसे ज्यादा 49 सैंपल हिमाचल प्रदेश से लिए थे। अमानक दवा का निर्धारण निर्माण प्रक्रिया में लापरवाही, कम गुणवत्ता वाले कच्चे माल के उपयोग और दवाएं बनने के बाद उनके स्टोरेज के आधार पर की गई है।
