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Indore News: काम का लोड प्रमोशन देगा पर शरीर खराब कर देगा, पढ़िए क्या करना चाहिए
Fri, 25 Oct 2024 06:35 PM IST
अर्जुन रिछारिया
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Fri, 25 Oct 2024 06:35 PM IST
सार
Health Tips Indore News: योग एवं आध्यात्म के द्वारा वर्क एंड लाइफ के बीच करें जीवन प्रबंधन, शहर के टैक्स प्रोफेशनल्स ने लिए कई टिप्स।
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कार्यक्रम को संबोधित करते विशेषज्ञ।
- फोटो : अमर उजाला, इंदौर
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विस्तार
टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन एवं इंदौर (indore) सीए शाखा द्वारा योग एवं आध्यात्म के द्वारा वर्क एंड लाइफ के बीच जीवन प्रबंधन विषय पर सेमिनार संपन्न हुआ। इसे सुप्रसिद्ध वक्ता एवं ईएनटी सर्जन डॉ माधवी पटेल ने संबोधित किया।
अधिकतर लोग ऑफिस में काम के बोझ से दबा हुए हैं
टीपीए प्रेसिडेंट सीए जेपी सराफ ने कहा कि टैक्स प्रोफेशनल्स के ऑफिस में पिछले कुछ सालों से कम्प्लायंस का स्तर बढ़ा है तथा हर कोई ऑफिस में काम के बोझ से दबा हुआ है। उन्होंने कहा कि वर्कलोड प्रमोशन के लिए अच्छा हो सकता है, लेकिन हेल्थ के लिए नहीं लेकिन यह भी कटु सत्य है कि वर्क लोड को इग्नोर भी नहीं किया जा सकता। इसलिए आवश्यकता है कि हम वर्क लोड एवं पर्सनल लाइफ के मध्य सामंजस्य स्थापित करें।
यह काम करेंगे रिलेक्स
टीपीए के मानद सचिव सीए डॉ अभय शर्मा ने कहा कि बढ़ती ट्रांसपरेंसी के कारण ऑफिस में दिनोंदिन बढ़ते वर्क लोड को कम तो नहीं किया जा सकता लेकिन हम योग एवं आध्यात्म से इससे होने वाले तनाव को बहुत कुछ हद तक कम कर सकते हैं। सीए शर्मा ने कहा कि तनाव अंततः शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक समस्याओं का कारण बन सकता है। यह आपके भोजन की आदतों, नींद, साथ ही कई अन्य चीजों को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने कहा कि तनाव से बचा नहीं जा सकता लेकिन इसे प्रबंधित किया जा सकता है। संयमित आहार, पर्याप्त नींद और एक नियमित व्यायाम के साथ साथ यदि हम योग और एवं ध्यान को अपनी आदतों में शामिल करेंगे तो हम तनाव प्रबंधन में सफल हो सकते हैं।
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50% से अधिक अमेरिकी तनाव से पीड़ित हैं
मुख्य वक्ता डॉ माधवी पटेल ने कहा कि आज की इस आपाधापी जिंदगी में मनुष्य ने बहुत प्रगति कर ली है पर मानवीय मूल्यों का निरंतर पतन भी हुआ है। आज कल प्रतिस्पर्धा इतनी अधिक है कि उनकी पूर्ति के लिए हम अपने स्वास्थ्य को अनदेखा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तनाव को "इक्कीसवीं सदी की सबसे खराब स्वास्थ्य महामारी" कहा है। अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन रिपोर्ट है कि विभिन्न कारणों से 50% से अधिक अमेरिकी तनाव से पीड़ित हैं। कार्यस्थल से संबंधित तनाव के कारण ब्रिटेन में हर साल 12.5 मिलियन कार्यदिवस खो जाते हैं। उन्होंने कहा कि नकारात्मक भावनाएं, चिंता और तनाव के चलते रिश्तों और परिवारों का विघटन हो रहा है, इसलिए आवश्यकता है योग एवं आध्यात्म के साथ अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएं।
तनाव अच्छा भी हो सकता है
डॉ पटेल ने कहा कि तनाव आपको तब महसूस होता है जब आप चीजों को करने के लिए ओवरलोड हो जाते हैं। शारीरिक, मानसिक या भावनात्मक तनाव आप तब महसूस करते हैं जब आप किसी बात को लेकर व्याकुल होते हैं। कुछ ऐसा होता है जो आपके नियंत्रण में नहीं होता है। जब हम तनाव महसूस करते हैं, तो हमारा शरीर रक्त में रसायनों को छोड़ कर प्रतिक्रिया करता है जो हमें अधिक ऊर्जा और ताकत देता है। यही ताकत हमारे शरीर को 'लड़ाई या उड़ान मोड' में डाल देती है इससे अधिक कार्य करने के लिए एड्रेनालाइन बनाता है। यह क्रिया व्यक्ति विशेष के लिए अच्छी एवं बुरी दोनों हो सकती है। अतः सभी तनाव बुरे नहीं होते। हो सकता है यह खतरनाक स्थितियों से बचने में हमारी मदद करें। यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि तनाव के अच्छे प्रभाव बहुत कम ही देखने में आते हैं अतः तनाव प्रबंधन को अपनी आदतों में शामिल करें।
यह सूत्र ध्यान रखें
डॉ पटेल ने कहा कि आध्यात्म बाहरी मौन व आन्तरिक उमंग और आन्तरिक शांति और बाहरी उत्सव का एक सुखद सम्मिश्रण है। ’ततो द्वन्द्वानभिघात:’ (पातंजलि योग सूत्र २-४८) मन का नकारात्मक बातों पर चिपकना- मन की वृत्ति है। परंतु योगासन व ध्यान की सहायता से मन सहज ही निराशा और नकारत्मकता से ऊपर उठ कर जीवन की आनंद भरी प्राणमयी शक्ति का अहसास करता है।
सेमिनार का संचालन टीपीए के मानद सचिव सीए डॉ अभय शर्मा ने किया। धन्यवाद् अभिभाषण सीए दीपक माहेश्वरी ने दिया। इस अवसर पर सीए शैलेन्द्र सिंह सोलंकी, सीए विजय बंसल, सीए प्रमोद गर्ग, एडवोकेट गोविंद गोयल, सीए अजय सामरिया सहित बड़ी संख्या में सदस्य मौजूद थे।
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अधिकतर लोग ऑफिस में काम के बोझ से दबा हुए हैं
टीपीए प्रेसिडेंट सीए जेपी सराफ ने कहा कि टैक्स प्रोफेशनल्स के ऑफिस में पिछले कुछ सालों से कम्प्लायंस का स्तर बढ़ा है तथा हर कोई ऑफिस में काम के बोझ से दबा हुआ है। उन्होंने कहा कि वर्कलोड प्रमोशन के लिए अच्छा हो सकता है, लेकिन हेल्थ के लिए नहीं लेकिन यह भी कटु सत्य है कि वर्क लोड को इग्नोर भी नहीं किया जा सकता। इसलिए आवश्यकता है कि हम वर्क लोड एवं पर्सनल लाइफ के मध्य सामंजस्य स्थापित करें।
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यह काम करेंगे रिलेक्स
टीपीए के मानद सचिव सीए डॉ अभय शर्मा ने कहा कि बढ़ती ट्रांसपरेंसी के कारण ऑफिस में दिनोंदिन बढ़ते वर्क लोड को कम तो नहीं किया जा सकता लेकिन हम योग एवं आध्यात्म से इससे होने वाले तनाव को बहुत कुछ हद तक कम कर सकते हैं। सीए शर्मा ने कहा कि तनाव अंततः शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक समस्याओं का कारण बन सकता है। यह आपके भोजन की आदतों, नींद, साथ ही कई अन्य चीजों को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने कहा कि तनाव से बचा नहीं जा सकता लेकिन इसे प्रबंधित किया जा सकता है। संयमित आहार, पर्याप्त नींद और एक नियमित व्यायाम के साथ साथ यदि हम योग और एवं ध्यान को अपनी आदतों में शामिल करेंगे तो हम तनाव प्रबंधन में सफल हो सकते हैं।
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50% से अधिक अमेरिकी तनाव से पीड़ित हैं
मुख्य वक्ता डॉ माधवी पटेल ने कहा कि आज की इस आपाधापी जिंदगी में मनुष्य ने बहुत प्रगति कर ली है पर मानवीय मूल्यों का निरंतर पतन भी हुआ है। आज कल प्रतिस्पर्धा इतनी अधिक है कि उनकी पूर्ति के लिए हम अपने स्वास्थ्य को अनदेखा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने तनाव को "इक्कीसवीं सदी की सबसे खराब स्वास्थ्य महामारी" कहा है। अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन रिपोर्ट है कि विभिन्न कारणों से 50% से अधिक अमेरिकी तनाव से पीड़ित हैं। कार्यस्थल से संबंधित तनाव के कारण ब्रिटेन में हर साल 12.5 मिलियन कार्यदिवस खो जाते हैं। उन्होंने कहा कि नकारात्मक भावनाएं, चिंता और तनाव के चलते रिश्तों और परिवारों का विघटन हो रहा है, इसलिए आवश्यकता है योग एवं आध्यात्म के साथ अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएं।
तनाव अच्छा भी हो सकता है
डॉ पटेल ने कहा कि तनाव आपको तब महसूस होता है जब आप चीजों को करने के लिए ओवरलोड हो जाते हैं। शारीरिक, मानसिक या भावनात्मक तनाव आप तब महसूस करते हैं जब आप किसी बात को लेकर व्याकुल होते हैं। कुछ ऐसा होता है जो आपके नियंत्रण में नहीं होता है। जब हम तनाव महसूस करते हैं, तो हमारा शरीर रक्त में रसायनों को छोड़ कर प्रतिक्रिया करता है जो हमें अधिक ऊर्जा और ताकत देता है। यही ताकत हमारे शरीर को 'लड़ाई या उड़ान मोड' में डाल देती है इससे अधिक कार्य करने के लिए एड्रेनालाइन बनाता है। यह क्रिया व्यक्ति विशेष के लिए अच्छी एवं बुरी दोनों हो सकती है। अतः सभी तनाव बुरे नहीं होते। हो सकता है यह खतरनाक स्थितियों से बचने में हमारी मदद करें। यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि तनाव के अच्छे प्रभाव बहुत कम ही देखने में आते हैं अतः तनाव प्रबंधन को अपनी आदतों में शामिल करें।
यह सूत्र ध्यान रखें
डॉ पटेल ने कहा कि आध्यात्म बाहरी मौन व आन्तरिक उमंग और आन्तरिक शांति और बाहरी उत्सव का एक सुखद सम्मिश्रण है। ’ततो द्वन्द्वानभिघात:’ (पातंजलि योग सूत्र २-४८) मन का नकारात्मक बातों पर चिपकना- मन की वृत्ति है। परंतु योगासन व ध्यान की सहायता से मन सहज ही निराशा और नकारत्मकता से ऊपर उठ कर जीवन की आनंद भरी प्राणमयी शक्ति का अहसास करता है।
सेमिनार का संचालन टीपीए के मानद सचिव सीए डॉ अभय शर्मा ने किया। धन्यवाद् अभिभाषण सीए दीपक माहेश्वरी ने दिया। इस अवसर पर सीए शैलेन्द्र सिंह सोलंकी, सीए विजय बंसल, सीए प्रमोद गर्ग, एडवोकेट गोविंद गोयल, सीए अजय सामरिया सहित बड़ी संख्या में सदस्य मौजूद थे।
