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Indore News: सिंहस्थ के लिए 4200 हेक्टेयर में होगी फूलों की खेती, विशेष क्लस्टर बनेगा, केंद्र से मांगी मंजूरी

Sat, 07 Feb 2026 07:32 AM IST
अर्जुन रिछारिया अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर Published by: अर्जुन रिछारिया Updated Sat, 07 Feb 2026 07:32 AM IST
सार

Indore News: सिंहस्थ-2028 और लगातार बढ़ते धार्मिक आयोजनों को देखते हुए राज्य सरकार ने इंदौर जिले में 110 हेक्टेयर में फूलों की खेती का लक्ष्य तय किया है।

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सिंहस्थ की तैयारियां तेज हो गई हैं। - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर

विस्तार

उज्जैन और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के कारण धार्मिक दृष्टि से अहम इंदौर जिले में अब फूलों की खेती को बढ़ावा देने की तैयारी है। राज्य सरकार ने इंदौर सहित कुछ जिलों को चिह्नित करते हुए पुष्प क्षेत्र विस्तार योजना बनाई है। इस योजना के तहत इंदौर जिले में 110 हेक्टेयर भूमि पर फूलों की खेती का लक्ष्य तय किया गया है।
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110 हेक्टेयर में सिर्फ गुलाब की खेती का लक्ष्य
योजना के पहले चरण में 83.87 हेक्टेयर भूमि पर 142 हितग्राही किसानों को चयनित किया गया है। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2027 तक पूरे 110 हेक्टेयर क्षेत्र में केवल गुलाब की खेती की जाए। इससे धार्मिक आयोजनों में फूलों की बढ़ती मांग को स्थानीय स्तर पर पूरा किया जा सकेगा।
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मुख्य सचिव करेंगे प्रोजेक्ट की निगरानी
इस प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग खुद मुख्य सचिव अनुराग जैन करेंगे। हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में इस योजना पर चर्चा के बाद उद्यानिकी विभाग को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। उप संचालक उद्यान को योजना का नोडल अधिकारी बनाया गया है।

सिंहस्थ-2028 को लेकर उज्जैन के लिए बड़ा प्लान
सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन जिले के लिए भी बड़ी योजना बनाई गई है। यहां 4200 हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती के क्लस्टर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए भारत सरकार से विशेष प्रोजेक्ट की मंजूरी के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। अधिकारियों के अनुसार सिंहस्थ मेले के दौरान बड़ी मात्रा में फूलों की आवश्यकता होगी।

इंदौर में रोज 8 से 12 टन फूलों की आवक
इंदौर फूल बाजार एसोसिएशन के अनुसार शहर में प्रतिदिन 8 से 12 टन फूलों की आवक होती है। त्योहारी और पीक सीजन में यह मात्रा कई गुना बढ़ जाती है। नवरात्रि, दीपावली और विवाह आयोजनों के दौरान आवक 30 से 70 टन तक पहुंच जाती है। बाजार में मुख्य रूप से गेंदा, गुलाब और सेवंती की आपूर्ति होती है।

प्रदेश में तेजी से बढ़ रही फूलों की खेती
प्रदेश में फूलों की खेती लगातार बढ़ रही है और मध्यप्रदेश पूरे देश में तीसरे स्थान पर है। गेंदा सबसे अधिक क्षेत्र में उगाया जाता है, इसके बाद गुलाब, क्रिसैंथेमम, ग्लैडियोलस, ट्यूबरोज और अन्य मौसमी फूलों की खेती होती है। राज्य में लगभग 43 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फूलों की खेती की जा रही है। वर्ष 2024-25 में प्रदेश में 5.12 लाख टन से अधिक फूलों का उत्पादन हुआ।


धार्मिक स्थलों के कारण बढ़ी मांग
उज्जैन, ओंकारेश्वर के अलावा देवास, सलकनपुर, नीमच, मंदसौर, महेश्वर, नलखेड़ा, परशुराम लोक सहित कई धार्मिक और तीर्थ स्थल इस क्षेत्र में स्थित हैं। इसी वजह से यहां फूलों की खेती पर विशेष फोकस किया जा रहा है।

मंत्री बोले, बाहर से फूल मंगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी
उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने हाल ही में पत्रकारों से चर्चा में कहा कि उज्जैन और महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर साल भर फूलों की भारी मांग रहती है। सिंहस्थ मेले के दौरान यह मांग कई गुना बढ़ जाती है। सरकार की योजना है कि स्थानीय किसानों से ही फूलों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, जिससे परिवहन लागत घटेगी और किसानों को बेहतर दाम मिल सकेंगे।
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