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किसान आंदोलन: WhatsApp बना किसानों का हथियार, अधिकारी भागने को मजबूर

Fri, 21 Feb 2025 11:40 AM IST
अर्जुन रिछारिया अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर Published by: अर्जुन रिछारिया Updated Fri, 21 Feb 2025 11:40 AM IST
सार

किसान आंदोलन: आउटर रिंग रोड के लिए सरकार द्वारा जबरन जमीन अधिग्रहण के विरोध में किसान संगठित हो रहे हैं। वॉट्सऐप संदेशों के जरिए कुछ ही मिनटों में किसान जुट जाते हैं, जिससे सरकारी अधिकारी सर्वे अधूरा छोड़कर भागने को मजबूर हो रहे हैं।  

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Indore News Farmers Use WhatsApp to Resist Land Acquisition kisan
किसानों का आंदोलन उग्र होता जा रहा है। - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर

विस्तार

इंदौर के आसपास के क्षेत्रों में आउटर रिंग रोड के लिए सरकार किसानों की जमीन अधिग्रहण कर रही है, लेकिन किसानों को उनकी जमीन का बाजार मूल्य का मात्र 20 प्रतिशत ही दिया जा रहा है, जिससे किसान बेहद नाराज हैं। इस अधिग्रहण का विरोध करने के लिए किसानों ने अनोखा तरीका अपनाया है।
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मैसेज आते ही किसानों की गाड़ियां आ जाती हैं
जैसे ही सरकारी अधिकारी जमीन के सर्वे के लिए गांव में पहुंचते हैं, किसान तुरंत अपने वॉट्सऐप ग्रुप पर संदेश भेज देते हैं। यह मैसेज मिलते ही कुछ ही मिनटों में चारों दिशाओं से किसानों की गाड़ियां पहुंच जाती हैं और भारी संख्या में किसान मौके पर इकट्ठे हो जाते हैं। इस घेराबंदी के चलते अधिकारी सर्वे पूरा किए बिना ही गांव छोड़ने पर मजबूर हो जाते हैं। गुरुवार को भी जब नेशनल हाईवे की टीम सर्वे के लिए गांव नाहरखेड़ा और जिंदाखेड़ा पहुंची, तब पहले से मौजूद किसानों ने तुरंत वॉट्सऐप ग्रुप पर संदेश जारी कर दिया। कुछ ही मिनटों में किसानों की गाड़ियों का काफिला मौके पर पहुंच गया, जिससे अधिकारियों को मात्र 15 मिनट के अंदर ही गांव छोड़कर भागना पड़ा।  
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किसानों की रणनीति से दबाव में सरकारी अमला
किसानों की इस रणनीति से सरकारी अमला बुरी तरह दबाव में है और अब जब भी नेशनल हाईवे की टीम सर्वे के लिए पहुंचती है, तो वे मानसिक रूप से इस बात के लिए तैयार रहते हैं कि उनकी घेराबंदी होगी और उन्हें वहां से तत्काल रवाना होना पड़ेगा। इस बीच भारतीय किसान संघ ने इस आंदोलन को और तेज कर दिया है। किसान संघ का दल गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक कर रहा है और भूमि अधिग्रहण के खिलाफ वातावरण तैयार कर रहा है। इंदौर स्थित किसान संघ कार्यालय में हर दिन बैठक कर रणनीति बनाई जा रही है और आंदोलन को और प्रभावी बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।  
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इसलिए नाराज हैं किसान
किसानों का कहना है कि वे अपनी जमीन छोड़ना नहीं चाहते, क्योंकि यदि खेती योग्य भूमि लगातार कम होती रही, तो भविष्य में अन्न संकट उत्पन्न हो सकता है। उनका यह भी कहना है कि यदि सरकार को बहुत अधिक जरूरत है, तो उन्हें बाजार मूल्य के अनुसार मुआवजा मिलना चाहिए, ताकि वे किसी अन्य स्थान पर जमीन खरीदकर खेती जारी रख सकें। किसानों की इस एकजुटता के चलते सरकारी अधिकारियों को कदम-कदम पर विरोध का सामना करना पड़ रहा है और फिलहाल सर्वे का कार्य बाधित हो चुका है।
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