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Indore News: सूखे का संकट गहराया, सोयाबीन के फूल मुरझाने लगे, किसान परेशान
Mon, 11 Aug 2025 06:43 PM IST
अर्जुन रिछारिया
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Mon, 11 Aug 2025 06:43 PM IST
सार
Indore News: इंदौर और आसपास के जिलों में बारिश की कमी से हालात गंभीर होते जा रहे हैं। सोयाबीन की फसल में फूल मुरझाने लगे हैं और किसानों की चिंता बढ़ गई है। बोरिंग सूख रही हैं, जबकि मौसम विभाग ने 13 अगस्त के बाद बारिश की संभावना जताई है।
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सोयाबीन के खेत में काम करती महिलाएं
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विस्तार
इंदौर और आसपास के जिलों में कम बारिश अब आफत का रूप ले रही है। लोग गर्मी और उमस से परेशान हैं और फसलों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। सोयाबीन की फसल को पानी न मिलने से फूल मुरझाने लगे हैं। बोरिंगों का पानी भी खत्म हो रहा है और अगस्त का महीना भी सूखा ही बीता जा रहा है। प्रदेश के 52 जिलों में इंदौर बारिश के मामले में सबसे पीछे है।
इंदौर में सूखे की स्थिति
मानसूनी सीजन को करीब ढाई महीना बीतने को है। मध्यप्रदेश में अब तक औसत 29.3 इंच बारिश हो चुकी है, जो कोटे की 79 प्रतिशत है। बता दें कि प्रदेश में 16 जून को मानसून ने आमद दी थी। तब से अब तक औसत 29.3 इंच बारिश हो चुकी है। अब तक 22.5 इंच पानी गिरना था। इस हिसाब से 6.8 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। मौसम विभाग ने अबकी बार सामान्य से अधिक बारिश होने का अनुमान जताया है। ग्वालियर समेत 10 जिलों में बारिश का कोटा पूरा हो चुका है, जबकि इंदौर संभाग के 8 में से 6 जिलों में सूखे जैसी स्थिति है। उज्जैन संभाग भी पिछड़ा है। दूसरी ओर, ग्वालियर, जबलपुर संभाग की तस्वीर सबसे बेहतर है। भोपाल में आधी से ज्यादा बारिश हो चुकी है। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37 इंच है। इंदौर और उज्जैन संभाग में सिस्टम की एक्टिविटी कम देखने को मिलीं। इस वजह से दोनों संभाग के 15 में से 9 जिलों में कोटे की आधी बारिश भी नहीं हुई है।
11.5 इंच बारिश हुई, 20.3 इंच होना थी
जुलाई में कम बारिश की भरपाई अगस्त से होने की उम्मीद थी, लेकिन इसके भी 10 दिन सूखे बीत गए। बारिश की यह लंबी खेंच अब शहर से लेकर गांवों तक चिंता पैदा कर रही है। जिस तरह जुलाई के शुरुआती 20 दिन सूखे बीते थे, वैसी ही स्थिति अगस्त की भी बनती दिख रही है। 2002 के बाद ऐसी स्थिति है, जब जुलाई और अगस्त का पहला पखवाड़ा गर्मी के दिनों जैसा बीता। दोनों महीनों के शुरुआती 15 20 दिन में मात्र 15-16 मिलीमीटर ही बारिश हुई। इधर, 1 जून से अब तक कुल बारिश 11.5 इंच ही हुई, जबकि इस समय तक 20.3 इंच पानी बरस जाना चाहिए था।
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13 अगस्त के बाद फिर बारिश की उम्मीद
एक बार फिर से प्रदेश में तेज बारिश का दौर शुरू हो सकता है। सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन के अनुसार, 13 अगस्त से नया सिस्टम एक्टिव हो रहा है। जिसकी एक्टिविटी प्रदेश में भी देखने को मिलेगी।
किसान को फसलों की चिंता
किसान संजय चौधरी ने बताया कि सोयाबीन की फसल का उत्पादन बेहद कमजोर होने के आसार नजर आ रहे हैं। कम बारिश से फूल मुरझाने लगे हैं। बोरिंग सूख रही हैं और अगस्त का महीना भी लगभग सूखा ही बीत रहा है। यदि बारिश नहीं हुई तो पूरे बाजार पर इसका बुरा असर पड़ेगा। अब अगस्त के महीने से ही उम्मीद बाकि है।
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इंदौर में सूखे की स्थिति
मानसूनी सीजन को करीब ढाई महीना बीतने को है। मध्यप्रदेश में अब तक औसत 29.3 इंच बारिश हो चुकी है, जो कोटे की 79 प्रतिशत है। बता दें कि प्रदेश में 16 जून को मानसून ने आमद दी थी। तब से अब तक औसत 29.3 इंच बारिश हो चुकी है। अब तक 22.5 इंच पानी गिरना था। इस हिसाब से 6.8 इंच पानी ज्यादा गिर चुका है। मौसम विभाग ने अबकी बार सामान्य से अधिक बारिश होने का अनुमान जताया है। ग्वालियर समेत 10 जिलों में बारिश का कोटा पूरा हो चुका है, जबकि इंदौर संभाग के 8 में से 6 जिलों में सूखे जैसी स्थिति है। उज्जैन संभाग भी पिछड़ा है। दूसरी ओर, ग्वालियर, जबलपुर संभाग की तस्वीर सबसे बेहतर है। भोपाल में आधी से ज्यादा बारिश हो चुकी है। प्रदेश की सामान्य बारिश औसत 37 इंच है। इंदौर और उज्जैन संभाग में सिस्टम की एक्टिविटी कम देखने को मिलीं। इस वजह से दोनों संभाग के 15 में से 9 जिलों में कोटे की आधी बारिश भी नहीं हुई है।
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11.5 इंच बारिश हुई, 20.3 इंच होना थी
जुलाई में कम बारिश की भरपाई अगस्त से होने की उम्मीद थी, लेकिन इसके भी 10 दिन सूखे बीत गए। बारिश की यह लंबी खेंच अब शहर से लेकर गांवों तक चिंता पैदा कर रही है। जिस तरह जुलाई के शुरुआती 20 दिन सूखे बीते थे, वैसी ही स्थिति अगस्त की भी बनती दिख रही है। 2002 के बाद ऐसी स्थिति है, जब जुलाई और अगस्त का पहला पखवाड़ा गर्मी के दिनों जैसा बीता। दोनों महीनों के शुरुआती 15 20 दिन में मात्र 15-16 मिलीमीटर ही बारिश हुई। इधर, 1 जून से अब तक कुल बारिश 11.5 इंच ही हुई, जबकि इस समय तक 20.3 इंच पानी बरस जाना चाहिए था।
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13 अगस्त के बाद फिर बारिश की उम्मीद
एक बार फिर से प्रदेश में तेज बारिश का दौर शुरू हो सकता है। सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन के अनुसार, 13 अगस्त से नया सिस्टम एक्टिव हो रहा है। जिसकी एक्टिविटी प्रदेश में भी देखने को मिलेगी।
किसान को फसलों की चिंता
किसान संजय चौधरी ने बताया कि सोयाबीन की फसल का उत्पादन बेहद कमजोर होने के आसार नजर आ रहे हैं। कम बारिश से फूल मुरझाने लगे हैं। बोरिंग सूख रही हैं और अगस्त का महीना भी लगभग सूखा ही बीत रहा है। यदि बारिश नहीं हुई तो पूरे बाजार पर इसका बुरा असर पड़ेगा। अब अगस्त के महीने से ही उम्मीद बाकि है।
