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देश में पहली बारः भीख देने पर होगी एफआईआर, प्रशासन ने लागू की धारा 144
Tue, 17 Dec 2024 05:49 PM IST
अर्जुन रिछारिया
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Tue, 17 Dec 2024 05:49 PM IST
सार
Indore News: भिक्षावृत्ति के खिलाफ कलेक्टर ने 7 दलों का किया गठन, भीख लेने और देने के 30 हॉट स्पॉट किए चिह्नित, प्रशासन के तमाम प्रयासों के बावजूद अभी भी जारी है भिक्षावृत्ति
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भिखारियों से परेशान लोग सड़कों पर हाथ जोड़ते नजर आते हैं।
- फोटो : अमर उजाला, इंदौर
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विस्तार
स्वच्छता में नंबर वन इंदौर से भिक्षावृत्ति खत्म करने के लिए अब प्रशासन ने कमर कस ली है। अब इस मामले में प्रशासन ने बड़ा निर्णय ले लिया है। अभी तक तो भिखारियों को भीख मांगने पर पकड़ा जाता था लेकिन नए साल में 1 जनवरी से भीख देने पर भीख देने वाला अपराधी कहलाएगा और उसे सजा के दायरे में लाया जाएगा। कलेक्टर द्वारा इंदौर में भिक्षावृत्ति रोकने के लिए धारा 144 के नियम लागू किए जा रहे हैं।
ब्याज पर पैसा चला रहे भिखारी
कलेक्टर ने कहा कि भिक्षावृत्ति के मामले में जो चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं उनमें बच्चों के पास एक हफ्ते और 1 दिन की कमाई के रूप में हजारों और लाखों रुपए सामने आ रहे हैं। ज्ञात हो कि इंदौर में प्रशासन की गिरफ्त में आए भिक्षुकों के पास हजारों और लाखों की संपत्ति के साथ-साथ 75,000 से अधिक की नकदी भी सामने आ चुकी है।
वहीं राजस्थान और गुजरात बॉर्डर्स से आकर रहने वाले कंबल और अन्य तरह की वस्तु पाने के लिए रात में सड़कों के किनारे आग जलाकर भी रह रहे हैं। दानदाताओं के इस शहर में जरूरतमंदों को दान देने की परंपरा रही है लेकिन इस दान की राशि का इंदौर की फिजा बिगाड़ने में ही उपयोग किया जा रहा है। कंबल लेने वाले उन कंबलों को बेचकर भी जहां पैसा कमा रहे हैं, वहीं दानदाताओं के दान का मखौल भी उड़ा रहे हैं।
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कलेक्टर आशीष सिंह ने कहा कि अभी तक हम जागरूकता अभियान के तहत इंदौर से भिक्षावृत्ति को मिटाने के लिए प्रयास कर रहे थे। इसके तहत भिखारियों को सेवाश्रम तक पहुंचाया जा रहा था लेकिन उसके बावजूद भिक्षावृत्ति पर आंशिक प्रतिबंध लग पाया है। इसलिए अब आम जनता की जिम्मेदारी तय करने के लिए उन्हें भी जागरूक किया जाएगा और अपील की जाएगी कि वे भिखारियों को भीख न दें। इसके बाद भी सड़कों पर घूमने वालों को कोई भी वस्तु या नकद दान करता हुआ पाया गया तो उस पर भी सख्त कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। उन्होंने अपील की है कि जिस तरह से इंदौर स्वच्छता में नंबर वन जनता की मेहनत और सहयोग से बना है, उसी तर्ज पर आप भिक्षावृत्ति मुक्त करने में भी सहयोग के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा कि शहर को भिक्षावृत्ति से मुक्त करने के लिए चलाए जा रहे अभियान में जो खुलासे हो रहे हैं वह चौंका देने वाले हैं। कलेक्टर आशीष सिंह ने बताया कि भिक्षावृत्ति के पैसों से नशे का कारोबार करने की जानकारी भी सामने आई है। यह एक सामाजिक बुराई की तरह इंदौर को अपनी चपेट में ले रही है। इसलिए जनजागरूकता की जरूरत है कि लेने वालों के साथ-साथ देने वालों को भी जागरूक किया जाए। उन्होंने सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा कि अब तक हम जागरूकता और समझाइश के मूड में थे, लेकिन अब 1 जनवरी से सख्ती की जाएगी। भीख लेना और देना दोनों अपराध की श्रेणी में आएगा।
पूरे प्रदेश में भिक्षावृत्ति पर रोक लगे
शहर के प्रबुद्धजनों का मानना है कि इंदौर पूरे प्रदेश के लिए मार्गदर्शक रहा है। स्वच्छता अभियान से लेकर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और मेट्रो परियोजना को लागू करने वाले प्रदेश में अब भिक्षावृत्ति की कुरीति मिटाने की पहल इंदौर ने शुरू की है। इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाना चाहिए। उज्जैन के महाकाल मंदिर से लेकर ओंकारेश्वर के मंदिर में देशभर के लोग आते हैं और यहां भी बड़ी तादाद में भिखारी प्रदेश की छवि खराब करते नजर आते हैं। इन पर भी प्रतिबंध लगना चाहिए, क्योंकि अब भिक्षावृत्ति जरूरत नहीं, बल्कि धंधे का माध्यम बन गई है।
हॉट स्पॉट किए चिह्नित
प्रशासन ने ऐसे 30 हॉट स्पॉट भी चिह्नित किए हैं, जहां सर्वाधिक भिक्षावृत्ति नजर आती है। इनमें छप्पन दुकान, विजय नगर, रसोमा, खजराना, पलासिया, गीता भवन, व्हाइट चर्च, जूनी इंदौर, शनि मंदिर, रणजीत हनुमान, चिड़ियाघर, एलआईजी, भंवरकुआं, लवकुश चौराहा, कलेक्टोरेट, बड़ा गणपति, नवलखा, मल्हारगंज, पलसीकर, पाटनीपुरा, एमआर 10, गांधी हॉल, मालवा मिल, रेलवे स्टेशन, सरवटे, चोइथराम मंडी, गंगवाल बस स्टैंड, जवाहर मार्ग, खजराना गणेश मंदिर आदि इसमें शामिल हैं। वहीं पिछले दिनों उज्जैन के सेवाधाम में भी कई भिखारियों को भिजवाया गया है।
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ब्याज पर पैसा चला रहे भिखारी
कलेक्टर ने कहा कि भिक्षावृत्ति के मामले में जो चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं उनमें बच्चों के पास एक हफ्ते और 1 दिन की कमाई के रूप में हजारों और लाखों रुपए सामने आ रहे हैं। ज्ञात हो कि इंदौर में प्रशासन की गिरफ्त में आए भिक्षुकों के पास हजारों और लाखों की संपत्ति के साथ-साथ 75,000 से अधिक की नकदी भी सामने आ चुकी है।
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वहीं राजस्थान और गुजरात बॉर्डर्स से आकर रहने वाले कंबल और अन्य तरह की वस्तु पाने के लिए रात में सड़कों के किनारे आग जलाकर भी रह रहे हैं। दानदाताओं के इस शहर में जरूरतमंदों को दान देने की परंपरा रही है लेकिन इस दान की राशि का इंदौर की फिजा बिगाड़ने में ही उपयोग किया जा रहा है। कंबल लेने वाले उन कंबलों को बेचकर भी जहां पैसा कमा रहे हैं, वहीं दानदाताओं के दान का मखौल भी उड़ा रहे हैं।
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कलेक्टर आशीष सिंह ने कहा कि अभी तक हम जागरूकता अभियान के तहत इंदौर से भिक्षावृत्ति को मिटाने के लिए प्रयास कर रहे थे। इसके तहत भिखारियों को सेवाश्रम तक पहुंचाया जा रहा था लेकिन उसके बावजूद भिक्षावृत्ति पर आंशिक प्रतिबंध लग पाया है। इसलिए अब आम जनता की जिम्मेदारी तय करने के लिए उन्हें भी जागरूक किया जाएगा और अपील की जाएगी कि वे भिखारियों को भीख न दें। इसके बाद भी सड़कों पर घूमने वालों को कोई भी वस्तु या नकद दान करता हुआ पाया गया तो उस पर भी सख्त कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। उन्होंने अपील की है कि जिस तरह से इंदौर स्वच्छता में नंबर वन जनता की मेहनत और सहयोग से बना है, उसी तर्ज पर आप भिक्षावृत्ति मुक्त करने में भी सहयोग के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा कि शहर को भिक्षावृत्ति से मुक्त करने के लिए चलाए जा रहे अभियान में जो खुलासे हो रहे हैं वह चौंका देने वाले हैं। कलेक्टर आशीष सिंह ने बताया कि भिक्षावृत्ति के पैसों से नशे का कारोबार करने की जानकारी भी सामने आई है। यह एक सामाजिक बुराई की तरह इंदौर को अपनी चपेट में ले रही है। इसलिए जनजागरूकता की जरूरत है कि लेने वालों के साथ-साथ देने वालों को भी जागरूक किया जाए। उन्होंने सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा कि अब तक हम जागरूकता और समझाइश के मूड में थे, लेकिन अब 1 जनवरी से सख्ती की जाएगी। भीख लेना और देना दोनों अपराध की श्रेणी में आएगा।
पूरे प्रदेश में भिक्षावृत्ति पर रोक लगे
शहर के प्रबुद्धजनों का मानना है कि इंदौर पूरे प्रदेश के लिए मार्गदर्शक रहा है। स्वच्छता अभियान से लेकर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और मेट्रो परियोजना को लागू करने वाले प्रदेश में अब भिक्षावृत्ति की कुरीति मिटाने की पहल इंदौर ने शुरू की है। इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाना चाहिए। उज्जैन के महाकाल मंदिर से लेकर ओंकारेश्वर के मंदिर में देशभर के लोग आते हैं और यहां भी बड़ी तादाद में भिखारी प्रदेश की छवि खराब करते नजर आते हैं। इन पर भी प्रतिबंध लगना चाहिए, क्योंकि अब भिक्षावृत्ति जरूरत नहीं, बल्कि धंधे का माध्यम बन गई है।
हॉट स्पॉट किए चिह्नित
प्रशासन ने ऐसे 30 हॉट स्पॉट भी चिह्नित किए हैं, जहां सर्वाधिक भिक्षावृत्ति नजर आती है। इनमें छप्पन दुकान, विजय नगर, रसोमा, खजराना, पलासिया, गीता भवन, व्हाइट चर्च, जूनी इंदौर, शनि मंदिर, रणजीत हनुमान, चिड़ियाघर, एलआईजी, भंवरकुआं, लवकुश चौराहा, कलेक्टोरेट, बड़ा गणपति, नवलखा, मल्हारगंज, पलसीकर, पाटनीपुरा, एमआर 10, गांधी हॉल, मालवा मिल, रेलवे स्टेशन, सरवटे, चोइथराम मंडी, गंगवाल बस स्टैंड, जवाहर मार्ग, खजराना गणेश मंदिर आदि इसमें शामिल हैं। वहीं पिछले दिनों उज्जैन के सेवाधाम में भी कई भिखारियों को भिजवाया गया है।
