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Indore News: विभाजन के दर्द से फर्जी वोटर आईडी तक, देश ने क्या खोया क्या पाया
Sun, 10 Aug 2025 09:01 PM IST
अर्जुन रिछारिया
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Sun, 10 Aug 2025 09:01 PM IST
सार
Indore News: देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर में आयोजित एक कार्यक्रम में सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने विभाजन की विभीषिका, हिंदू जनसंख्या में कमी, फर्जी वोटर आईडी और शिक्षा प्रणाली की खामियों पर गंभीर चिंता जताई।
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कार्यक्रम को संबोधित करते अतिथि
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
देशवासियों ने कभी नहीं सोचा था कि भारत का विभाजन होगा। विभाजन के समय देश में महान कहे जाने वाले शासक कर्मों से उतने ही निकृष्ट थे। सर्वोच्च न्यायलय के अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने यह बातें देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर में आयोजित एक कार्यक्रम में कहीं। कार्यक्रम का विषय था विभाजन की विभीषिका एवं विस्थापन की पीड़ा और त्रासदी।
हिंदुओं की संख्या घटती जा रही
कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि अंग्रेज इस देश को छोड़कर चले गए परंतु मैकाले की शिक्षा पद्धति और मिशनरी शिक्षा इस देश से आज तक नहीं जा पाई। मुगल इस देश से चले गए परंतु उनकी दी गई तालीम कई गुना बढ़कर इस देश में दी जा रही है। हिंदुओं की संख्या जो ईसा पूर्व थी और वही संख्या 15वीं शताब्दी में भी वही रही। अर्थात जितनी हिंदुओं की संख्या बढ़ी थी उतनी ही अनेक कारणों से वह उतनी ही घट भी गई। यह चिंता का एक विषय है और यह कई बातें सोचने को विवश करता है।
फर्जी वोटर आईडी का मुद्दा बेहद गंभीर
इस देश में कई ऐसे कानून हैं जो अपनी प्रासंगिकता खो चुके हैं या जिनको राजनीतिक कारणों से लागू नहीं किया गया और कभी दोषियों को सजा नहीं दी जा सकी। शहरों के भी नाम मजहब के नाम पर बदले गए। कई फर्जी वोटर आईडी बनवा कर भारत के नागरिक बन गए और खुलेआम संविधान का उल्लंघन करने वालों पर उनकी सजा का कोई प्रावधान न्याय प्रणाली में परिलक्षित नहीं हो सका। इस देश में प्रशासन, पुलिस न्याय, शिक्षा इत्यादि प्रणालियों को देश के उत्थान एवं उन्नति के लिए परिवर्तन कर सुधारने की आवश्यकता पर उपाध्याय ने काफी बल दिया और इस देश के भविष्य के बारे में अपनी गहरी चिंता को व्यक्त कर समस्याएं बताईं और समाधान भी बताए।
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भाषा के विकास के लिए चलाए जा रहे कार्यों की जानकारी दी
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सांसद शंकर लालवानी रहे और कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. राकेश सिंघई कुलगुरु, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय द्वारा की गई। स्वागत उद्बोधन प्रोफेसर संजय तनवानी द्वारा दिया गया। राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद् के बोर्ड मेंबर मनीष देवनानी द्वारा भाषा के विकास व विस्तार के लिए चलाई जा रही गतिविधि तथा भविष्य में संचालित किए जाने वाले कार्यक्रमों पर विचार प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनीष सितलानी द्वारा किया गया। अतिथि स्वागत संजय नरसिंघानी, संतोष रघुवंशी, प्रकाश खेमानी, निर्मला राजानी, धनेश मोटाई, चंदा खत्री कैलाश सीतलानी, राज गुलानी, विजय पाहुजा, सरोज भाटिया, जया बालचंदानी, प्रो अशोक सचदेव, नरेश डेंबला, कमला राजानी, सपना गंगवानी, अशोक राज्यपाल, विजय पंजाबी ने किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से वरिष्ठ समाजसेवी राजा माधवानी, पार्षद कंचन गिद्धवानी पूर्व पार्षद जवाहर मंगवानी, भजन गायक कमला आहूजा, पूर्व एसीपी हरीश मोटवानी, भारतीय शिक्षण मंडल लक्ष्मीकांत त्रिपाठी, विमल शर्मा, नरेश फुंदवानी, वरिष्ठ समाजसेवी घनश्याम मलानी, मंशा राम राजानी, दिलीप माटा, धीरज कुण्डल, दिलीप देव जगदीश फतेहचंदानी, संजय उदानी, लालचंद टी वाधवानी, सुभाष खुराना, जयपाल दास बजाज, जगदीश बजाज उपस्थित रहे।
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हिंदुओं की संख्या घटती जा रही
कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि अंग्रेज इस देश को छोड़कर चले गए परंतु मैकाले की शिक्षा पद्धति और मिशनरी शिक्षा इस देश से आज तक नहीं जा पाई। मुगल इस देश से चले गए परंतु उनकी दी गई तालीम कई गुना बढ़कर इस देश में दी जा रही है। हिंदुओं की संख्या जो ईसा पूर्व थी और वही संख्या 15वीं शताब्दी में भी वही रही। अर्थात जितनी हिंदुओं की संख्या बढ़ी थी उतनी ही अनेक कारणों से वह उतनी ही घट भी गई। यह चिंता का एक विषय है और यह कई बातें सोचने को विवश करता है।
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फर्जी वोटर आईडी का मुद्दा बेहद गंभीर
इस देश में कई ऐसे कानून हैं जो अपनी प्रासंगिकता खो चुके हैं या जिनको राजनीतिक कारणों से लागू नहीं किया गया और कभी दोषियों को सजा नहीं दी जा सकी। शहरों के भी नाम मजहब के नाम पर बदले गए। कई फर्जी वोटर आईडी बनवा कर भारत के नागरिक बन गए और खुलेआम संविधान का उल्लंघन करने वालों पर उनकी सजा का कोई प्रावधान न्याय प्रणाली में परिलक्षित नहीं हो सका। इस देश में प्रशासन, पुलिस न्याय, शिक्षा इत्यादि प्रणालियों को देश के उत्थान एवं उन्नति के लिए परिवर्तन कर सुधारने की आवश्यकता पर उपाध्याय ने काफी बल दिया और इस देश के भविष्य के बारे में अपनी गहरी चिंता को व्यक्त कर समस्याएं बताईं और समाधान भी बताए।
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भाषा के विकास के लिए चलाए जा रहे कार्यों की जानकारी दी
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सांसद शंकर लालवानी रहे और कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. राकेश सिंघई कुलगुरु, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय द्वारा की गई। स्वागत उद्बोधन प्रोफेसर संजय तनवानी द्वारा दिया गया। राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद् के बोर्ड मेंबर मनीष देवनानी द्वारा भाषा के विकास व विस्तार के लिए चलाई जा रही गतिविधि तथा भविष्य में संचालित किए जाने वाले कार्यक्रमों पर विचार प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनीष सितलानी द्वारा किया गया। अतिथि स्वागत संजय नरसिंघानी, संतोष रघुवंशी, प्रकाश खेमानी, निर्मला राजानी, धनेश मोटाई, चंदा खत्री कैलाश सीतलानी, राज गुलानी, विजय पाहुजा, सरोज भाटिया, जया बालचंदानी, प्रो अशोक सचदेव, नरेश डेंबला, कमला राजानी, सपना गंगवानी, अशोक राज्यपाल, विजय पंजाबी ने किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से वरिष्ठ समाजसेवी राजा माधवानी, पार्षद कंचन गिद्धवानी पूर्व पार्षद जवाहर मंगवानी, भजन गायक कमला आहूजा, पूर्व एसीपी हरीश मोटवानी, भारतीय शिक्षण मंडल लक्ष्मीकांत त्रिपाठी, विमल शर्मा, नरेश फुंदवानी, वरिष्ठ समाजसेवी घनश्याम मलानी, मंशा राम राजानी, दिलीप माटा, धीरज कुण्डल, दिलीप देव जगदीश फतेहचंदानी, संजय उदानी, लालचंद टी वाधवानी, सुभाष खुराना, जयपाल दास बजाज, जगदीश बजाज उपस्थित रहे।
