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Indore News: पिता-पुत्र का मंदिर... जहां आमने-सामने बैठे हैं शिव और गणेश, जानें 200 साल पुराने मंदिर की कहानी
Thu, 28 Aug 2025 03:22 PM IST
अर्पित याज्ञनिक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अर्पित याज्ञनिक
Updated Thu, 28 Aug 2025 03:22 PM IST
सार
मंदिर की विशेषता यह है कि यहां शिव और गणेश की मूर्तियां आमने-सामने स्थापित हैं, इसलिए इसे पिता-पुत्र का मंदिर कहा जाता है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यहां के दर्शन से मनोरोग और पीलिया जैसे रोग ठीक हो जाते हैं।
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छोटा गणेश मंदिर और विट्ठल महादेव किबे।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
शहर के मल्हारगंज क्षेत्र में पुलिस थाने के सामने स्थित सिद्धि विनायक छोटा गणेश मंदिर 200 वर्ष पुराना है। यह गणेश मंदिर मध्य क्षेत्र के नागरिकों की आस्था का केंद्र है। तात्या की बावड़ी के अग्र भाग में यह मंदिर है। इसी परिसर में सरकारी लाल अस्पताल भी है। छोटा गणेश मंदिर विट्ठल महादेव किबे (तात्या जोग) द्वारा बनवाया गया था। वर्तमान में हेरंब (गणेश जी का एक नाम) ट्रस्ट इसकी व्यवस्था का दायित्व निभा रहा है।
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किबे गणपति के नाम पर करते थे कारोबार
मल्हारगंज की स्थापना महाराजा मल्हारराव होल्कर द्वितीय के नाम पर की गई थी। यहीं तात्या परिवार के गणेश दास कृष्ण किबे गणपति के नाम पर ही अपना व्यापार व्यवसाय करते थे। गणेशजी किबे परिवार के ईष्ट देवता हैं। गणेश दास कृष्ण होल्कर रियासत के 11 पंचों में से एक थे। उनकी व्यापारिक फर्म का नाम गणेश दास कृष्ण जी था। यह देश भर में कारोबार करती थी। इस फर्म का कारोबार चीन तक फैला था। प्राचीन दौर में गणेशदास कृष्ण किबे को व्यापारियों का राजा भी कहा जाता था।
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मल्हारराव द्वितीय ने दी थी यह जमीन
1818 की मंदसौर संधि के पश्चात महाराजा मल्हारराव होल्कर द्वितीय ने विट्ठल महादेव किबे को उनके विशिष्ट योगदान के लिए मल्हारगंज क्षेत्र की यह भूमि प्रदान की थी। तात्या जोग ने इस स्थान पर एक भव्य बावड़ी का निर्माण कराया था। यह बावड़ी तात्या की बावड़ी के नाम से पहचानी जाती है। वर्तमान में इस बावड़ी को बंद कर रखा है। इस बावड़ी में अटूट पानी था। नगर निगम के टैंकर यहां से पानी भर कर शहर में सप्लाई किया करते थे। तात्या की बावड़ी मशहूर है।
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दर्शन से ठीक होते मनारोग और पीलिया
किसी समय इस क्षेत्र को गणेश बाग भी कहा जाता था। श्रद्धालुओं की ऐसी मान्यता थी कि इस मंदिर के दर्शन से मनोरोग और पीलिया तुरंत ठीक हो जाता है। इस मंदिर की विशेषता यह है कि पिता पुत्र अर्थात शंकर महादेव और श्री गणेश दोनों की ही मूर्तियां आमने-सामने हैं। इसलिए इस मंदिर को पिता-पुत्र का मंदिर भी कहते हैं। इस मंदिर में गणेश जी की मूर्ति आकर्षक है। शिवलिंग भी सुंदर है। यहां स्थापित सिद्धिविनायक गणपति की बाई सूंड की पाषाण प्रतिमा करीब 4 फीट की है। गणेश जी की प्रतिमा के समीप ही रिद्धि सिद्धि विराजित हैं।
विट्ठल महादेव किबे ने मंदसौर संधि में निभाई थी अहम भूमिका
विट्ठल महादेव किबे को तात्या जोग के नाम से भी जाना जाता था। उनका जन्म 1778 में खानदेश महाराष्ट्र में हुआ था। 1818 में अंग्रेजों से मंदसौर में हुई संधि में विट्ठल महादेव किबे की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्हीं के प्रयासों से यह संधि हो पाई थी। इसी संधि की शर्तों के अनुसार इंदौर होल्कर राज्य की राजधानी बना और छावनी क्षेत्र के रेजीडेंसी एरिया में अंग्रेज अधिकारियों के लिए पृथक भूमि प्रदान की गई। जहां एजेंट-टू-गवर्नर जनरल का मध्य भारत का मुख्यालय हुआ करता था।
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कुशल प्रशासक थे किबे, बढ़ाई थी होल्कर रियासत की आय
विट्ठल महादेव किबे कुशल प्रशासक थे। वे मल्हारराव होल्कर द्वितीय (कार्यकाल 1811-1833) के विश्वसनीय सलाहकार भी थे। होल्कर राज्य की 1817 में कुल आय 5 लाख रुपये थी, जिसे किबे साहब ने अपने प्रयासों के माध्यम से 27 लाख रुपये तक पहुंचा दी थी। महिदपुर युद्ध में अंग्रेजों से सुलह करवाने में भी आपकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। इस कारण महाराजा ने तात्या जोग को 20 हजार रुपये वार्षिक की जागीर प्रदान की थी। 1826 में आपका निधन हो गया। लार्ड हेस्टिंग ने तात्या जोग के बारे में लिखा- 'एक बुद्धिमान और श्रेष्ठ प्रतिनिधि थे। होल्कर के साथ संधि करने में मुझे अच्छा लगा। वर्तमान में छावनी इलाके में किबे कंपाउंड स्थित है। किबे परिवार का प्राचीन निवास आज भी इसी क्षेत्र में दवा बाजार के सामने स्थित है। इसमें तात्या के परिवार के अजय किबे निवास करते हैं।
