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इंदौर: सराफा चौपाटी के दुकानदारों को राहत, हाईकोर्ट ने कहा निगम तय नहीं कर सकता दुकानों की संख्या
Tue, 29 Sep 2026 09:33 PM IST
Arjun Richhariya
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Tue, 29 Sep 2026 09:33 PM IST
सार
इंदौर सराफा नाइट चौपाटी के 8 खाद्य विक्रेताओं को हाई कोर्ट से राहत मिली है। कोर्ट ने नगर निगम की चयनात्मक कार्रवाई निरस्त कर दुकान मालिकों की सहमति से पुनः व्यवसाय की अनुमति दी। अदालत ने कहा कि निगम का काम केवल स्वच्छता और सुरक्षा देखना है।
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इंदौर हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने सराफा नाइट चौपाटी के 8 छोटे खाद्य विक्रेताओं के पक्ष में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और राहत देने वाला फैसला सुनाया है। अदालत ने नगर निगम द्वारा की गई चयनात्मक कार्रवाई को पूरी तरह से निरस्त करते हुए इन सभी 8 याचिकाकर्ताओं को संबंधित दुकान मालिकों की सहमति के आधार पर दोबारा अपना व्यवसाय शुरू करने की स्पष्ट अनुमति प्रदान कर दी है। इस फैसले से लंबे समय से राहत की उम्मीद देख रहे छोटे व्यापारियों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
चयनात्मक कार्रवाई पर कोर्ट का कड़ा रुख
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे वकीलों ने नगर निगम के उस कदम को चुनौती दी थी जिसमें व्यवसाय को मनमाने ढंग से केवल 80 विक्रेताओं तक सीमित कर दिया गया था। अदालत ने इस कार्रवाई को अनुचित माना और स्पष्ट किया कि नगर निगम को इस तरह से चुनिंदा व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई करने या मनमाने तरीके से विक्रेताओं की संख्या सीमित करने का वैधानिक अधिकार नहीं है।
वकीलों की प्रभावी पैरवी और आजीविका का अधिकार
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता उमंग नलवाया और विवेक सोनी ने अदालत के समक्ष बेहद प्रभावी ढंग से पक्ष रखा। उन्होंने याचिकाकर्ताओं के संविधान प्रदत्त आजीविका के मौलिक अधिकार की रक्षा करने की बात कही। साथ ही नगर निगम की शक्तियों की वैधानिक सीमाओं को रेखांकित करते हुए यह तर्क दिया कि प्रशासनिक स्तर पर लिया गया निर्णय छोटे व्यापारियों के जीवन और व्यापार के अधिकार का हनन करता है।
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नगर निगम की वैधानिक सीमाओं पर स्पष्टीकरण
माननीय न्यायालय ने अपने आदेश में नगर निगम की शक्तियों और भूमिका को रेखांकित करते हुए स्थिति पूरी तरह साफ कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि नगर निगम का मुख्य कार्य क्षेत्र केवल स्वच्छता बनाए रखना, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, अग्नि सुरक्षा के नियमों का पालन कराना और सार्वजनिक व्यवस्था को सुचारू रखना है। नगर निगम अपनी सीमाओं से बाहर जाकर मनमाने ढंग से विक्रेताओं के निष्पक्ष व्यवसाय को बाधित या सीमित नहीं कर सकता।
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चयनात्मक कार्रवाई पर कोर्ट का कड़ा रुख
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे वकीलों ने नगर निगम के उस कदम को चुनौती दी थी जिसमें व्यवसाय को मनमाने ढंग से केवल 80 विक्रेताओं तक सीमित कर दिया गया था। अदालत ने इस कार्रवाई को अनुचित माना और स्पष्ट किया कि नगर निगम को इस तरह से चुनिंदा व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई करने या मनमाने तरीके से विक्रेताओं की संख्या सीमित करने का वैधानिक अधिकार नहीं है।
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वकीलों की प्रभावी पैरवी और आजीविका का अधिकार
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता उमंग नलवाया और विवेक सोनी ने अदालत के समक्ष बेहद प्रभावी ढंग से पक्ष रखा। उन्होंने याचिकाकर्ताओं के संविधान प्रदत्त आजीविका के मौलिक अधिकार की रक्षा करने की बात कही। साथ ही नगर निगम की शक्तियों की वैधानिक सीमाओं को रेखांकित करते हुए यह तर्क दिया कि प्रशासनिक स्तर पर लिया गया निर्णय छोटे व्यापारियों के जीवन और व्यापार के अधिकार का हनन करता है।
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नगर निगम की वैधानिक सीमाओं पर स्पष्टीकरण
माननीय न्यायालय ने अपने आदेश में नगर निगम की शक्तियों और भूमिका को रेखांकित करते हुए स्थिति पूरी तरह साफ कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि नगर निगम का मुख्य कार्य क्षेत्र केवल स्वच्छता बनाए रखना, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, अग्नि सुरक्षा के नियमों का पालन कराना और सार्वजनिक व्यवस्था को सुचारू रखना है। नगर निगम अपनी सीमाओं से बाहर जाकर मनमाने ढंग से विक्रेताओं के निष्पक्ष व्यवसाय को बाधित या सीमित नहीं कर सकता।
