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Indore: पार्षद गोलीकांड में पूर्व विधायक अश्विन जोशी 18 साल बाद बरी, हथियार जब्त नहीं हुआ
Fri, 04 Oct 2024 09:13 PM IST
अभिषेक चेंडके
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अभिषेक चेंडके
Updated Fri, 04 Oct 2024 09:13 PM IST
सार
कांग्रेस के पार्षद रहे मुन्ना अंसारी और जोशी के बीच लंबे समय से राजनीतिक अदावत रही है। वर्ष 2006 में सुयश अस्पताल के समीप अंसारी गोली लगने से घायल हो गए थे। उन्होंने तब पूर्व विधायक जोशी पर गोली चलाने का आरोप लगाया था।
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पूर्व विधायक जोशी।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इंदौर की तीन नंबर विधानसभा सीट से विधायक रहे अश्विन जोशी हत्या के प्रयास के मामले में 18 साल बाद बरी हो गए। पुलिस साबित नहीं कर पाई कि उन्होंने गोली चलाई थी। उनके पास से हथियार भी जब्त नहीं हुआ। मामले में जोशी सहित चार आरोपी थे।
कांग्रेस के पार्षद रहे मुन्ना अंसारी और जोशी के बीच लंबे समय से राजनीतिक अदावत रही है। वर्ष 2006 में सुयश अस्पताल के समीप अंसारी गोली लगने से घायल हो गए थे। उन्होंने तब पूर्व विधायक जोशी पर गोली चलाने का आरोप लगाया था।
पुलिस ने जोशी के खिलाफ हत्या के प्रयास का केस दर्ज किया था। तब यह मामला काफी गरमा गया था,क्योकि जोशी कांग्रेस तब कांग्रेस के विधायक थे।
कांग्रेस ने तब प्रकरण दर्ज करने के विरोध में कांग्रेस कार्यालय से एसपी कार्यालय तक बड़ी रैली भी निकाली थी। शुक्रवार को इस केस में जोशी को कोर्ट से बरी कर दिया गया। अभियोजन की तरफ से पंद्रह गवाह थे, लेकिन 12 गवाह मुकर गए। मुन्ना अंसारी और उनका भतीजा गुुुुुलरेज होस्टाइल नहीं हुए। 50 से ज्यादा पेज के फैसले में बरी होने का मुख्य आधार हथियार और गोली जब्त नहीं होना पाया गया था।
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कांग्रेस के पार्षद रहे मुन्ना अंसारी और जोशी के बीच लंबे समय से राजनीतिक अदावत रही है। वर्ष 2006 में सुयश अस्पताल के समीप अंसारी गोली लगने से घायल हो गए थे। उन्होंने तब पूर्व विधायक जोशी पर गोली चलाने का आरोप लगाया था।
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पुलिस ने जोशी के खिलाफ हत्या के प्रयास का केस दर्ज किया था। तब यह मामला काफी गरमा गया था,क्योकि जोशी कांग्रेस तब कांग्रेस के विधायक थे।
कांग्रेस ने तब प्रकरण दर्ज करने के विरोध में कांग्रेस कार्यालय से एसपी कार्यालय तक बड़ी रैली भी निकाली थी। शुक्रवार को इस केस में जोशी को कोर्ट से बरी कर दिया गया। अभियोजन की तरफ से पंद्रह गवाह थे, लेकिन 12 गवाह मुकर गए। मुन्ना अंसारी और उनका भतीजा गुुुुुलरेज होस्टाइल नहीं हुए। 50 से ज्यादा पेज के फैसले में बरी होने का मुख्य आधार हथियार और गोली जब्त नहीं होना पाया गया था।
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