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Indore News: लोकगायिका मालिनी अवस्थी ने कहा- लोकगीत समाज को खांचों में नहीं बांटते, बांधे रखते हैं

Fri, 30 Aug 2024 08:07 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अरविंद कुमार Updated Fri, 30 Aug 2024 08:07 PM IST
सार

प्रतिष्ठित संस्था अभ्यास मंडल द्वारा इंदौर में सालों से आयोजित होती आ रही सामाजिक व्याख्यानमाला में लोकगायिका मालिनी अवस्थी ने व्याख्यान दिया। अवस्थी ने कहा, लोकगीत समाज को खांचों में नहीं बांटते, बांधे रखते हैं।

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Indore Folk singer Malini Awasthi says Folk songs do not divide society into compartments they keep it tied
लोकगायिका मालिनी अवस्थी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इंदौर में आयोजित हो रहे अभ्यासमंडल की 63वीं व्याख्यानमाला के दूसरे दिन यानी शुक्रवार को लोकगायिका पद्मभूषण मालिनी अवस्थी ने 'लोक के आलोक में भारत' विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि लोक गीतों में गुणों को भी महत्व दिया जाता है। लोकगीत समाज को खांचों में नहीं बांटते। यह हमें एक ताने-बाने में बांध कर रखता है। यूपी में मुस्लिम बहनें भी शादी में शगुन गीत गाती हैं। एक दूसरे को जोड़े रखना लोक गीतों की सबसे बड़ी ताकत है।

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मालिनी ने कहा कि भारत में हमारे पूर्वजों ने सिखाया कि लोक में जो भी विद्यमान है, उसका आदर किया जाए। लोक में चैतन्य वस्तुएं भी दिखती हैं और जड़ता का भी सम्मान होता है। मांगलिक कार्य में गीत गाकर पुरखों को न्योता देने के लिए हम मिट्टी को भी चैतन्य मानकर पूजते हैं। आंधी पानी लड़ाई, झगड़े का न्योता लोक गीतों में दिया जाता है। हम नकारात्मक बातों में भी रचनात्मकता खोज लेते हैं।यह भारतीय लोक की सबसे बड़ी ताकत है।
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उन्होंने कहा कि लोकाचार किसी पुस्तक में नहीं मिलता, वो लोक व्यवहार में रहता है। रामायण के कई प्रसंग लोक गीतों में हैं। लेकिन किताबों में नहीं हैं। इन प्रसंगों के माध्यम से लोक गीतों में सीख भी देने की कोशिश की गई है।
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जिसके गुण हैं वही महान
मालिनी ने कहा कि परोपकार को भारतीय मूल्यों में बड़ा महत्व दिया गया, जिसमें गुण है, उन्हें ही महान माना जाता है। देश उसी राजा को जानता है, जिसने परोपकार, लोक कल्याण के काम किए। लोक गीत किसी सेलेब्स, रिकार्डिंग में नहीं मिलते हैं। लेकिन सदियों से इसे पूर्वजों ने अपने कंठ में जीवित रखा, ताकि पीढ़ी दर पीढ़ी उन गीतों से शिक्षा ले सकें।


सहना कमजोरी नहीं, ताकत है
अवस्थी ने कहा कि सहना हमेशा बुरा नहीं होता, अब सहना छोड़ दिया, इसलिए परिवार टूट रहे हैं। सहना इंसान की कमजोरी नहीं ताकत है। हमारे देश ने भी काफी सहा है। इस दौरान स्वागत भाषण हरेराम वाजपाई ने दिया। मंच पर गौतम कोठरी और शोभा ओझा सहित कई लोग मौजूद रहे।

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