Indore: इंतजार में बीता फरवरी, स्वच्छता रैंकिंग टीम नहीं आई, इंदौर ने चार माह पहले से कर रखी है तैयारी
रविवार सुबह मेयर पुष्य मित्र भार्गव और निगमायुक्त शिवम वर्मा बेकलेन में कैरम खेलने पहुंचे। इसके अलावा दोनो ने बेकलेन में सायकिल भी चलाई। इसके अलावा निगमायुक्त ने स्कीम-140 के व्यापारियों के साथ स्वच्छता को लेकर जनसंवाद भी किया।
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सात बार से स्वच्छता में सरताज इंदौर में अभी तक स्वच्छता रैंकिंग के लिए सर्वे की टीम नहीं आई है। दूसरे कुछ शहरों में टीम के आने की सुगबुगाहट है और लोगों के फीडबैक की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है, लेकिन इंदौर में अभी और इंतजार करना पड़ सकता है। इस बार 4000 से ज्यादा शहर स्वच्छता सर्वेक्षण में भाग ले रहे हैं। इंदौर लगातार आठवीं बार सबसे स्वच्छ शहर बनने की रेस में अग्रणी है।
15 मार्च तक दिल्ली से सर्वेक्षण के लिए टीम इंदौर आ जाएगी। इसके चलते फिर से नगर निगम ने बैकलेन, नालों की गाद हटाने और निर्माण स्थलों से धूल हटाने का काम शुरू कर दिया है। पिछले साल स्वच्छता सर्वेक्षण के परिणाम जनवरी माह में ही आ गए थे, लेकिन इस बार अब तक स्वच्छता सर्वेक्षण ही नहीं हो पाया है। अब स्वच्छता के तय मापदंड पहले से कड़े हैं, क्योंकि इंदौर, सूरत और मुंबई को स्वच्छता प्रीमियर लीग में रखा है।
अन्य शहरों की स्वच्छता का आकलन आसान होगा, लेकिन इन तीन शहरों में सामान्य सफाई के अलावा वायु, जल, थ्रीआरआर सहित अन्य पैमानों पर शहरों को परखा जाएगा। इंदौर का कड़ा मुकाबला सूरत से है, क्योंकि पिछली बार इंदौर के साथ सूरत को भी संयुक्त रूप से प्रथम पुरस्कार मिला था।
बैकलन में चलाई मेयर ने साइकिल
शहर की बैकलेन में सबसे ज्यादा कचरा बिखरा रहता है। लोग डोर टू डोर वाहनों में कचरा देने के बजाए कई बार बैकलेन में कचरा फेंक देते हैं। इसे लेकर नगर निगम लोगों को जागरूक कर रहा है। रहवासी संघों के साथ मिलकर अफसर बैकलेन साफ कर रहे हैं और फिर उसके रखरखाव का जिम्मा रहवासियों को दे रहे हैं। श्रीनगर एक्टेंशन की बैकलेन को नगर निगम ने साफ करने के बाद उसे सुंदर भी बनाया। रविवार सुबह मेयर पुष्य मित्र भार्गव और निगमायुक्त शिवम वर्मा बैकलेन में कैरम खेलने पहुंचे। इसके अलावा दोनों ने बैकलेन में साइकिल भी चलाई। इसके अलावा निगमायुक्त ने स्कीम-140 के व्यापारियों के साथ स्वच्छता को लेकर जनसंवाद भी किया। व्यापारियों ने कहा कि 56 दुकान और सराफा की तरह इस क्षेत्र की चौपाटी को भी डिस्पोजल फ्री बनाया जाएगा।
इंदौर की सफाई यहां कमजोर
- इंदौर की बैकलेन में कचरा ठीक से साफ नहीं होता है। पहले अर्थदंड के कारण लोग कचरा फेंकने से बचते थे। अब फिर से कचरे के ढेर बिखरे दिखाई दे रहे हैं।
- शहर के पुराने हिस्से में अभी भी खुली नालियां, जलजमाव और नदियों में सीवरेज जल मिलता है। इस बार सर्वेक्षण में इसे भी जांचा जाएगा। इस मामले में नंबर कम मिल सकते है।
- सफाई को लेकर लोगों में भी जागरूकता की कमी आई है। कई बस्तियों में कचरे के खुले ढेर नजर आते है। पब्लिक फीडबैक में इंदौर को कम नंबर मिल सकते है। 311 एप पर भी शिकायतें जल्दी नहीं सुलझाई जा रही है।
- कचरे से कमाई में सूरत हमसे आगे है। इंदौर में सीएनजी प्लांट स्थापित किया गया, लेकिन मिक्स कचरे के कारण ज्यादा सीएनजी का उत्पादन नहीं हो पा रहा है। सूरत में कचरे से बिजली बनाने का प्लांट भी शुरू हो चुका है।
चार माह से हो रही तैयारी
स्वच्छता को लेकर चार माह से इंदौर में तैयारियां हो रही है, लेकिन सर्वेक्षण नहीं होने के कारण उसे नए सिरे से फिर करना पड़ रहा है। नगर निगम ने पहले शहर के सभी सुविधाघरों की मरम्मत की। इसके अलावा नालों से गाद निकाली, लेकिन चार माह में फिर हालात पहले जैसे नहीं रहे। कलर पेंट किए डिवाइडरों पर फिर गंदगी नजर आ रही है। नालों में गाद जमी हुई है और बैकलेन में फिर कचरे के ढेर हैं।
