फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore News ›   Indore: Family court's unique decision- there is no valid reason for living separately from husband, wife cann

Indore: फैमिली कोर्ट का अनोखा फैसला- पति से अलग रहने का वाजिब कारण नहीं, पत्नी को भरण पोषण राशि नहीं मिल सकती

Thu, 22 May 2025 06:52 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Thu, 22 May 2025 06:52 PM IST
सार

पति के वकील की तरफ से कोर्ट में यह पक्ष रखा गया कि पति ने पत्नी को अपना एटीएम कार्ड दे रखा था। पत्नी ने विवाह के आठ साल बाद शिकायत की। पहले कभी शिकायत नहीं की गई। उधर पुलिस ने पत्नी का शिकायती आवेदन लिया,लेकिन पति के खिलाफ कोई प्रकरण दर्ज नहीं किया।

विज्ञापन
Indore: Family court's unique decision- there is no valid reason for living separately from husband, wife cann
इंदौर कोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पति से अलग रह रही पत्नी द्वारा भरण पोषण राशि प्राप्त करने को लेकर फैमिली कोर्ट में लगी याचिका पर अनोखा फैसला हुआ है। कोर्ट ने एक तरफ तो माना कि पत्नी स्वयं का भरण पोषण करने में सक्षम नहीं है और पति अपनी पत्नी का भरण पोषण करने में उपेक्षा कर रहा है लेकिन दूसरी तरफ यह भी माना की पत्नी के पास अपने पति से अलग रहने का कोई पर्याप्त वैधानिक कारण नहीं है। इस कारण उसे भरण पोषण राशि लेने का अधिकार भी नहीं है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने पत्नी द्वारा पेश आवेदन निरस्त कर दिया।

विज्ञापन

ये खबर भी पढ़ें:एक करोड़ में बनेंगे दो खेल मैदान, बाल विनय मंदिर और स्वामी विवेकानंद स्कूल को मिलेगी सौगात

विज्ञापन

वकील कृष्ण कुमार कुन्हारे, रुपाली राठौर ने बताया कि गौरी नगर निवासी पत्नी (परिवर्तित नाम) सुलोचना का विवाह वर्ष 2013 में (परिवर्तित नाम) पति अमन से हुआ था। वर्ष 2022 में सुलोचना ने पति के विरुद्ध विवाह के बाद से ही कम दहेज लाने को लेकर ताने मारना, मारपीट करना, खर्च न उठाने की पुलिस थाने में शिकायत की थी। थाने में यह भी कहा था कि पति ने घर से निकाल दिया। थाने की शिकायत के आधार पर पत्नी ने भरण-पोषण की मांग करते हुए फैमेली कोर्ट में केस लगाया था।

विज्ञापन
विज्ञापन


पति के वकील की तरफ से कोर्ट में यह पक्ष रखा गया कि पति ने पत्नी को अपना एटीएम कार्ड दे रखा था। पत्नी ने विवाह के आठ साल बाद शिकायत की। पहले कभी शिकायत नहीं की गई। उधर पुलिस ने पत्नी का शिकायती आवेदन लिया,लेकिन पति के खिलाफ कोई प्रकरण दर्ज नहीं किया। इस मामले में पत्नी की तरफ से अपने बयानों में स्पष्टीकरण नहीं देने पर कोर्ट ने पत्नी द्वारा पैसों के लिए पति द्वारा परेशान करने के बयानों को संदेहपूर्ण माना।

कोर्ट ने कहा कि पत्नी खुद और बच्चों के भरण पोषण में सक्षम नहीं है और पति भरण-पोषण नहीं कर रहा है, लेकिन पत्नी के पास पति से अलग रहने का कोई वैधानिक आधार नहीं है। इस कारण पत्नी को भरण-पोषण राशि देने के लिए वह  बाध्य नहीं है। कोर्ट ने नाबालिग बच्चों को भरण-पोषण दिलवाया, लेकिन पत्नी का आवेदन निरस्त कर दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed