Indore Election 2023: एबीसी मैनेजमेंट है इंदौर के विधायक मेंदौला की तीन राज्यों में सबसे बड़ी जीत का राज
दो नंबर विधानसभा क्षेत्र में कार्यकर्ता की सबसे बड़ी टीम है। चुनाव में मेंदौला इस सीट का बखूबी इस्तेमाल करते है। इस बार विधानसभा क्षेत्र के 3.47 वोटरों को एबीसी श्रेणी में बांटा गया। मतदाता सूची के हर पेज के हिसाब से एक पन्ना प्रमुख बने है।
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इंदौर की दो नंबर सीट के विधायक रमेश मेंदौला ने दस साल में सबसे ज्यादा वोटों की लीड से जीत का रिकार्ड बनाया है। इस बार मेंदौला राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में सबसे अधिक मतों से जीतने वाले उम्मीदवार बने। छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा वोटों से ब्रजमोहन अग्रवाल जीते। वे 67हजार 851 वोटों के अंतर से जीते, जबकि राजस्थान में सबसे बड़ी जीत दीया कुमारी की रही। वे 71 हजार,368 हजार वोटों से जीती। मैंदोला की जीत का अंतर सबसे ज्यादा 1 लाख 747 रहा। खास बात यह है कि इंदौर जिले में सबसे कम वोटिंग 67.45 दो नंबर विधानसभा क्षेत्र में हुई थी। इसके बावजूद सबसे बड़ी जीत का रिकार्ड कैसे बना। हमने यह जानने की कोशिश की।
एबीसी मैनेजमेंट है मेंदौला की बड़ी जीत की वजह
दो नंबर विधानसभा क्षेत्र के पास कार्यकर्ता की सबसे बड़ी टीम है। चुनाव में मेंदौला इस सीट का बखूबी इस्तेमाल करते है। इस बार विधानसभा क्षेत्र के 3.47 वोटरों को एबीसी श्रेणी में बांटा गया। दो नंबर की मतदाता सूची के हर पेज के हिसाब से एक पन्ना प्रमुख बने है। पूरी विधानसभा में उनकी संख्या करीब 13 हजार थी। पूरे मतदाता और पन्ना प्रमुख विधानसभा को एक एप में फीड किया गया। पन्ना प्रमुखों ने हर मतदाता को ए,बी, सी, श्रेणी और रंग में बांट रखा था। ए का मतलब भाजपा का वोटर, बी का मतलब तटस्थ वोटर और सी श्रेणी का वोटर जो कांग्रेस को पसंद करता हो। एक पन्ना प्रमुख को पेज में शामिल 15 से 20 घरों के वोटरों से वोट डलवाने की जिम्मेदारी दी गई थी। उन्होंने ए और बी श्रेणी के वोटरों से मतदाना वाले दिन लगातार संपर्क किया और वोट डलवाए। इस कारण ज्यादातर वोटर वे बाहर निकले, जो भाजपा को वोट देना चाहते थे।
दोपहर बाद फिर शेष रहे वोटर का फालोअप
दो नंबर विधानसभा के 301 बूथ है। हर बूथ में बैठे एजेंट को पता रहता है कि उस बूथ में किसके वोट डाले और किसके नहीं। दोपहर बाद उस सूची के माध्यम से फिल्ड में तैनात पेज प्रमुखों को यह पता चला कि किसके वोट नहीं डाले गए। फिर उन्होंने सिर्फ उन्ही वोटरों पर फोकस किया और उनके वोट डलवाए। विधानसभा का एक काॅल सेंटर भी बनाया गया था। जिस मतदाता को पर्ची या मतदान केंद्र को लेकर परेशानी आ रही थी। उसकी जानकारी काॅल सेंटर पर दी जा रही थी। काॅल सेंटर पर पूरे क्षेत्र के मतदाता का डेटा होने से मतदाता का केंद्र व पर्ची का पता लगाकर उन्हें सही मतदान केंद्र पर भेजा। पेज के हिसाब से मतदात समाप्ति तक जितने वोट डाले, उसकी जानकारी एप पर पन्ना प्रमुखों ने डाल दी।
पांच माह पहले से बूथ की टीम सक्रिय
पांच माह पहले से बूथ स्तर की टीम सक्रिय हो जाती है। बूथ पर कितने नए वोटर है। कौन क्षेत्र से जा चुका है। इसकी जानकारी एकत्र करते है और मतदाता सूची में नाम घटाने और बढ़ाने में जुट जाते है। जो नए मतदाता जुड़े है। उनकी जानकारी अलग से रखी जाती है, ताकि उन पर चुनाव के दौरान ज्यादा फोकस किया जा सके। पूरे चुनाव में 18 हजार से ज्यादा कार्यकर्ताअेां की टीम मैदानी स्तर पर सक्रिय रहती है। इनमें महिलाएं भी शामिल है। मतदाने वाले दिन यह टीम सबसे ज्यादा सक्रिय रहती है। इस टीम के कारण ही सबसे बड़ी जीत का रिकार्ड दो बार बन चुका है। क्षेत्र के 15 हजार कार्यकर्ता को प्रशिक्षण देने और उनसे काम कराने का जिम्मा चुनावी प्रबंधन संभाल रहे कमलेश शर्मा, ब्रजेश शुक्ला और सुधीर कोल्हे देखते है। इसके अलावा पार्षद भी मतदाता के संपर्क में रहते है।
दस साल पहले भी प्रदेश में सबसे बड़ी जीत
इससे पहले मेंदौला ने वर्ष 2013 में प्रदेश में सबसे ज्यादा वोटों से जीत दर्ज कराई थी। तब उन्हें 91,241 की लीड़ मिली थी। वर्ष 2008 में सुरेश सेठ को मेंदौला ने 39 हजार 937 वोटों की बढ़त से हराया था। वर्ष 2018 में 71 हजार 11वोटों से चुनाव जीते थे।
इस बार सबसे ज्यादा वोटों के दूसरे क्रम पर पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर की बहू कृष्णा गौर रही। उन्होंने कांग्रेस के रविंद्र साहू को 1,06668 वोटों से हराया। तीसरे नंबर पर बुधनी से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तगड़ी लीड लेकर चुनाव जीते। उन्हें इस बार 1,04974 वोटों की लीड़ मिली।
