Indore: ट्रैफिक को लेकर परिचर्चा, वक्ता बोले- शराब पीकर हादसे करने वालों पर मानव वध की धाराएं लगाएं
डीसीपी ट्रैफिक आनंद कलादगी ने बताया कि इंदौर में सड़क हादसों में कमी आई है। सड़क सुरक्षा पर भी ट्रैफिक पुलिस काम कर रही है। इंदौर में 33 लाख वाहनों की संख्या है। इंदौर की जनसंख्या 35 लाख है। 700 ट्रैफिक जवान शहर के ट्रैफिक को संभालते हैं।
विस्तार
प्रेस क्लब इंदौर में ''इंदौर में हो रहे हादसों का जिम्मेदार कौन'' विषय पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस समस्या का कैसे समाधान हो, इस पर शहर के जनप्रतिनिधियों, प्रबुद्धजनों व सामाजिक संगठनों ने मंथन किया। परिचर्चा में ज्यादातर वक्ता बोले कि शराब के नशे में शहर की सड़कों पर हादसे करने वालों के खिलाफ मानव वध की धारा में केस दर्ज होना चाहिए। इंदौर हादसों का गढ़ बनता जा रहा है।
खुद गलती न करें, दूसरों को गलती करने से रोकें : मेयर
मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि ट्रैफिक शहर की सबसे बड़ी समस्या है। इसे हल करने की कोशिश की हमने की। हो सकता है कि हम पांच साल में ज्यादा सफल न हो पाए, लेकिन कुछ तो बदलाव होगा। उन्होंने कहा कि ट्रैफिक की समस्या को सुधारने का एक ही फार्मूला है कि खुद गलती न करें और दूसरों को नियमों का उल्लंघन करने से रोकें। ट्रैफिक सुधार के लिए अब शहर में माहौल बनने लगा है। ट्रैफिक सुधार के लिए ट्रैफिक इंजीनियरिग और जागरूकता और सुविधा जरूरी है। हमने इस दिशा में काम किया है। इस बार शहर में गड्ढों की संख्या ज्यादा रही। मैं इस बात को स्वीकार करता हूं। हमने ड्रेनेज, सीवरेज, पेयजल लाइनों को भविष्य के हिसाब से डाल रहे है। इस कारण खुदाई हो रही है। इस कारण शहरवासियों को परेशानी भी हो रही है।
हेलमेट वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए : एडीएम
एडीएम रोशन राय ने कहा कि इंदौर प्रशासन ने नो हेलमेट नो पेट्रोल का आदेश निकाला, जिसका काफी विरोध हुआ, जबकि हेलमेट वाहन चालक की सुरक्षा के लिए है। एक परिवार में दो तीन गाड़ियां रखना अब आम बात हो गई है। ट्रैफिक के मामले में आत्म नियंत्रण जरूरी है।
35 लाख आबादी, 33 लाख वाहन : डीसीपी
डीसीपी ट्रैफिक आनंद कलादगी ने बताया कि इंदौर में सड़क हादसों में कमी आई है। सड़क सुरक्षा पर भी ट्रैफिक पुलिस काम कर रही है। इंदौर में 33 लाख वाहनों की संख्या है। इंदौर की जनसंख्या 35 लाख है। 700 ट्रैफिक जवान शहर के ट्रैफिक को संभालते है। चौराहों पर ट्रैफिक सिग्नल लगाए है। वाहन चालकों पर निगरानी के लिए ट्रैफिक पुलिसकर्मी तैनात करना पड़ते है। जनभागीदारी को लेकर हम लगातार काम कर रहे है। इंदौर में हादसों में सबसे ज्यादा मौतें हेलमेट नहीं पहनने से हो रही है। ई रिक्शा के रूट भी निर्धारित किए जा रहे हैं।
इस साल 300 से ज्यादा मौतें : कर्दम
इंदौर प्रेस क्लब अध्यक्ष दीपक कर्दम में बताया कि हर साल हादसों की संख्या बढ़ रही है। इस साल 300 से ज्यादा मौतें हो रही है। हादसों में ज्यादा वजह चालकों का नशे में होना पाया जाता है। प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष अरविंद तिवारी ने कहा कि हादसों पर हो रही मौतों जनप्रतिनिधियों को गंभीर होना चाहिए। इंदौर हादसों का गढ़ बनता जा रहा है। उपनगरीय बस, ट्रक, डंपरों के चालकों की मनमानी इतनी बढ़ गई है कि वे नियमों को तोड़ने में भी नहीं डरते। ट्रैफिक मामलों के जानकार राजकुमार जैन ने कहा कि मानवीय भूल भी हादसों की एक वजह है। रांग साइड चलना अब लोग गलत नहीं मानते हैं, जबकि नियम लोगों की सुरक्षा के लिए बने हैं।
लोक परिवहन का आकलन नहीं : शेठ
अतुल शेठ ने कहा कि लोक परिवहन व्यवस्था का शहर की आबादी के हिसाब से आकलन कभी नहीं किया गया। किस मार्ग पर चालान बनाना है और कहां ट्रैफिक का पालन करवाना है। इसका निर्धारण ट्रैफिक विभाग को करना चाहिए।सेवा सुरभि के ओम नरेडा ने कहा कि ओवरटेक के नियम वाहन चालक भूल गए हैं। वाहन चालक गलत दिशा से वाहन आगे बढ़ाते हैं। इस कारण हादसे होते हैं।
दोनों नए बस स्टेशन बेकार पड़े हैं : शर्मा
बस ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गोविंद शर्मा ने कहा कि नियम का सख्ती से पालन करना जरूरी है। इंदौर में दो बस स्टेशनों का निर्माण किया गया, लेकिन जनप्रतिनिधियों को विश्वास में नहीं लिया गया। दोनों बस स्टेशन बेकार पड़े हैं।
मास्टर प्लान सिर्फ किताबों में : नारंग
अजीत सिंह नारंग ने कहा कि जो व्यवस्था शहर में 10 से 15 साल होना चाहिए थी, वो देर से होती है। इससे भी परेशानी बढ़ती है। मास्टर प्लान सिर्फ किताबों में सिमटा है। समय पर चौड़ी सड़कें, ब्रिज बनाना चाहिए।
आंकड़ों की बाजीगरी : ईनाणी
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश ईनाणी ने कहा कि इंदौर में चूहों के काटने से भूखे रहने से भी मौतें हो रही हैं। अफसर आंकड़ों की बाजीगरी से हादसे कम दिखाते हैं, लेकिन उन ब्लैक स्पॉट्स को खत्म करने के लिए त्वरित कार्रवाई नहीं होती। परिचर्चा का संचालन महासचिव प्रदीप जोशी ने किया। आभार प्रेस क्लब कोषाध्यक्ष मुकेश तिवारी ने माना।
