फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore News ›   Indore: Dhar Bhojshala case - Petitioner's lawyer said - Dhar Darbar had declared Bhojshala as a mosque.

Indore:धार भोजशाला केस- याचिकाकर्ता के वकील ने कहा-धार दरबार ने भोजशाला को मस्जिद के रुप में घोषित किया था

Tue, 28 Apr 2026 07:52 PM IST
Abhishek Chendke न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Abhishek Chendke Updated Tue, 28 Apr 2026 07:52 PM IST
सार

धार स्थित भोजशाला विवाद में मंगलवार को हाईकोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा मेनन ने धार दरबार के ऐतिहासिक दस्तावेजों और प्राचीन कानूनों का हवाला देते हुए अपने तर्क प्रस्तुत किए, जबकि सर्वे की वीडियोग्राफी भी पक्षकारों को उपलब्ध कराई गई।

विज्ञापन
Indore: Dhar Bhojshala case - Petitioner's lawyer said - Dhar Darbar had declared Bhojshala as a mosque.
धार में स्थित भोजशाला

विस्तार

भोजशाला मामले में मंगलवार को सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा मेनन ने अपने तर्क रखे। उन्होंने इस केस में धार दरबार के दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 1935 में भोजशाला को मस्जिद घोषित किया गया था, क्योंकि पूर्व से परिसर में नमाज अदा की जाती थी।

विज्ञापन


इस अधिसूचना का गजट में भी नोटिफिकेशन है। उन्होंने पुरातत्व स्मारक अधिनियम 1904 का हवाला देते हुए कहा कि उस समय स्थानीय प्राधिकरणों को स्मारकों को संरक्षित घोषित करने का अधिकार प्राप्त था, जो बाद में केंद्र सरकार को स्थानांतरित कर दिया गया। इस कारण धार दरबार का निर्णय पूरी तरह विधिसम्मत है।
विज्ञापन

 

उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी संपत्ति के स्वामी का पता हो तो सरकार विधिवत प्रक्रिया अपनाकर उसे अधिग्रहित कर सकती है, लेकिन यदि स्वामी अज्ञात हो तो सरकार का उस संपत्ति पर स्वामित्व नहीं रहता। ऐसी स्थिति में सरकार को राज्य के प्रचलित भूमि अधिग्रहण कानूनों का पालन करना जरूरी होता है।

विज्ञापन
विज्ञापन


इस संपत्ति का भी विधिवत अधिग्रहण नहीं किया गया है। यह भी तर्क रखा गया कि ऐसे कोई ठोस साक्ष्य नहीं हैं जिनसे यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि संबंधित स्थल मंदिर है और सरकार ने विधिवत रूप से उसे अधिग्रहित कर संरक्षित स्मारक घोषित किया हो। इस विवाद का परीक्षण धार्मिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि विधि के स्थापित सिद्धांतों के आधार पर होना चाहिए।

 

पक्षकारों को कराए गए फुटेज मुहैया
हाईकोर्ट के निर्देश पर एएसआई ने इस याचिका से जुड़े सभी पक्षकारों को सर्वे के दौरान की गई वीडियोग्राफी के फुटेज मुहैया कराए। कोर्ट ने पिछली सुनवाई में इस संबंध में आदेश दिए थे। अब वीडियोग्राफी के तथ्यों के आधार पर पक्षकार अपनी बात रख सकते हैं। वीडियोग्राफी की मांग मुस्लिम पक्ष की ओर से की गई थी। एएसआई ने 98 दिन तक सर्वे कर भोजशाला की रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed