{"_id":"69a11b1de2ec0f56230e38db","slug":"indore-dhar-bhojshala-56-inscriptions-from-the-16th-century-found-with-verses-in-arabic-and-persian-2026-02-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Indore: धार भोजशाला- 16 वीं शताब्दी के 56 शिलालेखों पर मिली अरबी और फारसी में आयतें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Indore: धार भोजशाला- 16 वीं शताब्दी के 56 शिलालेखों पर मिली अरबी और फारसी में आयतें
Fri, 27 Feb 2026 11:01 AM IST
Abhishek Chendke
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Abhishek Chendke
Updated Fri, 27 Feb 2026 11:01 AM IST
सार
धार की ऐतिहासिक भोजशाला में एएसआई द्वारा किए गए 98 दिनों के वैज्ञानिक सर्वे ने इतिहास के कई दबे हुए पन्नों को साक्ष्यों के साथ सामने ला दिया है। इस सर्वे रिपोर्ट में प्राचीन वास्तुकला और शिलालेखों के महत्वपूर्ण प्रमाण मिले हैं।
विज्ञापन
धार भोजशाला।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
धार स्थित भोजशाला इन दिनों मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में पेश एएसआई की सर्वे रिपोर्ट के कारण चर्चा में है। 98 दिनों तक चले भोजशाला के सर्वे में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जो अब तक छिपे इतिहास का हिस्सा थे। आधुनिक पद्धतियों से हुए सर्वे में जमीन के भीतर के निर्माण और उसकी वास्तुकला की जानकारी भी टीम ने एकत्र की है। सर्वे में कमाल मौला मस्जिद के आसपास 56 शिलालेख मिले, जो 16वीं शताब्दी के आसपास के बताए जाते हैं। उन पर अरबी और फारसी में कुरान की आयतें लिखी हैं।
विज्ञापन
दरअसल, भोजशाला में कुछ मुगल शासकों ने भी बदलाव किए थे। इसके लिए वाग्देवी के मंदिर के कुछ हिस्सों के पत्थरों का इस्तेमाल किया गया। पत्थरों पर पूर्व में उकेरी गई आकृतियों को तोड़कर फिर उन्हें उपयोग में लाया गया।
विज्ञापन
राजा भोज ने कराया था निर्माण
बता दें, भोजशाला का निर्माण दसवीं शताब्दी में ज्ञान को बढ़ावा देने के लिए राजा भोज ने कराया था। नालंदा और तक्षशिला की तरह भोजशाला एक संस्कृत विश्वविद्यालय था।
विज्ञापन
खिलजी ने कराए थे निर्माण
एक शिलालेख पर अरबी भाषा में ला इलाह इल्लल्लाह मुहम्मदुर रसूल अल्लाह लिखा मिला। इसके अलावा कुछ शिलालेखों पर अरबी की आयतों का उल्लेख है। भोजशाला के कुछ हिस्से में मालवा के सुल्तान महमूद शाह खिलजी ने 1456 ईस्वी में द्वार के गुंबद और प्रवेश कक्ष सहित अन्य निर्माण मस्जिद वाले हिस्से में कराए थे। ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार मालवा में मुगलों का आगमन 16 वीं शताब्दी में अकबर के समय हुआ था।
मांडू था मांडव दुर्ग, परमार वंश के अधीन था
1561 ईस्वी में मुगलों ने मालवा पर विजय प्राप्त की और धार के समीप मांडू में कई महलों का निर्माण भी किया गया। तब धार और मांडू का इलाका अत्यंत समृद्ध हुआ करता था। 18वीं शताब्दी के आते-आते मुगल साम्राज्य धीरे-धीरे कमजोर होने लगा और फिर मराठों ने मालवा पर अपना आधिपत्य जमाया। इसके बाद 200 से ज्यादा वर्षों तक मराठा शासकों ने मालवा पर राज किया।
मालवा का ऐतिहासिक नगर मांडू प्रारंभिक काल में परमार वंश के अधीन था और इसका नाम मांडव दुर्ग था। 1305 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी ने मालवा पर कब्जा किया था। इसके बाद 1401 ईस्वी में दिलावर खान ने मांडू को अपनी राजधानी बनाया। 16 वीं शताब्दी में मांडू के शासक बाज बहादुर थे। उन्होंने अपनी प्रेमिका रानी रूपमती के लिए एक महल बनवाया था। रानी रूपमती उस महल से नर्मदा नदी के दर्शन करती थीं और उसके बाद ही अन्न ग्रहण करती थीं।
