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Indore News: वंदे मातरम पर सियासी संग्राम! पार्षद फौजिया शेख बोलीं- दबाव में नहीं गाएंगे

Thu, 09 Apr 2026 07:52 AM IST
Abhishek Chendke न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Abhishek Chendke Updated Thu, 09 Apr 2026 07:52 AM IST
सार

फौजिया ने सोशल मीडिया पर सफाई देते हुए कहा कि वे शहर से जुड़े गंभीर मुद्दों पर सवाल उठा रही थीं, लेकिन उन्हें रोक दिया गया। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 19(1) और 25 का हवाला देते हुए कहा कि किसी को राष्ट्रगीत गाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

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Indore Councilor Fauzia Sheikh said I don't have any objection to Vande Mataram But it cannot be sung forcibly
पार्षद फौजिया शेख अलीम। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बजट सम्मेलन के दौरान  वंदे मातरम में गैरमौजूद रहने को लेकर कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम को सदन से बाहर किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस पर पार्षद ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया देते हुए पूरे घटनाक्रम पर सफाई दी है। कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम ने सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी कर कहा कि बजट सम्मेलन में उनके दो महत्वपूर्ण प्रश्न थे। एक सवाल गंदे पानी की समस्या से जुड़ा था और दूसरा बावड़ी कांड से संबंधित था। उन्होंने कहा कि वे अपना सवाल पूछ रही थीं, लेकिन उन्हें रोक दिया गया।

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गंदे पानी से मौतों का मुद्दा उठाने की बात

उन्होंने बताया कि भागीरथपुरा में गंदे पानी के कारण मौतें हुई हैं और उनका सवाल शहरहित से जुड़ा हुआ था। लेकिन उन्हें यह कहकर रोका गया कि वे  वंदे मातरम के दौरान सदन में मौजूद नहीं थीं, इसलिए उन्हें पहले इसे गाना होगा। फौजिया शेख अलीम ने कहा कि वे चार बार की पार्षद हैं और अलग-अलग परिषदों में उन्हें 20 साल का अनुभव है। उन्होंने दावा किया कि वे हमेशा समय पर सदन में पहुंचती रही हैं।
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संविधान का हवाला दिया
 
वंदे मातरम के मुद्दे पर उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि आर्टिकल 19(1) के तहत किसी को भी इसे गाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। साथ ही आर्टिकल 25 का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि संविधान में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि राष्ट्रगीत गाना अनिवार्य है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे से जुड़ी याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में खारिज हो चुकी हैं।
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फौजिया शेख अलीम ने कहा कि वे  वंदे मातरम का सम्मान करती हैं और हमेशा करती रहेंगी। उन्होंने कहा कि भारत में गंगा जमुनी तहजीब है और सभी धर्मों को आजादी और सुरक्षा मिली है। लेकिन नगर निगम में बजट पर चर्चा नहीं हुई और जनता को गुमराह किया गया। उन्होंने कहा कि वे इस मामले में सभापति और संभागायुक्त को पत्र लिखेंगी ताकि भविष्य में किसी भी पार्षद के साथ इस तरह का व्यवहार न किया जाए। उन्होंने इसे शहर हित के खिलाफ बताया।


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पार्षद सुरेश कुरवाडे ने उठाया मुद्दा
जानकारी के अनुसार, सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू हुई थी और सम्मेलन की शुरुआत  वंदे मातरम गीत के साथ होती है। उस समय पार्षद फौजिया शेख अलीम सदन में मौजूद नहीं थीं। इस पर पार्षद सुरेश कुरवाडे ने आपत्ति जताई थी। बाद में प्रश्नकाल के दौरान जब फौजिया सवाल पूछने के लिए खड़ी हुईं, तो सुरेश कुरवाडे समेत अन्य पार्षदों ने सभापति से उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इस मामले में मेयर पुष्य मित्र भार्गव ने कहा कि कांग्रेस को जवाब देना चाहिए कि वे देशभक्तों के साथ है या देशद्रोहियों के साथ। कांग्रेस कार्यालय में भी वंदे मातरम गाया जाता होगा, तो वहां पर भी ये लोग क्या इसी तरह राष्ट्रगीत का अपमान करते है।      

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