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इंदौर: कान्ह नदी को पुर्नजीवित करने के लिए शहरवासियों ने कृष्णपुरा छत्री पर लिया संकल्प

Tue, 29 Sep 2026 07:00 AM IST
Abhishek Chendke न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Abhishek Chendke Updated Tue, 29 Sep 2026 07:00 AM IST
सार

सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद कान्ह-सरस्वती नदी की बदहाली दूर नहीं हो सकी है। अब नदी को पुनर्जीवित करने के लिए अभ्यास मंडल ने जनअभियान की शुरुआत की है। सोमवार को कृष्णपुरा छत्री घाट पर शहर के प्रबुद्धजन और पर्यावरणविद् जुटे।

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Indore: City residents took a pledge at Krishnapura Chhatri to rejuvenate the Kanha River.
अभ्यास मंडल के आयोजन में शहर के प्रबुद्धजन - फोटो : amarujala

विस्तार
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इंदौर की कान्ह-सरस्वती नदी को साफ बनाने के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन नदी कभी भी साफ नहीं बन पाई। इस नदी को पुनर्जीवित करने के लिए अभ्यास मंडल ने सोमवार को कृष्णपुरा छत्री से अभियान शुरू किया।

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शहर के प्रबुद्धजन घाट पर जुटे और ‘नदी का आत्मदान, आओ रूठी कान्ह नदी को मनाएँ’ अभियान चलाया। कार्यक्रम की शुरुआत कवि प्रदीप नवीन ने नदी पर लिखी अपनी कविता के भावपूर्ण पाठ से की। इसके बाद उपस्थित नागरिकों ने कान्ह-सरस्वती नदी के पुनर्जीवन को केवल किसी संस्था या कुछ व्यक्तियों का अभियान न मानकर इसे जन-जन का अभियान बनाने और नदी के लिए जन-प्रतिज्ञा लेने का आह्वान किया।
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अभ्यास मंडल के अध्यक्ष रामेश्वर ने कहा कि कान्ह-सरस्वती के लिए लंबे समय से किए जा रहे प्रयासों और लगातार आयोजित हो रहे कार्यक्रमों के कारण ही आज नदी के अस्तित्व को लेकर समाज में चेतना जीवित है। कान्ह-सरस्वती अभियान को नर्मदा आंदोलन जैसे व्यापक जनजागरण से जोड़ने की आवश्यकता है।

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पर्यावरणविद् डॉ. ओ.पी. जोशी, डॉ. एस.एल. गर्ग और डॉ. दिलीप वाघेला ने नदी पुनर्जीवन के पर्यावरणीय पक्ष को सामने रखा। उन्होंने नदी को केवल बहते हुए जल के रूप में देखने के बजाय उसके प्राकृतिक जलमार्ग, जलग्रहण क्षेत्र, तालाबों, नालों और वर्षाजल की पूरी प्रणाली को समझने की आवश्यकता बताई।

 

पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी सी.बी. सिंह और मुकेश चौहान ने नदी से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि कान्ह-सरस्वती इंदौर की पुरानी पहचान और सामाजिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। उन्होंने नदी से जुड़े अतीत के अनुभवों और वर्तमान चुनौतियों पर अपने विचार रखे।


 

कार्यक्रम का संचालन डॉ. स्वप्निल व्यास ने किया। उन्होंने कहा कि कान्ह-सरस्वती को पुनर्जीवित करने के लिए दो प्रमुख संकल्पों को जनचेतना का हिस्सा बनाना होगा—नदी की नसों को जिंदा रखना और नदी के लिए पानी बचाना होगा।

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