इंदौर: गुजरात-एमपी की बार्डर पर माफिया, अफसरों की मिलीभगत से चलता है अवैध शराब का सिंडिकेट
मालवा और निमाड़ से गुजरात तक फैला अवैध शराब का कारोबार एक संगठित सिंडिकेट के रूप में काम कर रहा है। इस काले धंधे में करोड़ों रुपये का खेल होता है। शराब की दुकानों के ठेकों से लेकर परिवहन और खपत तक पूरा नेटवर्क संचालित होता है।
विस्तार
देवास में पिछले दिनों शराब तस्करों ने ड्यूटी कर रहे थाना प्रभारी दिलीप पुरी की जान ले ली। गिरफ्तार किए गए आरोपी पश्चिमी मध्य प्रदेश से गुजरात तक चलने वाले अवैध शराब सप्लाई सिंडिकेट का हिस्सा बताए जा रहे हैं। जिस मिनी ट्रक ने थाना प्रभारी को रौंदा, उसमें मिली शराब टिमरनी से गुजरात पहुंचाई जा रही थी। इस घटना ने साबित कर दिया कि मध्य प्रदेश में अवैध शराब माफिया कितना ताकतवर हो चुका है
मालवा और निमाड़ के इलाकों से गुजरात तक अवैध शराब पहुंचाना माफिया के लिए मुनाफे का कारोबार बन चुका है। 'गंदा है, पर धंधा है' की तर्ज पर वर्षों से चल रहे इस कारोबार में माफिया, अफसरों और राजनेताओं की मिलीभगत के आरोप भी लगते रहे हैं।
आदिवासी अंचल वाला अलीराजपुर प्रदेश के सबसे पिछड़े जिलों में शामिल है, लेकिन यहां की शराब दुकानों के ठेके पिछले साल 25 करोड़ रुपये में गए थे। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां की शराब दुकानों पर कितनी बिक्री होती होगी। इसके अलावा आसपास के जिलों की शराब दुकानों के स्टॉक को भी कागजों पर बिक्री में दिखाया जाता है, जबकि शराब चोरी-छिपे गुजरात पहुंचा दी जाती है। गुजरात में मध्य प्रदेश से पहुंचाई गई शराब महंगे दामों पर बिकती है।
इंदौर पुलिस ने 24 जुलाई को कनाड़िया बायपास पर अवैध शराब से भरे ट्रक को पकड़ा था। इस मामले में पुलिस ने दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया था। ट्रक से लाखों रुपये की अवैध शराब जब्त की गई थी। गिरफ्तार आरोपी भी इस सप्लाई सिंडिकेट का हिस्सा बताए जा रहे हैं।
अवैध शराब के परिवहन पर हो सख्ती
एमपी से गुजरात तक फैले अवैध शराब सप्लाई नेटवर्क को सरकार को खत्म करना चाहिए। इसके मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ज्यादा मुनाफा होने के कारण इस अपराध में नए लोग भी जुड़ रहे हैं। यदि कार्रवाई का खौफ रहेगा, तो इस अवैध धंधे पर रोक लगेगी।
— रामेश्वर गुप्ता, पूर्व एडीएम
ऐसे चलता है सिंडिकेट
ग्रामीण क्षेत्रों में शराब दुकानों के ठेके शहरों की तुलना में कम राशि में मिल जाते हैं। वहां वास्तविक बिक्री तो कम होती है, लेकिन दुकानों के लिए मंगाया गया स्टॉक गुजरात में खपा दिया जाता है।
- अवैध शराब का परिवहन करने वालों को भी सिंडिकेट संचालक अच्छी-खासी रकम देते हैं। एक ट्रिप के लिए पांच से दस हजार रुपये तक दिए जाते हैं। आयशर वाहन, टैंकर, ट्रक और अन्य वाहनों के जरिए अवैध शराब अलीराजपुर पहुंचाई जाती है।
- जिस वाहन में शराब पहुंचाई जाती है, उसके आगे पायलटिंग के लिए दूसरे वाहन भी चलते हैं। वे खतरा भांपते ही शराब से भरे वाहन के चालक को आगाह कर देते हैं। ज्यादातर अवैध शराब रात एक बजे से सुबह पांच बजे के बीच गुजरात पहुंचाई जाती है।
- अलीराजपुर के वाहन चालकों को गुजरात के जंगलों के रास्तों की जानकारी होती है। दाहोद, राणापुर और चांदपुर के रास्तों से अवैध शराब की खेप छोटे वाहनों में गुजरात के ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाई जाती है।
- शराब का अवैध परिवहन कुछ आबकारी अधिकारियों की मिलीभगत से चलने के आरोप हैं। अलीराजपुर जिले में पोस्टिंग के लिए कई अधिकारी जोड़-तोड़ करते हैं। सालभर में दिखावे के लिए अवैध शराब पकड़ी जाती है, लेकिन ज्यादातर मामलों में केवल वाहन चालक के खिलाफ केस दर्ज होता है। शराब किसने भेजी और उसे कहां पहुंचाया जाना था, इसकी पड़ताल कम ही होती है।
- अलीराजपुर क्षेत्र से गुजरात को जोड़ने वाली कई सीमाएं घने जंगलों से घिरी हुई हैं। अवैध शराब का कारोबार करने वाले लोग इन जंगलों के रास्तों का इस्तेमाल कर शराब गुजरात पहुंचाते हैं। गुजरात में शराब की बिक्री प्रतिबंधित होने के कारण वहां इसकी कीमत अधिक मिलती है।
- चार माह पहले लोकायुक्त ने अलीराजपुर में पदस्थ रहे एक पूर्व अधिकारी के ठिकानों पर छापा मारा था। इस कार्रवाई में करोड़ों रुपये की अवैध कमाई का खुलासा हुआ था। जांच में यह भी सामने आया था कि अधिकारी अवैध शराब सिंडिकेट का हिस्सा था और लंबे समय तक अलीराजपुर में ही पदस्थ रहा।
