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इंदौर: कृषि विभाग तलाश रहा कम पानी वाली फसलें, कमजोर बारिश ने बढ़ा दी चिंता, अच्छी पैदावार पर संकट
Sun, 27 Sep 2026 07:16 AM IST
Arjun Richhariya
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Sun, 27 Sep 2026 07:16 AM IST
सार
इंदौर संभाग में कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग ने रबी सीजन के लिए विशेष रणनीति तैयार की है। संयुक्त संचालक कृषि की अध्यक्षता में हुई बैठक में किसानों को कम पानी वाली फसलों, दलहन-तिलहन और जैविक खेती को अपनाने की सलाह दी गई है।
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कृषि विभाग के अधिकारियों की बैठक।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
विस्तार
कम वर्षा की स्थिति को ध्यान में रखते हुए रबी सीजन की तैयारियों के सिलसिले में संभागीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक हुई। किसान कल्याण तथा कृषि विकास के संयुक्त संचालक की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में कृषि विभाग सहित सहकारिता, मंडी और कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य अल्प वर्षा के प्रभाव से निपटने और किसानों को कम पानी वाली फसलों की ओर प्रोत्साहित करने की रणनीति तैयार करना रहा।
दलहनी और तिलहनी फसलों का रकबा बढ़ाने पर फोकस
संयुक्त संचालक कृषि जितेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि बैठक में हमने विभागीय योजनाओं की प्रगति का जायजा लिया और अधिकारियों को सभी निर्धारित लक्ष्यों को समय-सीमा के भीतर शत-प्रतिशत पूरा करने के सख्त निर्देश दिए। कृषि आदान व्यवस्था की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में दलहनी और तिलहनी फसलों का रकबा बढ़ाया जाना अत्यंत आवश्यक है। इसके अतिरिक्त किसानों को समय पर सही तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया ताकि वे फसल चयन और जल प्रबंधन को लेकर सही निर्णय ले सकें।
प्राकृतिक एवं जैविक खेती के प्रोत्साहन पर विशेष बल
बैठक में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन और परंपरागत कृषि विकास योजना की प्रगति की समीक्षा की गई। जैविक और प्राकृतिक उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सभी जिलों में संचालित हाट बाजारों के व्यवस्थित और गुणवत्तापूर्ण संचालन के कड़े निर्देश जारी किए गए। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को हर संभव सहायता और बाजार से जुड़ाव प्रदान करें।
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रबी सीजन की कार्ययोजना और कम पानी की गेहूं प्रजातियां
संभाग के सभी जिलों के उप संचालकों ने अपनी-अपनी कार्ययोजना प्रस्तुत की। इसमें दलहन और तिलहन फसलों का रकबा बढ़ाने के साथ-साथ कम पानी में बेहतर पैदावार देने वाली गेहूं की विशेष प्रजातियों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर सहमति बनी। किसानों को इन प्रजातियों के प्रति जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाने की बात कही गई ताकि कम सिंचाई में भी बेहतर उत्पादन हासिल किया जा सके।
उर्वरक वितरण व्यवस्था की समीक्षा की
उर्वरक आपूर्ति की समीक्षा करते हुए ई-विकास प्रणाली के जरिए सुचारू वितरण की बात कही गई। मार्कफेड अधिकारियों ने बताया कि रेक प्वाइंट से उर्वरकों की आपूर्ति नियमित रूप से की जा रही है। सहकारिता समितियों के माध्यम से किसानों तक खाद पहुंचाने की व्यवस्था पर चर्चा हुई। साथ ही, खाद, बीज और अन्य कृषि आदानों की गुणवत्ता जांचने के लिए सघन जांच अभियान चलाने और किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
पर्याप्त बीज उपलब्धता का दावा किया
उप संचालकों, बीज प्रमाणीकरण अधिकारियों तथा बीज निगम के प्रबंधकों ने पुष्टि की कि संभाग के सभी जिलों में रबी सीजन के लिए पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध हैं। इसके अलावा विभाग के विभिन्न लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए गए। कार्यक्रम के अंत में पदोन्नत हुए विभागीय अधिकारियों का स्वागत किया गया।
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दलहनी और तिलहनी फसलों का रकबा बढ़ाने पर फोकस
संयुक्त संचालक कृषि जितेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि बैठक में हमने विभागीय योजनाओं की प्रगति का जायजा लिया और अधिकारियों को सभी निर्धारित लक्ष्यों को समय-सीमा के भीतर शत-प्रतिशत पूरा करने के सख्त निर्देश दिए। कृषि आदान व्यवस्था की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में दलहनी और तिलहनी फसलों का रकबा बढ़ाया जाना अत्यंत आवश्यक है। इसके अतिरिक्त किसानों को समय पर सही तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया ताकि वे फसल चयन और जल प्रबंधन को लेकर सही निर्णय ले सकें।
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प्राकृतिक एवं जैविक खेती के प्रोत्साहन पर विशेष बल
बैठक में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन और परंपरागत कृषि विकास योजना की प्रगति की समीक्षा की गई। जैविक और प्राकृतिक उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सभी जिलों में संचालित हाट बाजारों के व्यवस्थित और गुणवत्तापूर्ण संचालन के कड़े निर्देश जारी किए गए। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को हर संभव सहायता और बाजार से जुड़ाव प्रदान करें।
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रबी सीजन की कार्ययोजना और कम पानी की गेहूं प्रजातियां
संभाग के सभी जिलों के उप संचालकों ने अपनी-अपनी कार्ययोजना प्रस्तुत की। इसमें दलहन और तिलहन फसलों का रकबा बढ़ाने के साथ-साथ कम पानी में बेहतर पैदावार देने वाली गेहूं की विशेष प्रजातियों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर सहमति बनी। किसानों को इन प्रजातियों के प्रति जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाने की बात कही गई ताकि कम सिंचाई में भी बेहतर उत्पादन हासिल किया जा सके।
उर्वरक वितरण व्यवस्था की समीक्षा की
उर्वरक आपूर्ति की समीक्षा करते हुए ई-विकास प्रणाली के जरिए सुचारू वितरण की बात कही गई। मार्कफेड अधिकारियों ने बताया कि रेक प्वाइंट से उर्वरकों की आपूर्ति नियमित रूप से की जा रही है। सहकारिता समितियों के माध्यम से किसानों तक खाद पहुंचाने की व्यवस्था पर चर्चा हुई। साथ ही, खाद, बीज और अन्य कृषि आदानों की गुणवत्ता जांचने के लिए सघन जांच अभियान चलाने और किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
पर्याप्त बीज उपलब्धता का दावा किया
उप संचालकों, बीज प्रमाणीकरण अधिकारियों तथा बीज निगम के प्रबंधकों ने पुष्टि की कि संभाग के सभी जिलों में रबी सीजन के लिए पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध हैं। इसके अलावा विभाग के विभिन्न लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए गए। कार्यक्रम के अंत में पदोन्नत हुए विभागीय अधिकारियों का स्वागत किया गया।
