Indore: ढाई माह की मासूम फांसी के फंदे से बच गई , मां और बेटे की जान गई
घटना महू के बडगौंदा ग्रामीण क्षेत्र की है। यहां रहने वाली डिंपल गिरवाल ने अपने चार साल के बेटे काव्यांश और ढाई माह की बेटी के साथ कमरे में फांसी लगाई। बच्चों का फंदा डिंपल ने झूले पर बांधा। एक फंदा बेटे के गले में और दूसरा बेटी के गले में डाला था।
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पति की प्रताड़ना से तंग आकर एक महिला ने अपने दोनों बच्चों के साथ फंदा लगा लिया। मां और चार साल के बेटे की तो जान चली गई, लेकिन ढाई माह की बच्ची फंदे से ठीक तरह से नहीं फंसी और उसकी जान बच गई। जब देर तक उसके रोने की आवाज पड़ोसियों ने सुनी तो वे कमरे में पहुंचे, तब इस घटना का खुलासा हुआ। ढाई माह की बच्ची के गले के बजाए उसका स्वेटर फंदे में अटक गया था। इस कारण उसे कोई नुकसान नहीं हुआ।
यह दर्दनाक घटना महू के बडगौंदा ग्रामीण क्षेत्र की है। यहां रहने वाली डिंपल गिरवाल ने अपने चार साल के बेटे काव्यांश और ढाई माह की बेटी के साथ कमरे में फांसी लगाई। बच्चों का फंदा डिंपल ने झूले पर बांधा। एक फंदा बेटे के गले में और दूसरा बेटी के गले में डाला। खुद ने पंखे पर फांसी का फंदा लगाया था। पड़ोसी पहुंचे तो दंग रह गए। फंदे पर डिंपल और काव्यांश लटके हुए थे और रो रही बेटी को फंदे से उन्होंने सुरक्षित निकाला। वह सकुशल है।
पांच साल पहले हुआ था विवाह
घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंचे पुलिस अफसरों ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस को पता चला कि डिंपल का विवाह पांच साल पहले महू निवासी रोहित से हुआ था। वह शराब पीने का आदी है और नौकरी भी ठीक से नहीं करता था। आए दिन पैसे की तंगी को लेकर पति-पत्नी में विवाद होते थे। शराब के नशे में रोहित डिंपल के साथ मारपीट करता था।
इससे तंग आकर वह अपने इंदौर स्थित फूटी कोठी मायके में आ गई थी, लेकिन रोहित फिर उसे व बच्चों को अपने साथ ले गया। इसके बाद डिंपल ने बच्चों के साथ आत्महत्या करने का फैसला लिया।पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। मां और बेटे के शवों को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा
बेटी को संभालेंगे अब नाना नानी
अपनी मां और भाई को खो चुकी ढाई माह की मासूम की हालत ठीक है। वह फांसी के फंदे से बच गई, लेकिन अब उसका पालन पोषण परिजनों के लिए सबसे बड़ी चिंता है। फिलहाल वह नाना-नानी के पास रहेगी। परिजनों ने बताया कि नशे में डिंपल के साथ रोहित मारपीट कर चोट पहुंचता था और तरह-तरह के आरोप भी लगता था। कई बार हमने भी समझाने की कोशिश की, लेकिन वह प्रताडि़त करना नहीं छोड़ता था। बच्चों के रोजमर्रा की वस्तुएं भी वह नहीं लाकर देता था।
