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Indore: बकिंघम पैलेस की तर्ज पर बना 103 साल पुराना गेट अब होगा हमेशा के लिए बंद, बनेगा दर्शनीय स्पाॅट

Mon, 05 Feb 2024 08:15 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Mon, 05 Feb 2024 08:15 PM IST
सार

तुकोजीराव तृतीय ने लालबाग के परिसर की सजावट 1921 में कराई थी। तब बकिंघम पैलेस की तर्ज पर इंग्लैंड से एक बड़ा गेट उन्होंने बनवाया था। जहाज के रास्ते बीड़ का बना गेट मुबंई पहुंचा था। 

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Indore: 103 year old gate built on the lines of Buckingham Palace will now be closed forever, will become a sc
लालबाग पैलेस का 103 साल पुराना गेट। - फोटो : amar ujala digital

विस्तार

होलकर राजवंश की बेशकीमी निशानी लालबाग पैलेस का हेरिटेज गेट अब रोज खुलेगा और बंद नहीं होगा। 103 साल पुराने इस गेट को आपरेट करना आसान नहीं है, इसलिए पुरातत्व विभाग उस गेट से पर्यटकों की एंट्री हमेशा के लिए बंद करेगा। गेट की सजावट कर उसे एक दर्शनीय स्पाॅट बनाने की तैयारी की जा रही है। लालबाग परिसर में जाने की एंट्री केसरबाग रोड से की जाएगी।

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जहाज के रास्ते इंग्लैंड से मुबंई तक आया था गेट

72 एकड़ में फैले लालबाग पैलेस का निर्माण तुकोजीराव द्वितीय ने 1884 में कराया था। इसका उपयोग राजपरिवार के निवास के लिए होता था। रोमन शैली में बने इस महल की सजावट पेरिस से राजमहलों की तरह की गई थी। सफेद मार्बल, सोने की पाॅलिस की सीलिंग और बेल्जियम के कांच का उपयोग किया गया है।

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तुकोजीराव तृतीय ने लालबाग के परिसर की सजावट 1921 में कराई थी। तब बकिंघम पैलेस की तर्ज पर इंग्लैंड से एक बड़ा गेट उन्होंने बनवाया था। जहाज के रास्ते बीड़ का बना गेट मुबंई पहुंचा था। वहां से वाहन के जरिए दो हिस्सों में उसे इंदौर लाकर लालबाग पसिसर में लगाया गया था।
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अष्टधातु के दो शेर भी बने है

गेट पर होलकर राजपरिवार का राज चिन्ह भी अंकित है और अष्टधातु के दो शेर भी बनाए गए है। गेट के समीप दो कक्ष भी बने है। जिसमे पहले दरबान पहरा देते थे। 120 साल पुराने इस गेट का कोई भी पुर्जा खराब होता है तो उसे ठीक कराने में अफसरों को मुश्किल आ जाती है,क्योकि टूटे हिस्से को सांचे में ढलवा कर बनवाया जाता है।

पुराना गेट होने के कारण उसे आपरेट करना भी परेशानी भरा है और उसके क्षतिग्रस्त होने का खतरा भी रहता है। परिसर में लगने वाले मेले व अन्य आयोजनों के समय गेट को खोला जाता है। गेट की दीवारों पर भी बैनर टांग कर उसे खराब किया जा रहा है।

इस कारण पुरातत्व विभाग उसे दर्शनीय स्पाॅट बनाएगा। गेट पर विद्युत सज्जा भी होगी, ताकि पर्यटक गेट को देखने आ सके और सेल्फी ले सके। पैलेस की एंट्री होगी केसरबाग रोड से होगी।

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