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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore News ›   In-charge of Simrol police station, who was involved in the murder of the principal, attached the line

Indore News: प्रिंसिपल हत्याकांड में दो थाना प्रभारी नपे, किया लाइन अटैच

Sun, 26 Feb 2023 07:18 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Sun, 26 Feb 2023 07:18 PM IST
सार

एसपी द्वारा जारी आदेश में लिखा गया कि सिमरोल थाने में प्रिंसिपल विमुक्ता शर्मा की हत्या का केस दर्ज किया, लेकिन उससे पहले तीन शिकायती आवेदनों की थाना प्रभारी ने जांच नहीं की। यह  घोर लापरवाही है। इस कारण उन्हें लाइन अटैच किया जाता है। 

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In-charge of Simrol police station, who was involved in the murder of the principal, attached the line
पुलिस की गलती से प्रिंसिपल विमुक्ता शर्मा का जीवन संकट में आ गया - फोटो : अमर उजाला, इंदौर

विस्तार

बीएम कॉलेज की प्राचार्य विमुक्ता शर्मा को पेट्रोल डालकर जलाने की घटना नहीं होती, यदि सिमरोल थाना प्रभारी पहले हुई तीन शिकायतों पर एक्शन समय पर ले लेते। ऐसे नहीं हुआ और उसकी कीमत प्रिसिंपल को जान देकर चुकाना पड़ी। अब इस मामले में सिमरोल थाना प्रभारी आरएनएस भदौरिया भी नप गए। उन्हें एसपी ने लाइन अटैच किया है। इससे पहले एक सहायक उपनिरीक्षक को भी हटाया जा चुका है।  देपालपुुर थाना प्रभारी रहे धमेंद्र शिवहरे भी सिमरोल थाने में जब पदस्थ थे, तब उन्होंने भी शिकायत की जांच नहीं की। उन्हें भी देपालपुर थाने से हटाकर लाइन में भेज दिया।

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एसपी द्वारा जारी आदेश में लिखा गया कि सिमरोल थाने में प्रिंसिपल विमुक्ता शर्मा की हत्या का केस दर्ज किया, लेकिन उससे पहले तीन शिकायती आवेदनों की थाना प्रभारी ने जांच नहीं की। यह कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही है। इस कारण उन्हें लाइन अटैच किया जाता है। इस  घटना को लेकर शहर में आक्रोश है और पुलिस की सख्ती पर भी सवाल उठ रहे है। अब तक तीन अफसर इस मामले में नप चुके है। 
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बिल्व पत्र तोड़ने आई थी प्रिंसिपल, आरोपी ने आग लगा दी
२० फरवरी को प्रिंसिपल शर्मा कॉलेज परिसर में बिल्व पत्र तोड़ने आई थी। तब आरोपी छात्र उनके पास आया और विवाद करने लगा। कुछ देर बाद उसने बाल्ट में भरा पेट्रोल शर्मा पर डाल दिया और लाइटर से आग लगा दी। इसके बाद वह आत्महत्या करने तिंछा फाल की तरफ भागा। पुलिस ने वहां पहुंच कर उसे बचा लिया।

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शिकायत के बाद भी बरती पुलिस ने लापरवाह
आरोपी छात्र आशुतोष श्रीवास्तव ने जिस दिन पेट्रोल डालकर प्रिंसिपल को जलाया। उससे पहले वह तीन बार कॉलेज जाकर हंगामा कर चुका था। वह सातवें सेमिस्टर में फेल हो गया था और उसके लिए वह प्रिंसिपल को जिम्मेदार मान रहा था। तीन माह पहले उसने कॉलेज के एक कर्मचारी को मार्कशीट के चक्कर में चाकू भी मार दिया था। तब उसे सिमरोल पुलिस ने पकड़ा था, लेकिन बाद में जमानत पर छूट गया था। इसके बाद उनसे कॉलेज में रस्सी लाकर आत्महत्या करने की धमकी भी दी थी।  सात सितंबर को भी काॅलेज प्रबंधन की तरफ से एक प्रोफेसर ने शिकायत की थी। प्रोफेसर और एक कर्मचारी के साथ आशुतोष ने हाथापाई की थी और जान से मारने की धमकी दी थी। काॅलेज के स्टाॅफ की तरफ से छात्र आशुतोष को लेकर तीन बार शिकायतें हुई, लेकिन उसे अफसरों ने गंभीरता से नहीं लिया।  



पुलिस कार्रवाई करती तो जिंदा रहती प्राचार्य
इस हत्याकांड को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी ट्वीट किया। उन्होंने कहा कि प्रोफेसर की जिंदा जलाकर हत्या करने की घटना दिल दहलाने वाली है। यदि पुलिस कार्रवाई करती तो प्राचार्य शर्मा जिंदा रहती, लेकिन भाजपा शासनकाल में  महिला सुरक्षा की बात बेमानी है। 

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