IND vs SA: 35 लाख आबादी वाले शहर के लिए सिर्फ 15 हजार टिकट? अरे इंदौर के कर्णधारों! शहर को चाहिए बड़ा स्टेडियम
इंदौर में मंगलवार को भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच टी20 मैच हो रहा है। इससे पहले इंदौर नगर निगम ने एमपीसीए के दफ्तर पर छापा मारकर टिकटों की मारामारी के विवाद को नया रुख दे दिया है।
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एमपीसीए के अध्यक्ष अभिलाष खांडेकर ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर शिकायत की है। उनका कहना है कि एमपीसीए के दफ्तर में छापा मारा गया, जबकि 31 मार्च 2023 तक भुगतान करने का वक्त था। इंदौर की छवि बचाने के लिए हमें 32 लाख रुपये का भुगतान करना पड़ा। इंदौर नगर निगम ने एक अंतरराष्ट्रीय मैच से एक दिन पहले यह कार्रवाई की, जबकि मेरे संगठन ने इससे पहले कभी कोई गलती नहीं की थी। कर का भुगतान करने में कोई गलती नहीं की है। नगर निगम में युवा आईएएस अधिकारियों को कुछ पास चाहिए थे। मैंने परंपरा और शिष्टाचार के नाते निगम आयुक्त प्रतिभा पाल को 25 पास भिजवा दिए थे। इसके बाद भी यह छापेमारी आश्चर्यजनक है।
खांडेकर ने भले ही पत्र लिखकर अपनी पीड़ा व्यक्त की हो, लेकिन पीड़ा शहर के क्रिकेटप्रेमियों की भी कम नहीं है। 35 लाख की आबादी को दस हजार से भी कम टिकट उपलब्ध कराए गए। एमपीसीए के पदाधिकारी तो बताने तक को तैयार नहीं हैं कि कितने टिकट ऑनलाइन बिके हैं और कितने ऑफलाइन। टिकटों की व्यवस्था कुछ इस प्रकार रहती है कि बड़ी संख्या में पास बंट जाते हैं। फिर क्लब्स से जुड़े पदाधिकारियों और सदस्यों को टिकट जाते हैं। जो बच जाते हैं, वह ऑनलाइन बिकते हैं। इस बार टिकट ऑनलाइन हुए और कुछ ही सेकंड्स में बिक भी गए। अब टिकटों की ब्लैक मार्केटिंग शुरू हो गई है। हजारों में टिकट बिक रहे हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक कारोबारी ने तो टिकट की फोटोकॉपी कर बेचना शुरू कर दिया और लाखों रुपये कमा लिए।
बात सीधी और सच्ची है कि होलकर स्टेडियम काफी नहीं है। यह तो महारानी उषाराजे ट्रस्ट क्रिकेट मैदान था, जिसे 2010 में मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन ने होलकर स्टेडियम बना दिया। 30,000 दर्शकों की क्षमता है, लेकिन टिकट 10 हजार भी उपलब्ध नहीं होते। जाहिर है कि शहर को बड़ा स्टेडियम चाहिए। इंदौर नगर निगम के कब्जे वाला नेहरू स्टेडियम तो अब क्रिकेट मैचों में इस्तेमाल होता ही नहीं है। 2001 में वहां भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आखिरी वनडे मैच हुआ था। उसके बाद सारे मैच होलकर स्टेडियम में ही हुए हैं। अब डिमांड बढ़ रही है तो दर्शकों की क्षमता भी बढ़ाए जाने की जरूरत है।
