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Indore News: 50 लाख पौधों की जियो टैगिंग पूरी, बच्चे देख सकेंगे कैसे पेड़ बन रहे हैं उनके पौधे
Sun, 28 May 2023 02:47 PM IST
अर्जुन रिछारिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Sun, 28 May 2023 02:47 PM IST
सार
- इंदौर की एक संस्था ने पर्यावरण को बचाने के लिए अनोखी पहल, आज देशभर से लोग उसमें जुड़ रहे
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अंशिका विजयवर्गीय
- फोटो : न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
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विस्तार
हर पौधा एक बच्चे की तरह होता है जिसका पूरा ध्यान रखने की जरूरत होती है। इस प्रक्रिया में मदद करता है इंदौर की संस्था द्वारा बनाया गया एप ग्रीनजीन। इस एप ने देशभर में 50 लाख पौधों की जियो टैगिंग की है। अब लोग इस एप के माध्यम से इन पौधों को पेड़ में बदलते देख पाएंगे।
अमर उजाला से बातचीत में अंशिका विजयवर्गीय ने बताया कि हमारा एप देशभर में लोगों को पौधे लगाने और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए प्रोत्साहित करता है। जब आप पौधा लगाते हैं तो एक क्यूआर कोड की मदद से इसे हमारे एप में टैग कर लेते हैं। जब आप एप डाउनलोड करते हैं तो आपको शुरू में दस क्यूआर कोड फ्री मिलते हैं। एक बार टैगिंग होने के बाद आप हर तीन महीने में इसका रिकार्ड अपडेट कर सकते हैं और खुद भी देख सकते हैं। यह डाटा लाइफ टाइम सुरक्षित रहता है।
कैसे आया एप का विचार
अंशिका ने बताया कि हम पौधे लगाने के बाद में अक्सर उन्हें भूल जाते हैं। देखभाल के अभाव में वह पौधे पनप नहीं पाते। एक बार जब आप इस पौधे की टैगिंग कर लेते हैं तो हर तीन महीने में एप आपको रिमाइंडर भेजता है कि आप जाइए और अपने पौधे को देखकर आइए। इससे पौधा लगाने वाले इंसान का उसके साथ भावनात्मक रिश्ता बना रहता है।
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अमर उजाला से बातचीत में अंशिका विजयवर्गीय ने बताया कि हमारा एप देशभर में लोगों को पौधे लगाने और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए प्रोत्साहित करता है। जब आप पौधा लगाते हैं तो एक क्यूआर कोड की मदद से इसे हमारे एप में टैग कर लेते हैं। जब आप एप डाउनलोड करते हैं तो आपको शुरू में दस क्यूआर कोड फ्री मिलते हैं। एक बार टैगिंग होने के बाद आप हर तीन महीने में इसका रिकार्ड अपडेट कर सकते हैं और खुद भी देख सकते हैं। यह डाटा लाइफ टाइम सुरक्षित रहता है।
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कैसे आया एप का विचार
अंशिका ने बताया कि हम पौधे लगाने के बाद में अक्सर उन्हें भूल जाते हैं। देखभाल के अभाव में वह पौधे पनप नहीं पाते। एक बार जब आप इस पौधे की टैगिंग कर लेते हैं तो हर तीन महीने में एप आपको रिमाइंडर भेजता है कि आप जाइए और अपने पौधे को देखकर आइए। इससे पौधा लगाने वाले इंसान का उसके साथ भावनात्मक रिश्ता बना रहता है।
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