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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore News ›   Ganesh Chaturthi 2025: The history of Khajrana Ganesh temple of Indore is more than 250 years old

Ganesh Chaturthi 2025: क्यों कुएं में छुपाई गई थी खजराना गणेश प्रतिमा? जानिए 250 वर्ष पुराना मंदिर का इतिहास

Tue, 26 Aug 2025 12:01 PM IST
Kamlesh Sen कमलेश सेन
Updated Tue, 26 Aug 2025 12:01 PM IST
सार

इंदौर का खजराना गणेश मंदिर शहर के सबसे प्रमुख देवालयों में से एक है, जहां गणेश चतुर्थी और तिल चतुर्दशी जैसे पर्वों पर लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। लगभग 250 वर्ष पूर्व देवी अहिल्या बाई होल्कर द्वारा निर्मित यह मंदिर अब इंदौर की नगरीय सीमा में विकसित होकर भव्य तीर्थ क्षेत्र का रूप ले चुका है।

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Ganesh Chaturthi 2025: The history of Khajrana Ganesh temple of Indore is more than 250 years old
खजराना गणेश मंदिर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शहर के देवालयों और आस्था के प्रमुख केंद्रों में खजराना गणेश मंदिर अग्रणी है। यहां भक्तों की सर्वाधिक भीड़ रहती है। बुधवार से शुरू हो रहे गणेश चतुर्थी के दस दिनी महोत्सव के दौरान यहां लाखों भक्त आएंगे। मंदिर के इतिहास की बात करें तो यह 250 से ज्यादा वर्ष पुराना है। महारानी देवी अहिल्या के कार्यकाल के दौरान यह मंदिर बनवाया गया था, जो अब इंदौर का भव्य और सिद्ध तीर्थ क्षेत्र बन चुका है।

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किसी समय खजराना गणेश मंदिर इंदौर शहर से कुछ दूरी पर स्थित एक गांव में था। विकास और नगर के विस्तार से यह अब इंदौर की नगरीय सीमा में आ गया है। खजराना मंदिर के साथ ही आसपास के क्षेत्र का भी समुचित विकास किया गया है। मंदिर के विकास और विस्तार का कार्य लगातार जारी हैं।
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आईने अकबरी में खजराना गांव का जिक्र
इंदौर शहर से कुछ दूरी पर स्थित खजराना गांव का उल्लेख ''आईना-ए-अकबरी'' (अबुल फजल द्वारा फारसी में लिखित इस ग्रंथ में अकबर के कार्यकाल की राजकीय व्यवस्था का उल्लेख है) भी किया गया है। दरअसल, खजराना ग्राम में एक छोटी सी टेकरी पर गणेश मंदिर स्थित था। इसका निर्माण देवी अहिल्या बाई होल्कर के कार्यकाल (1767-1795) में होना उल्लेखित है। मंदिर की देखरेख और व्यवस्था के संचालन के लिए भूमि दान दी गई थी। ग्राम खजराना की जागीर महाराजा शिवाजीराव होल्कर ने अपनी द्वितीय पुत्री सविताबाई को दी थी।
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भट्ट परिवार दशकों से कर रहा पूजा
ऐसी मान्यता है कि क्रूर मुगलशासक औरंगजेब से रक्षा के लिए खजराना गणेश जी की मूर्ति कुएं में छिपा दी गई थी। इसे बाद में किसी होल्कर राजा द्वारा निकलवाया गया और देवी अहिल्या बाई होल्कर द्वारा मंदिर में प्रतिष्ठित करवाया गया था। मंदिर की व्यवस्था की देखरेख भट्ट परिवार दशकों से कर रहा है।


प्राचीन गजेटियर में उल्लेख
होल्कर राज्य का प्रथम प्रामाणिक ग्रंथ कैप्टन सी. ई. लुआर्ड द्वारा इंदौर स्टेट जिला गजेटियर 1908 में प्रकशित किया गया था। गजेटियर के अनुसार 1901 में हुई जनगणना में खजराना गांव की जनसंख्या 1321 थी। इस गजेटियर में गणेश मंदिर का विवरण भी दर्ज है। 1931 में एल. सी. धारीवाल का इंदौर स्टेट गजेटियर प्रथम खंड अनुसार खजराना ग्राम की 1921 की जनगणना में आबादी 1151 बताई गई है। 2011 की जनगणना अनुसार करीब 75 हजार आबादी हो गई है। हालांकि, पूरे इलाके में अब काफी घनी बसाहट हो चुकी है और गांव व आसपास की आबादी लाखों में पहुंच गई है।

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तीर्थ क्षेत्र के रूप में विकसित हुआ मंदिर

खजराना गणेश मंदिर परिसर का काफी विकास हुआ है। मंदिर प्रबंध समिति द्वारा और जनसहयोग से कई कार्य किए गए हैं। यहां तिल चतुर्दशी और गणेश चतुर्दशी पर विशेष आयोजन होते हैं। नव वर्ष के दिन, हर बुधवार और विशेष पर्वों के अवसर पर मंदिर में श्रदालुओं की अधिक भीड़ रहती है। यहां भगवान गणेश को प्रिय मोदक और बूंदी के लड्डुओं का भोग लगता है और यहां निर्मित प्रसादालय में नाम मात्र की राशि पर भोजन मिलता है। खजराना गणेश मंदिर अब भव्य तीर्थ क्षेत्र का रूप ले चुका है।

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