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Indore News: नारी सशक्तिकरण के लिए महिला आरक्षण आवश्यक, शहर की बुद्धिजीवी महिलाओं ने किया समर्थन
Sun, 18 Jun 2023 09:46 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sun, 18 Jun 2023 09:46 PM IST
सार
इंदौर शहर की बुद्धिजीवी महिलाओं ने महिला आरक्षण के समर्थन में आवाज बुलंद की है। उनका मानना है कि इस आरक्षण के माध्यम से महिलाओं को फैसला लेने की प्रक्रिया में सहभागी बनाया जा सकेगा।
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इंदौर में महिला आरक्षण पर परिचर्चा हुई।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
इंदौर शहर की बुद्धिजीवी महिलाओं ने महिला आरक्षण के समर्थन में आवाज बुलंद की है। उनका मानना है कि इस आरक्षण के माध्यम से महिलाओं को फैसला लेने की प्रक्रिया में सहभागी बनाया जा सकेगा। बता दें डेवलपमेंट फाउंडेशन के बैनर तले आयोजित परिचर्चा में महिलाओं ने अपने विचार रखे।
उन्होंने कहा कि देश में महिला सशक्तिकरण की बातें तो बहुत करते हैं लेकिन उस दिशा में कोई सार्थक पहल नहीं की जाती। यदि हम हकीकत में महिलाओं का सशक्तिकरण चाहते हैं तो यह आवश्यक है कि महिला आरक्षण विधेयक को तत्काल मंजूर कर लागू किया जाए। आयोजन की शुरुआत में फाउंडेशन के ट्रस्टी आलोक खरे ने इस आयोजन के मकसद पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संसद में पिछले 20 सालों से महिला आरक्षण विधेयक लंबित पड़ा हुआ है। अब आवश्यक है कि इस विधेयक के बारे में नीति निर्धारकों द्वारा अंतिम फैसला लिया जाए। फाउंडेशन के अध्यक्ष मुकुंद कुलकर्णी ने कहा कि जब पंचायत और नगर निगम में महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था है तो फिर विधानसभा और लोकसभा में क्यों नहीं है? यह सबसे बड़ा प्रश्न है।
परिचर्चा को संबोधित करते हुए पूर्व कुलपति डॉ. निशा दुबे ने कहा कि महिला आरक्षण का मामला वर्ष 1996 से चल रहा है। पहली बार देवगौड़ा सरकार के कार्यकाल में यह विधेयक चर्चा में आया था। यदि हमें महिलाओं का सशक्तिकरण चाहिए तो उसके लिए महिला आरक्षण की व्यवस्था को लागू करना बहुत जरूरी है। वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय की डॉ. कविता शर्मा ने कहा कि समाज की स्थापना के लिए महिला सशक्तिकरण के साथ महिला आरक्षण जरूरी है। इस आरक्षण के माध्यम से हम महिलाओं को समान अवसर देते हुए फैसला लेने में सहभागी बना सकते हैं। मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर पुनम माथुर ने कहा कि हमारे संविधान में मौलिक अधिकार दिए गए हैं। उसके बावजूद महिलाओं के साथ भेदभाव हो रहा है। गुजराती कन्या महाविद्यालय की डॉ. निहार गीते ने कहा कि सरकार द्वारा महिलाओं के लिए बहुत सारी योजनाएं और कानून बनाए गए, लेकिन उनका हश्र क्या हुआ? पर्यावरणविद डॉ. जयश्री सिक्का ने कहा कि देश में राजनीति की जो स्थिति है वह महिलाओं को इस बात के लिए मजबूर करती है कि वह इस क्षेत्र की तरफ नहीं जाएं। यही कारण है कि अच्छे लोग राजनीति में जाना पसंद नहीं करते हैं।
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कार्यक्रम में समाज सेविका मेघा बर्वे, शिक्षाविद अनीता आहुजा, डॉ अर्चना श्रीवास्तव, समाजसेवी ऐनी पंवार, केके कॉलेज की प्राचार्य डॉक्टर संगीता भरूका, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ सोशल वर्क की विभागाध्यक्ष डॉ. रेखा आचार्य, शिक्षाविद अरवा शाकिर, शिक्षाविद डॉ. रंजना सहगल, शिक्षाविद डॉक्टर क्षमा पेंडरकर, शिक्षाविद डॉ. तरनजीत सूद, वैष्णव बाल मंदिर की प्राचार्य आभा जोहरी, कमला नेहरू गर्ल्स स्कूल की प्राचार्य वैशाली खरे, शिक्षाविद डॉ. सुमन ज्ञानी, शिक्षाविद डॉ. शोभा वेद ने भी संबोधित किया। आयोजन की समन्वयक प्राची परिहार, अमिता वर्मा व प्रीति जोशी ने बताया कि इस आयोजन में सभी बुद्धिजीवी महिलाओं द्वारा महिला आरक्षण विधेयक पर तीन घंटे का चिंतन-मनन किया गया। रामेश्वर गुप्ता ने आभार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर शफी शेख और श्याम पांडे भी उपस्थित थे।
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उन्होंने कहा कि देश में महिला सशक्तिकरण की बातें तो बहुत करते हैं लेकिन उस दिशा में कोई सार्थक पहल नहीं की जाती। यदि हम हकीकत में महिलाओं का सशक्तिकरण चाहते हैं तो यह आवश्यक है कि महिला आरक्षण विधेयक को तत्काल मंजूर कर लागू किया जाए। आयोजन की शुरुआत में फाउंडेशन के ट्रस्टी आलोक खरे ने इस आयोजन के मकसद पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संसद में पिछले 20 सालों से महिला आरक्षण विधेयक लंबित पड़ा हुआ है। अब आवश्यक है कि इस विधेयक के बारे में नीति निर्धारकों द्वारा अंतिम फैसला लिया जाए। फाउंडेशन के अध्यक्ष मुकुंद कुलकर्णी ने कहा कि जब पंचायत और नगर निगम में महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था है तो फिर विधानसभा और लोकसभा में क्यों नहीं है? यह सबसे बड़ा प्रश्न है।
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परिचर्चा को संबोधित करते हुए पूर्व कुलपति डॉ. निशा दुबे ने कहा कि महिला आरक्षण का मामला वर्ष 1996 से चल रहा है। पहली बार देवगौड़ा सरकार के कार्यकाल में यह विधेयक चर्चा में आया था। यदि हमें महिलाओं का सशक्तिकरण चाहिए तो उसके लिए महिला आरक्षण की व्यवस्था को लागू करना बहुत जरूरी है। वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय की डॉ. कविता शर्मा ने कहा कि समाज की स्थापना के लिए महिला सशक्तिकरण के साथ महिला आरक्षण जरूरी है। इस आरक्षण के माध्यम से हम महिलाओं को समान अवसर देते हुए फैसला लेने में सहभागी बना सकते हैं। मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर पुनम माथुर ने कहा कि हमारे संविधान में मौलिक अधिकार दिए गए हैं। उसके बावजूद महिलाओं के साथ भेदभाव हो रहा है। गुजराती कन्या महाविद्यालय की डॉ. निहार गीते ने कहा कि सरकार द्वारा महिलाओं के लिए बहुत सारी योजनाएं और कानून बनाए गए, लेकिन उनका हश्र क्या हुआ? पर्यावरणविद डॉ. जयश्री सिक्का ने कहा कि देश में राजनीति की जो स्थिति है वह महिलाओं को इस बात के लिए मजबूर करती है कि वह इस क्षेत्र की तरफ नहीं जाएं। यही कारण है कि अच्छे लोग राजनीति में जाना पसंद नहीं करते हैं।
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कार्यक्रम में समाज सेविका मेघा बर्वे, शिक्षाविद अनीता आहुजा, डॉ अर्चना श्रीवास्तव, समाजसेवी ऐनी पंवार, केके कॉलेज की प्राचार्य डॉक्टर संगीता भरूका, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ सोशल वर्क की विभागाध्यक्ष डॉ. रेखा आचार्य, शिक्षाविद अरवा शाकिर, शिक्षाविद डॉ. रंजना सहगल, शिक्षाविद डॉक्टर क्षमा पेंडरकर, शिक्षाविद डॉ. तरनजीत सूद, वैष्णव बाल मंदिर की प्राचार्य आभा जोहरी, कमला नेहरू गर्ल्स स्कूल की प्राचार्य वैशाली खरे, शिक्षाविद डॉ. सुमन ज्ञानी, शिक्षाविद डॉ. शोभा वेद ने भी संबोधित किया। आयोजन की समन्वयक प्राची परिहार, अमिता वर्मा व प्रीति जोशी ने बताया कि इस आयोजन में सभी बुद्धिजीवी महिलाओं द्वारा महिला आरक्षण विधेयक पर तीन घंटे का चिंतन-मनन किया गया। रामेश्वर गुप्ता ने आभार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर शफी शेख और श्याम पांडे भी उपस्थित थे।
