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Digital Frauds: बैंक अधिकारी से 39.60 लाख रुपए ठगे, मुंबई पुलिस के नाम से आया था फोन
Fri, 09 Aug 2024 09:02 PM IST
अर्जुन रिछारिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Fri, 09 Aug 2024 09:02 PM IST
सार
ईडी के नाम पर ऑनलाइन ठगी का शिकार बने रिटायर्ड बैंक अधिकारी, साइबर ठगों ने एक महीने पहले बेवकूफ बनाया, अब केस दर्ज हुआ
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cyber crime
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इंदौर के महालक्ष्मी नगर में रहने वाले एक रिटायर्ड बैंक अधिकारी राकेश कुमार गोयल के साथ एक सनसनीखेज ठगी का मामला सामने आया है। बदमाशों ने उन्हें डिजिटल तरीके से गिरफ्तार करने का झांसा देकर उनसे 39.60 लाख रुपये की ठगी की।
पुलिस के अनुसार, घटना 11 जुलाई की है। राकेश कुमार गोयल को एक फोन आया, जिसमें खुद को मुंबई के अंधेरी थाने का जवान बताने वाले व्यक्ति ने उन्हें बताया कि उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का वारंट जारी हुआ है। इसके बाद कॉल को ईडी ऑफिस में ट्रांसफर कर दिया गया। बाद में, गोयल से संपर्क कर उन्हें बताया गया कि उनके नाम से एक बैंक अकाउंट खोला गया है, जिसका इस्तेमाल 8 करोड़ 20 लाख रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग में किया गया है। यह पैसा बच्चों की तस्करी में इस्तेमाल हुआ है। बदमाशों ने उन्हें डराते हुए कहा कि उनके और एक अपराधी के बीच कॉन्ट्रैक्ट हुआ है और उन्हें 82 लाख रुपये दिए जाएंगे।
स्काइप एप डाउनलोड करवाया
इसके बाद, बदमाशों ने गोयल के मोबाइल पर स्काइप एप डाउनलोड कराया और उन्हें एक प्रेस कॉन्फ्रेंस दिखाई, जिसमें दो व्यक्ति दिख रहे थे। तीसरे व्यक्ति को लाकर उन्हें बताया गया कि उनके घर से मिली बैंक पासबुक के आधार पर उनके नाम से 8 करोड़ 20 लाख रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग का पता चला है। बदमाशों ने गोयल को डरा-धमका कर उनके एसबीआई के अकाउंट से 21 लाख रुपये न्यू इंडिया कंपनी के अकाउंट में ट्रांसफर करा लिए। इसके बाद भी धमकियां जारी रहीं और अगले दिन पत्नी के अकाउंट से भी 18 लाख रुपये निकलवाकर डीपीडी एसोसिएट के खाते में ट्रांसफर करा लिया गया। इसके अलावा, गोयल के अकाउंट से और 60 हजार रुपये मेजीगो टेक प्रा.लि. के अकाउंट में डाले गए।
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ईडी के नाम से डराया
बदमाशों ने पूरी घटना के दौरान गोयल पर स्काइप एप के जरिए नजर रखी और उन्हें लगातार डराया-धमकाया। उन्होंने ईडी के नाम का भी इस्तेमाल किया और कहा कि अगर उन्होंने किसी को बताया तो बच्चों की तस्करी में उनका नाम आ सकता है। जब गोयल को शक हुआ तो उन्होंने अपने डीएसपी दोस्त से संपर्क किया, जिसके बाद उन्हें पता चला कि उनके साथ ठगी हुई है। उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। लसूड़िया पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। यह घटना इंदौर में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला है और लोगों को ऐसे ठगों से सावधान रहने की जरूरत है।
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पुलिस के अनुसार, घटना 11 जुलाई की है। राकेश कुमार गोयल को एक फोन आया, जिसमें खुद को मुंबई के अंधेरी थाने का जवान बताने वाले व्यक्ति ने उन्हें बताया कि उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का वारंट जारी हुआ है। इसके बाद कॉल को ईडी ऑफिस में ट्रांसफर कर दिया गया। बाद में, गोयल से संपर्क कर उन्हें बताया गया कि उनके नाम से एक बैंक अकाउंट खोला गया है, जिसका इस्तेमाल 8 करोड़ 20 लाख रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग में किया गया है। यह पैसा बच्चों की तस्करी में इस्तेमाल हुआ है। बदमाशों ने उन्हें डराते हुए कहा कि उनके और एक अपराधी के बीच कॉन्ट्रैक्ट हुआ है और उन्हें 82 लाख रुपये दिए जाएंगे।
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स्काइप एप डाउनलोड करवाया
इसके बाद, बदमाशों ने गोयल के मोबाइल पर स्काइप एप डाउनलोड कराया और उन्हें एक प्रेस कॉन्फ्रेंस दिखाई, जिसमें दो व्यक्ति दिख रहे थे। तीसरे व्यक्ति को लाकर उन्हें बताया गया कि उनके घर से मिली बैंक पासबुक के आधार पर उनके नाम से 8 करोड़ 20 लाख रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग का पता चला है। बदमाशों ने गोयल को डरा-धमका कर उनके एसबीआई के अकाउंट से 21 लाख रुपये न्यू इंडिया कंपनी के अकाउंट में ट्रांसफर करा लिए। इसके बाद भी धमकियां जारी रहीं और अगले दिन पत्नी के अकाउंट से भी 18 लाख रुपये निकलवाकर डीपीडी एसोसिएट के खाते में ट्रांसफर करा लिया गया। इसके अलावा, गोयल के अकाउंट से और 60 हजार रुपये मेजीगो टेक प्रा.लि. के अकाउंट में डाले गए।
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ईडी के नाम से डराया
बदमाशों ने पूरी घटना के दौरान गोयल पर स्काइप एप के जरिए नजर रखी और उन्हें लगातार डराया-धमकाया। उन्होंने ईडी के नाम का भी इस्तेमाल किया और कहा कि अगर उन्होंने किसी को बताया तो बच्चों की तस्करी में उनका नाम आ सकता है। जब गोयल को शक हुआ तो उन्होंने अपने डीएसपी दोस्त से संपर्क किया, जिसके बाद उन्हें पता चला कि उनके साथ ठगी हुई है। उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। लसूड़िया पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। यह घटना इंदौर में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला है और लोगों को ऐसे ठगों से सावधान रहने की जरूरत है।
