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Dhar Bhojshala: भोजशाला केस में HC में हंगामा, मुस्लिम पक्ष बोला- एएसआई रिपोर्ट भरोसे लायक नहीं, आज अंतिम बहस

Tue, 12 May 2026 06:01 AM IST
Abhishek Chendke न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Abhishek Chendke Updated Tue, 12 May 2026 06:01 AM IST
सार

इंदौर हाईकोर्ट में भोजशाला- कमाल मौला मस्जिद विवाद मामले में अहम सुनवाई हुई, जिसमें मुस्लिम पक्ष ने ASI की सर्वे रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाए। वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद और शोभा मेनन ने रिपोर्ट को पक्षपातपूर्ण बताते हुए कहा कि सर्वे में कई प्रक्रियात्मक खामियां रहीं और रिपोर्ट के निष्कर्षों का कोई कानूनी आधार नहीं है।

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Dhar Bhojshala: Final debate in Bhojshala case today, Muslim side raises questions on ASI survey
भोजशाला विवाद पर हाईकोर्ट में आज होगी अहम सुनवाई - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भोजशाला- कमाल मौला मस्जिद विवाद मामले में सोमवार को इंदौर हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद और शोभा मेनन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पैरवी करते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सर्वे रिपोर्ट पर कई गंभीर सवाल उठाए। मामले में मंगलवार को अंतिम बहस होगी।

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2022 में दायर हुई थी याचिका

भोजशाला मामले में वर्ष 2022 में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने याचिका दायर कर भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करने और परिसर का अधिपत्य हिंदू समाज को सौंपने की मांग की थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने ASI को वैज्ञानिक सर्वे कराने के निर्देश दिए थे। बाद में अन्य पक्षकार भी इस मामले में शामिल हुए।

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मुस्लिम पक्ष ने रिपोर्ट को बताया ‘पक्षपातपूर्ण’

धार की मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी की ओर से पेश वकीलों ने कोर्ट में कहा कि ASI ने अपनी पूरी रिपोर्ट में “भोजशाला मंदिर” शब्द का इस्तेमाल किया, जबकि ऐसा साबित करने वाला कोई ऐतिहासिक प्रमाण मौजूद नहीं है। मुस्लिम पक्ष ने आरोप लगाया कि ASI की रिपोर्ट हिंदू पक्ष के दावों को मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार की गई और इसके निष्कर्षों का कोई कानूनी आधार नहीं है।

मंदिर, मस्जिद या जैन शाला? सवाल अब भी बरकरार

सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने कहा कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि विवादित परिसर मंदिर है, मस्जिद है या जैन शाला। उनका कहना था कि यदि यह मंदिर होता तो वहां मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होती, जबकि परिसर में ऐसी कोई स्थिति नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि परिसर के स्वामित्व का फैसला सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है।

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वीडियोग्राफी और तस्वीरों पर भी उठे सवाल

वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने कहा कि ASI द्वारा उपलब्ध कराई गई वीडियोग्राफी स्पष्ट नहीं थी और रंगीन तस्वीरें भी उपलब्ध नहीं कराई गईं। उन्होंने कहा कि कई वीडियो क्लिप 45 सेकंड से भी कम समय की थीं। उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या मामले में रामलला की मूर्ति स्थापित थी, जबकि यहां किसी प्रकार की मूर्ति मौजूद नहीं है।

सर्वे प्रक्रिया पर भी आपत्ति

मुस्लिम पक्ष ने आरोप लगाया कि सर्वे दोनों पक्षों की मौजूदगी में होना था, लेकिन उन्हें कोई औपचारिक सूचना नहीं दी गई। उन्हें सिर्फ सोशल मीडिया के जरिए जानकारी मिली। वकीलों ने कहा कि सर्वे एक साथ कई जगहों पर किया गया, जिससे सभी स्थानों पर पक्षकारों की उपस्थिति संभव नहीं हो सकी।

गौतम बुद्ध की मूर्ति मिलने का दावा

सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने दावा किया कि सर्वे के दौरान गौतम बुद्ध की एक प्रतिमा मिली थी, लेकिन उसका उल्लेख ASI रिपोर्ट में नहीं किया गया। इसे रिपोर्ट की बड़ी त्रुटि बताया गया।

खुदाई और कार्बन डेटिंग को लेकर भी सवाल

सलमान खुर्शीद ने कोर्ट में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने विवादित परिसर का स्वरूप बदले बिना सर्वे करने को कहा था, लेकिन इसके बावजूद ASI ने परिसर में खुदाई की। उन्होंने कहा कि ASI ने दावा किया कि एक स्लैब के नीचे कई पुरावशेष मिले, लेकिन वीडियो में वहां कागज, प्लास्टिक की बोतलें और कप भी दिखाई दे रहे थे। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि “13वीं-14वीं सदी में प्लास्टिक का आविष्कार नहीं हुआ था।”

उन्होंने यह भी कहा कि बरामद वस्तुएं साफ हालत में थीं और उन पर मिट्टी तक नहीं लगी थी। अगर वे सदियों से जमीन के अंदर दबी होतीं, तो उन पर मिट्टी जरूर होती। मुस्लिम पक्ष ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट ने कार्बन डेटिंग के निर्देश दिए थे, लेकिन ASI ने यह प्रक्रिया नहीं कराई।

हिंदू पक्ष का दावा

हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस का दावा है कि भोजशाला मूल रूप से मां सरस्वती का मंदिर था, जिसे परमार वंश के राजा भोज ने 1034 में बनवाया था। उनका आरोप है कि 1305 में अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के दौरान मंदिर को तोड़कर वहां कमाल मौला मस्जिद बनाई गई।

ASI रिपोर्ट में क्या कहा गया

ASI ने 22 मार्च 2024 से भोजशाला परिसर का सर्वे शुरू किया था। 98 दिनों तक चले सर्वे के बाद 15 जुलाई 2024 को 2000 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की गई। रिपोर्ट में दावा किया गया कि परिसर में परमार राजाओं के काल की विशाल संरचना के अवशेष मिले हैं और वर्तमान ढांचा मंदिरों के अवशेषों से बनाया गया है।

मंगलवार को फिर होगी सुनवाई

हाईकोर्ट में इस मामले से जुड़ी पांच याचिकाओं और एक रिट अपील पर लगातार सुनवाई चल रही है। अब मंगलवार को इस मामले में अंतिम बहस होगी, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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