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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Dewas News ›   Dewas Loksabha Constituency: The party which divided Dewas Lok Sabha seat and castes, its path was easy.

Dewas Loksabha Constituency: देवास लोकसभा सीट पर जिस दल ने जातियों को साधा, उसकी राह रही आसान

Fri, 22 Mar 2024 08:56 PM IST
Abhishek Chendke अभिषेक चेंडके
Updated Fri, 22 Mar 2024 08:56 PM IST
सार

देवास-शााजापुर सीट पर दूसरे शहर में रहने वाले नेताओं को भी जनता ने संसद तक भेजा। वर्ष 2009 में सज्जन सिंह वर्मा सांसद बने, जो इंदौर के निवासी हैं। इसके अलाव मनोहर ऊंटवाल भी यहां से सांसद चुने गए थे, वे भी लोकसभा क्षेत्र के निवासी नहीं थे।

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Dewas Loksabha Constituency: The party which divided Dewas Lok Sabha seat and castes, its path was easy.
देवास के कांग्रेस और भाजपा उम्मीदवार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मां चामुंडा देवी की भक्ति के लिए प्रसिद्ध देवास नगरी राजनीतिक रूप से भी मायने रखती है। देवास क्षेत्र को आरएसएस का गढ़ माना जाता है, लेकिन इस संसदीय क्षेत्र की जनता किसी एक दल की होकर नहीं रही। वर्ष 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई इस सीट के पहले सांसद कांग्रेस नेता व पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा रहे। इसके बाद भाजपा के दो सांसदों ने इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।

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पहले शाजापुर संसदीय क्षेत्र कहलाती थी
परिसीमन के पहले यह शाजापुर संसदीय क्षेत्र कहलाता था। तब भी जनसंघ, जनता पार्टी और कांग्रेस के उम्मीदवार जीते। इस सीट पर बलाई, खटीक समाज का वोट बैंक निर्णायक माना जाता है। जो दल जातियों को साधकर चुनाव लड़ता है, उसकी चुनावी राह ज्यादा आसान मानी जाती है। इस बार भी भाजपा और कांग्रेस ने बलाई समाज के खाते में टिकट बांटे हैं। पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राधा किशन मालवीय के बेटे राजेंद्र मालवीय को इस बार कांग्रेस ने यहां से टिकट दिया है। वे बलाई समाज से आते हैं, उधर भाजपा ने दोबारा महेंद्र सोलंकी को टिकट दिया है। सोलंकी भी बलाई समाज से हैं।
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पैराशूट उम्मीदवारों को मिला मौका
देवास-शााजापुर संसदीय सीट पर दूसरे शहर में रहने वाले नेताओं को भी यहां की जनता ने संसद तक भेजा है। यहां से वर्ष 2009 में सज्जन सिंह वर्मा सांसद बने, जो इंदौर के निवासी हैं। इसके अलावा मनोहर ऊंटवाल भी यहां से सांसद चुने गए थे, वे भी लोकसभा क्षेत्र के निवासी नहीं थे। परिसीमन से पहले फूलचंद वर्मा और थावरचंद्र गहलोत भी यहां से सांसद रहे। वर्मा भी इंदौर के निवासी रहे हैं और गेहलोत उज्जैन जिले के नागदा क्षेत्र में रहते हैं। मौजूदा सांसद महेंद्र सिंह सोलंकी देवास संसदीय क्षेत्र के ही निवासी हैं। 1984 में चुनाव जीते बापूलाल मालवीय भी शाजापुर संसदीय क्षेत्र के निवासी रहे हैं।
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भाजपा उम्मीदवार महेंद्र सिंह सोलंकी की ताकत

  1. बलाई समाज से आते हैं और क्षेत्र में समाज का वोटबैंक ज्यादा है।
  2. भाजपा का परंपरागत वोटबैंक और संघ का नेटवर्क मददगार


कमजोरी

  • चुनाव में दूसरी बार मौका मिला है। एंटी इंकम्बेंसी फैक्टर का खतरा
  • देवास को कोई बड़ी सौगात नहीं दिला पाए। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बड़ा संकट


कांग्रेस उम्मीदवार राजेंद्र मालवीय की ताकत

  1. पिता राधाकिशन मालवीय का क्षेत्र में अच्छा नेटवर्क रहा है। ये भी बलाई समाज से आते हैं।
  2. कांग्रेस का नया चेहरा है, पटवारी के प्रदेशाध्यक्ष बनने से खाती समाज भी कर सकता है मदद


कमजोरी

  • चुनावी मैनेजमेंट में कमजोर, कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक कम
  • विधानसभा चुनाव में क्षेत्र से कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली।
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