Indore:पानी की टंकी में मिला मलबा और गाद, कई महीनों से नहीं हुई थी टंकी साफ, पार्षद खुद चढ़ गए टंकी पर
चार एमएलडी की क्षमता वाली सुखलिया ग्राम पानी की टंकी कई महीनों बाद साफ हो पाई। पार्षद राजू भदौरिया खुद नगर निगम कर्मचारियों के साथ पानी की टंकी पर चढ़ गए। उन्होंने टंकी में झांक कर देखा तो भीतर गाद और मलबा था।
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इंदौर के कई क्षेत्रों में गंदे पानी की समस्या है। नगर निगम के सम्मेलन में कांग्रेस पार्षदों के साथ भाजपा पार्षदों ने भी गंदे पानी का मुद्दा उठाया। सुखलिया ग्राम केे एक पार्षद तो गंदे पानी की समस्या जानने खुद 100 फीट पानी की टंकी पर चढ़ गए।टंकी में मलबा और गाद के अलावा गंदगी भी थी। इसके बाद पार्षद ने नगर निगम की टीम के साथ टंकी साफ कराई, ताकि वार्ड मेें गंदा पानी सप्लाई न हो।चार एमएलडी की क्षमता वाली सुखलिया ग्राम पानी की टंकी कई महीनों बाद साफ हो पाई।
पार्षद राजू भदौरिया खुद नगर निगम कर्मचारियों के साथ पानी की टंकी पर चढ़ गए। उन्होंने टंकी में झांक कर देखा तो भीतर गाद और मलबा था। टंकी के भीतर कर्मचारी भेजे गए और गाद व मलबा निकाला गया। पार्षद ने बताया कि टंकी के भीतर की छत की प्लास्टर भी उखड़कर टंकी में गिर रहा है। उसका मलबा भी टंकी में है। टंकी पूरी तरह साफ कराई गई है। अब साफ पानी मिलेगा।
पानी की टंकी में मिल चुकी है लाश
इंदौर की सुभाष चौक पानी की टंकी में 15 साल पहले एक लाश भी निकल चुकी है। टंकी में पड़ी लाश सड़ चुकी थी और कई दिनों तक उसी टंकी का पानी 40 से ज्यादा काॅलोनियों के लोग पीते रहे। जब कर्मचारी सफाई करने पहुंचे थे तो उन्हें टंकी में लाश दिखाई दी थी।
तीन माह मेें होती है सफाई
नर्मदा प्रोजेक्ट के कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव का कहना है कि शहर में 40 से ज्यादा टंकियां हैै। उनकी सफाई का जिम्मा एक एजेंसी को दिया गया है। हर तीन माह में टंकी साफ होती है। सफाई के बाद टंकी में क्लोरिन मिलाई जाती है।
