Indore: कुछ विधायकों को दूसरे विधानसभा क्षेत्रों में भेजकर चुनाव लड़ा सकती है कांग्रेस
इंदौर में बीते 30 सालों से कांग्रेस को ज्यादा सीटें नहीं मिली है। दो या तीन सीट ही कांग्रेस जीत पाती हैै। पिछले चुनाव में देपालपुर, एक नंबर विधानसभा व राऊ सीट कांग्रेस ने जीती थी। इस बार इंदौर की सीटों का जिम्मा दिग्विजय सिंह को दिया गया है।
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कोई भी चुनाव रहे। कांग्रेस में आखिरी वक्त तक टिकट को लेकर उठा पठक चलती है, लेकिन इस बार मध्य प्रदेश में टिकट चयन रणनीतिकार ‘ठंडे दिमाग’ से करेंगे। सर्वे के आधार दावेदारों का दांवा तो मजबूत माना ही जाएगा। कमल नाथ यह विकल्प भी देख रहे है कि कौन से विधायक और पूर्व विधायकों को दूसरे विधानसभा क्षेत्र से टिकट देकर चुनाव ज्यादा सीटें लाई जा सकती है। दरअसल कई सीटों पर दमदार उम्मीदवार पार्टी को नहीं मिलते और कुछ सीटेें ऐसी भी होती है, जहां एक से ज्यादा मजबूत दावेदार होते है।
एक ही सीट से दूसरी बार विधायकों को टिकट देने पर हार का खतरा भी रहता है। इसे देखते हुए सीट बदल कर चुनाव लड़ाने के प्रयोग को कांग्रेस अमल में लाएगी। कमल नाथ ने इंदौर यात्रा के दौरान कहा कि उम्मीदवार चयन को लेकर इस बार ज्यादा सर्तकता बरती जाएगी और नए चेहरों को ज्यादा मौका मिलेगा।
इंदौर तो अपनी अलग दुनिया में है
इंदौर में बीते 30 सालों से कांग्रेस को ज्यादा सीटें नहीं मिली है। दो या तीन सीट ही कांग्रेस जीत पाती हैै। पिछले चुनाव में देपालपुर, एक नंबर विधानसभा और राऊ सीट कांग्रेस ने जीती थी। इस बार इंदौर की सीटों का जिम्मा दिग्विजय सिंह को दिया गया है। वे जल्दी ही हर सीट का दौरा करेंगे, हालांकि इंदौर में संगठन भी कमजोर है और मंडलम सेक्टर का ढांचा भी खड़ा नहीं हो पाया। इसे लेकर कमल नाथ भी खुश नहीं है।
गुरुवार को इंदौर यात्रा के दौरान तो उन्होंने यह कह दिया कि इंदौर की बात छोडि़ए, इंदौर तो अपनी एक अलग दुनिया में हैै। कमल नाथ इंदौर के अध्यक्ष पद को लेकर भी फैसला नहीं ले पा रहे है। उधर मालवा निमाड़ की 66 सीटों में उम्मीदवारों के चयन को लेकर भी नाथ का दखल रहेगा। वे खुद 30 सीटों का फीडबैक ले चुके है। मालवा निमाड़ की सीटों को लेकर नाथ ने सर्वे भी कराया है, जो पूरा हो चुका है।
