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Atal ji Indore memories: इंदौर के इस स्वाद के अटल जी थे दीवाने, जब भी आए जरूर लिया आनंद
Wed, 25 Dec 2024 08:06 AM IST
अर्पित याज्ञनिक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अर्पित याज्ञनिक
Updated Wed, 25 Dec 2024 08:06 AM IST
सार
'केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट' शिलान्यास के मौके पर इंदौर में एक बार फिर से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी की यादें ताजा हो गई हैं। अटल जी का इंदौर से गहरा भावनात्मक जुड़ाव था। उनकी भतीजी माला तिवारी इंदौर में रहती थीं, और वे अक्सर उनके घर आते थे।
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अटल जी को पसंद था इंदौर का स्वाद।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई की महत्वकांक्षी परियोजना 'नदी जोड़ो अभियान' की शुरुआत के लिए 25 दिसंबर का दिन तय किया गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि 25 दिसंबर अटल जी का जन्मदिवस है। उनके जन्मदिवस के मौके पर मध्य प्रदेश में 'केन-बेतवा नदी जोड़ो प्रोजेक्ट' का शिलान्यास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करने जा रहे हैं। अटल जी का इंदौर से भी खास नाता रहा है। वे अक्सर इंदौर आते थे।
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अटल जी जब प्रधानमंत्री थे उस दौरान उनका अक्सर इंदौर आना होता था। इंदौर में अटल जी की भतीजी माला तिवारी भी रहती हैं। 1977 में वे विवाह के बाद विदा होकर इंदौर आई थीं। अटल जी जब भी इंदौर आते थे अपनी भतीजी के यहां जाते थे।
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आरामकुर्सी पर करते थे चिंतन
एक बार प्रधानमंत्री पद पर होने के कारण प्रोटोकाल की वजह से वे इंदौर आने के बाद भी घर नहीं जा सके तो उन्होंने परिजनों को रेसीडेंसी कोठी बुलवा लिया था। देर तक उनके साथ बातें कीं। माला बताती हैं कि अटल जी जब भी घर आते थे तो आरामकुर्सी पर आंख मूंद कर बैठ जाते थे और चिंतन करते थे। घर का खाना और चाय के साथ मठरी उन्हें पसंद थी।
इंदौर की नमकीन और कचौरी बेहद पसंद
इसके अलावा इंदौर की नमकीन और कचौरी भी बेहद पसंद थीं। वे यहां आते तो इंदौर की कचौरी का स्वाद लिए बिना नहीं जाते थे। माला बताती हैं कि सत्यनारायण सत्तन जब विधायक बने तब अटल जी इंदौर आए थे। उन्होंने मेरे घर पर सत्तन के साथ नारायण राव धर्म और राजेंद्र धारकर को खाने पर बुलाया था और देर शाम तक गप्पे लड़ाए थे।
कविता की गलत लाइन पर डांटा था सत्तन को
कवि और पूर्व विधायक सत्यनारायण सत्तन बताते हैं कि आरएसएस के स्वयंसेवक लल्लेजी महाराज के 100 साल पूरे होने के मौके पर मथुरा में एक कवि सम्मेलन आयोजित किया था। उसमें अटल जी भी शामिल हुए थे। तब देश के राष्ट्रपति व्यंकटरमण थे। मैंने अपनी कविता की एक लाइन में उनके खिलाफ टिप्पणी की तो अटल जी मुझ पर नाराज हुए और मुझे डांटा था। मुझे भी मेरी गलती समझ आई और मैंने खेद भी प्रकट किया था।
