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पद्मश्री से सम्मानित और इंदौर की पहली महिला 'डॉक्टर दादी' नहीं रहीं
एजेंसी/ भाषा
Updated Mon, 14 Aug 2017 12:46 PM IST
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मरीजों की सेवा से मिलने वाली आत्मिक शांति को जीवन का सबसे बड़ा पुरस्कार मानने वाली ‘डॉक्टर दादी’ नहीं रहीं। लंबे समय से बीमार 91 वर्षीय डा. भक्ति यादव का इंदौर में सोमवार को निधन हो गया। छह दशक तक निस्वार्थ भाव से मरीजों की सेवा करने के कारण ही लोग उन्हें ‘डॉ. दादी’ कहा जाता था। चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें इसी वर्ष पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
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डॉ. भक्ति के बेटे रमन यादव ने बताया कि उनकी मां ने सुबह घर में ही आखिरी सांस ली। वह हड्डियों के कमजोर होने के रोग और वृद्धावस्था के अलग-अलग विकारों से पीड़ित थीं। उन्होंने बताया कि डॉ. भक्ति ने पिछले छह दशक में एक लाख से ज्यादा महिलाओं का इलाज किया था। गरीब तबके की मरीजों को वह निशुल्क चिकित्सकीय सलाह और दवाएं देती थीं।
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चिकित्सा जगत में इस उल्लेखनीय योगदान के कारण स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. भक्ति को पद्मश्री सम्मान के लिए चुना गया था। हालांकि, अपनी अधिक उम्र और शारीरिक कमजोरी की वजह से वह दिल्ली में 13 अप्रैल को आयोजित समारोह में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से यह सम्मान ग्रहण करने नहीं जा सकी थीं।
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जिला प्रशासन के अधिकारियों ने 20 अप्रैल को उनके इंदौर स्थित आवास जाकर उन्हें देश का चौथा सबसे बड़े नागरिक अलंकरण और प्रशस्ति पत्र सौंपा था। वह इंदौर के शासकीय महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय में वर्ष 1948 से 1953 के बैच में एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने वाली अकेली लड़की थीं।
लाखों बच्चों को सुरक्षित दुनिया में लाईं
डॉ. दादी ने 64 साल के कैरियर में एक लाख से ज्यादा डिलीवरी करवाईं। उनका जन्म उज्जैन के महिदपुर में 3 अप्रैल, 1926 को हुआ था। शुरुआती पढ़ाई महिदपुर में ही हुई, वे आगे की पढ़ाई के करने लिए गरोठ और इंदौर चली गईं। वे महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में पहले एमबीबीएस बैच की स्टूडेंट थीं। 1952 में एमबीबीएस की डिग्री हासिल कर मध्य प्रदेश की पहली महिला डॉक्टर बनीं।
उस समय में भंडारी कपड़ा मिल ने नंदलाल भंडारी प्रसूतिगृह के नाम से महिलाओं के लिए एक अस्पताल खोला था। यहां बतौर गायनेकोलॉजिस्ट काम करने लगीं। 1978 में इस हॉस्पिटल के बंद होने के बाद उन्होंने अपने घर को ही नर्सिंग होम बना दिया। पिछले 20 सालों से वे बिना किसी फीस के इलाज कर रही थीं।
पीएम ने करुणा और सेवा की शक्ति का प्रतीक बताया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉक्टर दादी पद्मश्री डॉ भक्ति यादव के निधन पर शोक जताते हुए उन्हें करुणा और सेवा की शक्ति का प्रतीक बताया। मोदी ने ट्विटर पर शोक संदेश में कहा, वह हम सभी के लिये प्रेरणास्रोत हैं। उनका जाना अपूरणीय क्षति है। डा. भक्ति यादव का जीवन हम सभी के लिए अनुकरणीय है। मैं उन सभी लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं जो डा. भक्ति के साथ जुड़े रहे।
