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इंदौर: सौर ऊर्जा से बिजली बनाकर प्लांट चलाने की योजना, क्योंकि अभी करीब 45 लाख रुपये की बिजली खर्च होने का अनुमान
Sat, 19 Feb 2022 04:01 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा
Updated Sat, 19 Feb 2022 04:01 PM IST
सार
इंदौर में बने एशिया के सबसे बड़े बायो सीएनजी प्लांट को सौर ऊर्जा से चलाने की योजना है। ऐसा करने से बिजली का खर्च कम हो सकेगा। शुरुआत छोटे स्तर से होगी, जिसके बाद बड़े स्तर पर सोलर पॉवर प्लांट लगाया जा सकता है।
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बायो सीएनजी प्लांट इंदौर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
एशिया के सबसे बड़े बायो सीएनजी प्लांट का लोकार्पण हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसे लोकार्पित कर इंदौरवासियों को बधाई दी। सौर ऊर्जा से बिजली तैयार कर इस प्लांट को चलाए जाने की योजना है क्योंकि प्लांट के संचालन में वर्तमान में करीब 45 लाख रुपये प्रतिमाह बिजली खर्च होने का अनुमान है।
दरअसल, बिजली के खर्च को कम करने के लिए प्लांट परिसर में सौर ऊर्जा से बिजली तैयार करने की योजना बनाई जा रही है। जिस एजेंसी ने ये प्लांट बनाया है वह टीनशेड के ढांचे की छत पर सोलर पैनल लगाकर बिजली बनाएगी। यदि यह कारगर होता है तो प्लांट के संचालन के लिए लगने वाली कुछ बिजली का 21 प्रतिशत सौर ऊर्जा से बनाई गई बिजली से उपयोग हो सकेगा। शुरुआती तौर पर यह करने की योजना है लेकिन आगामी समय से इसे बड़े रूप में करने की प्लानिंग भी प्रशासन की है। कलेक्टर मनीष सिंह का कहना है कि ट्रेचिंग ग्राउंड के चारों ओर की परिधि में करीब 50 एकड़ का हिस्सा सोलर पैनल लगाने के लिए एजेंसी को दिया जा सकेगा। इससे भविष्य में प्लांट के संचालन में खर्च होने वाली बिजली का उत्पादन यहां लगाए जाने वाले सोलर पॉवर प्लांट से होगा।
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गैस के साथ खाद और तरल फर्टिलाइजर भी
प्लांट की खासियत को देखा जाए तो यहां हर तरह के कचरे का पूरा उपयोग किया जाएगा। मसलन गीले कचरे से बायो सीएनजी बनेगी तो गैस बनने के बाद जो गाद बचेगी उससे रोज सौ टन बायो खाद बनाई जाएगी। सूखे कचरे को करीब डेढ़ माह तक गलाया जाएगा जिसके बाद उसमें से प्लास्टिक आदि को अलग कर खाद के रूप में प्रयोग किया जाएगा। इसी तरह सीएनजी व बायो खाद बनने के बाद जो पानी बचेगा उसका ट्रीटमेंट कर उसे पुनः उपयोग में लिया जाएगा। ऐसा करने के लिए परिसर में 245 एमक्यू लीटर क्षमता का ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाएगा। प्लांट के 60 प्रतिशत पानी से गीले कचरे की कटाई कर स्लरी बनाने प्रयुक्त होगा तो 40 प्रतिशत तरल फर्टिलाइजर बनेगा। इससे ट्रेचिंग ग्राउंड पर लगाए गए पेड़-पौधों की सिंचाई होगी।
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दरअसल, बिजली के खर्च को कम करने के लिए प्लांट परिसर में सौर ऊर्जा से बिजली तैयार करने की योजना बनाई जा रही है। जिस एजेंसी ने ये प्लांट बनाया है वह टीनशेड के ढांचे की छत पर सोलर पैनल लगाकर बिजली बनाएगी। यदि यह कारगर होता है तो प्लांट के संचालन के लिए लगने वाली कुछ बिजली का 21 प्रतिशत सौर ऊर्जा से बनाई गई बिजली से उपयोग हो सकेगा। शुरुआती तौर पर यह करने की योजना है लेकिन आगामी समय से इसे बड़े रूप में करने की प्लानिंग भी प्रशासन की है। कलेक्टर मनीष सिंह का कहना है कि ट्रेचिंग ग्राउंड के चारों ओर की परिधि में करीब 50 एकड़ का हिस्सा सोलर पैनल लगाने के लिए एजेंसी को दिया जा सकेगा। इससे भविष्य में प्लांट के संचालन में खर्च होने वाली बिजली का उत्पादन यहां लगाए जाने वाले सोलर पॉवर प्लांट से होगा।
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गैस के साथ खाद और तरल फर्टिलाइजर भी
प्लांट की खासियत को देखा जाए तो यहां हर तरह के कचरे का पूरा उपयोग किया जाएगा। मसलन गीले कचरे से बायो सीएनजी बनेगी तो गैस बनने के बाद जो गाद बचेगी उससे रोज सौ टन बायो खाद बनाई जाएगी। सूखे कचरे को करीब डेढ़ माह तक गलाया जाएगा जिसके बाद उसमें से प्लास्टिक आदि को अलग कर खाद के रूप में प्रयोग किया जाएगा। इसी तरह सीएनजी व बायो खाद बनने के बाद जो पानी बचेगा उसका ट्रीटमेंट कर उसे पुनः उपयोग में लिया जाएगा। ऐसा करने के लिए परिसर में 245 एमक्यू लीटर क्षमता का ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाएगा। प्लांट के 60 प्रतिशत पानी से गीले कचरे की कटाई कर स्लरी बनाने प्रयुक्त होगा तो 40 प्रतिशत तरल फर्टिलाइजर बनेगा। इससे ट्रेचिंग ग्राउंड पर लगाए गए पेड़-पौधों की सिंचाई होगी।
