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इंदौर: दर-दर भटकती बुजुर्ग महिला की अधिकारियों ने सुनी गुहार, मकान पर कब्जा वापस दिलवाया
Tue, 19 Oct 2021 07:28 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Amit Mandal
Updated Tue, 19 Oct 2021 07:28 PM IST
सार
इंदौर में कब्जे का ऐसा ही मामला सामने आया जिसमें प्रशासन ने बुजुर्ग महिला की व्यथा सुनी और समझी। आखिर में उसे उसका हक दिलवाया।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
आजकल मकानों व दुकानों पर कब्जे करने की खबरें कई शहरों से आती है। जरूरत पड़ने पर लोग हाथ जोड़कर दुकान या मकान मांगने जाते हैं लेकिन बाद में मजबूरी का फायदा उठाकर कब्जा कर लेते हैं। कुछ मामलों में सुनवाई हो जाती है तो कुछ में खुद की जगह के मालिकाना हक के लिए दर दर भटकता रहता है। इंदौर में कब्जे का ऐसा ही मामला सामने आया जिसमें प्रशासन ने बुजुर्ग महिला की व्यथा सुनी और समझी। आखिर में उसे उसका हक दिलवाया।
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इंदौर में बुजुर्ग, निराश्रित व विधवा महिला जगजीत कौर की प्रॉपर्टी पर कॉफी किंग कैफे के संचालकों ने कब्जा कर लिया। महिला बार-बार कहती रही कि कम से कम किराया तो दे दो लेकिन उसकी लाचारी का फायदा उठाकर कैफे संचालक उसे परेशान करते रहे। दो साल तक बिना किराए के ही कैफे चलाया और मुनाफा भी कमाया। महिला की आंखों में सिवाय आंसू के कुछ नहीं था। वह अक्सर सोचती कि अगर उसका आश्रय होता या कोई मददगार होता तो ऐसी नौबत नहीं आती, लेकिन इसी बीच किसी ने महिला से कहा कि वह प्रशासन के पास जाए और अपनी पीड़ा बताए।
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महिला ने लगाई कलेक्टर से गुहार, वापस मिला मालिकाना हक
परेशानी से महिला इतनी थक चुकी थी कि उसे अब ज्यादा उम्मीद नहीं थी लेकिन कोई और विकल्प भी नहीं था, लिहाजा वह इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह के पास पहुंचीं। महिला ने रूआंसे स्वरों में अपनी व्यथा कलेक्टर को सुनाई। कलेक्टर ने उसकी समस्या सुनी और समझी। इसके बाद एसडीएम अंशुल खरे को निर्देश दिए कि वृद्ध महिला की प्रॉपर्टी का मालिकाना हक उन्हें वापस दिलाए। कॉफी किंग कैफे के संचालकों के विरुद्ध कार्रवाई कर जगह खाली करवाएं।
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आदेश मिलने के बाद एसडीएम महिला के बताए स्थान पर पहुंचे और कब्जा उसे दिलवाया। कैफे संचालक को सख्त सहजे में समझाया कि आगे से ऐसा न करे। बताया गया कि करीब दो साल से महिला को किराया नहीं दिया गया था। किराए के ही लगभग छह लाख रुपये बकाया था। बिजली बिल भी बकाया था।
भूमि के अवैध धंधों में लिप्त लोगों के विरुद्ध इंदौर प्रशासन सख्त कार्रवाई कर रहा है। पिछले दिनों हुई कार्रवाई के बाद अब प्रशासन ने फिर से बड़ी कार्रवाई की है। करीब 750 करोड़ की भूमि पर किए गए कब्जे को वापस लिया और लगभग 29 एकड़ भूमि को शासकीय घोषित किया है। इस मामले में एफआईआर भी करवाई गई है।
अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी डॉ. अभय बेड़ेकर के अनुसार खजराना निवासी कृषक सोहराब और इस्लाम पिता आलम ने न्याय नगर संस्था की अनुबंधित भूमि एक संस्था त्रिशला गृह निर्माण सहकारी संस्था को बेच दी थी। इस पर कलेक्टर मनीष सिंह को शिकायत मिली थी। न्याय नगर संस्था के भूखण्ड से वंचित पीडि़त सदस्य संस्था से भूखण्ड वापसी को लेकर वर्षों से संघर्षरत थे। साथ ही साथ मेघना-त्रिशला गृह निर्माण सहकारी संस्था पीडि़त संघ अध्यक्ष गजेन्द्र गिरधारीलाल सेन व अन्य ने शिकायत की थी कि संस्था के अध्यक्ष दीपक जैन उर्फ दीपक मद्दा उर्फ दिलीप सिसोदिया ने उन्हें प्लॉट आवंटित नहीं किए।
लालच में आकर किया हेरफेर
लोगों ने अपनी गाढ़ी कमाई व जमापूंजी इस उम्मीद में संस्था में जमा करवाई थी कि भूखंड मिल सकेंगे लेकिन किसानों व भू-माफियाओं ने आपस में मिलकर न्याय नगर संस्था की भूमि खरीद फरोख्त की गई। उक्त भूमि इंदौर विकास प्राधिकरण की योजना क्रमांक 171 में समाहित होने की जानकारी भी दी गई है।
750 करोड़ की भूमि शासकीय घोषित, दोषियों पर एफआईआर दर्ज
इस मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। लगभग 750 करोड़ मूल्य की 11.942 हेक्टेयर (लगभग 29 एकड़) भूमि को शासकीय घोषित किया गया। अपर कलेक्टर के न्यायालय ने इस संबंध में आदेश पारित किए हैं। दोषियों दीपक मद्दा, दिलावर पटेल, सोहराब पटेल, इस्लाम पटेल एवं जाकिर के विरुद्ध खजराना थाने में आईपीसी 420, 467, 468, 120 बी के तहत एफआईआर भी दर्ज करवाई गई है। दीपक मद्दा के विरुद्ध अयोध्यापुरी, हिना पैलेस और पुष्प विहार कॉलोनियों के भूमि घोटालों संबंधी अनेक अपराध जिला प्रशासन द्वारा पूर्व में पंजीबद्ध करवाए गए हैं।
अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी डॉ. अभय बेड़ेकर के अनुसार खजराना निवासी कृषक सोहराब और इस्लाम पिता आलम ने न्याय नगर संस्था की अनुबंधित भूमि एक संस्था त्रिशला गृह निर्माण सहकारी संस्था को बेच दी थी। इस पर कलेक्टर मनीष सिंह को शिकायत मिली थी। न्याय नगर संस्था के भूखण्ड से वंचित पीडि़त सदस्य संस्था से भूखण्ड वापसी को लेकर वर्षों से संघर्षरत थे। साथ ही साथ मेघना-त्रिशला गृह निर्माण सहकारी संस्था पीडि़त संघ अध्यक्ष गजेन्द्र गिरधारीलाल सेन व अन्य ने शिकायत की थी कि संस्था के अध्यक्ष दीपक जैन उर्फ दीपक मद्दा उर्फ दिलीप सिसोदिया ने उन्हें प्लॉट आवंटित नहीं किए।
लालच में आकर किया हेरफेर
लोगों ने अपनी गाढ़ी कमाई व जमापूंजी इस उम्मीद में संस्था में जमा करवाई थी कि भूखंड मिल सकेंगे लेकिन किसानों व भू-माफियाओं ने आपस में मिलकर न्याय नगर संस्था की भूमि खरीद फरोख्त की गई। उक्त भूमि इंदौर विकास प्राधिकरण की योजना क्रमांक 171 में समाहित होने की जानकारी भी दी गई है।
750 करोड़ की भूमि शासकीय घोषित, दोषियों पर एफआईआर दर्ज
इस मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। लगभग 750 करोड़ मूल्य की 11.942 हेक्टेयर (लगभग 29 एकड़) भूमि को शासकीय घोषित किया गया। अपर कलेक्टर के न्यायालय ने इस संबंध में आदेश पारित किए हैं। दोषियों दीपक मद्दा, दिलावर पटेल, सोहराब पटेल, इस्लाम पटेल एवं जाकिर के विरुद्ध खजराना थाने में आईपीसी 420, 467, 468, 120 बी के तहत एफआईआर भी दर्ज करवाई गई है। दीपक मद्दा के विरुद्ध अयोध्यापुरी, हिना पैलेस और पुष्प विहार कॉलोनियों के भूमि घोटालों संबंधी अनेक अपराध जिला प्रशासन द्वारा पूर्व में पंजीबद्ध करवाए गए हैं।
