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Indore News: तीन साल के मासूम की आंखें करेंगी दूसरों के जीवन को रोशन, हृदय गति रुकने से हुआ निधन, परिजनों ने किया नेत्रदान
Sat, 01 Jan 2022 07:56 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा
Updated Sat, 01 Jan 2022 07:56 PM IST
सार
तीन साल का मासूम। छोटी सी आंखों में बड़े ख्वाब थे। दुनिया को देखने के, जीवन को जीने के, लेकिन ये ख्वाब अधूरे रह गए। अचानक दिल ने धोखा दिया और सांसें उखड़ गईं, लेकिन उसकी आंखें अब दूसरों के जीवन को रोशन करेंगी।
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नेत्रदान करते हुए परिजन।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
तीन साल का मासूम। अभी ठीक से पैरों पर खड़ा भी नहीं हो पाया था। छोटी सी आंखों में बड़े ख्वाब थे। दुनिया को देखने के, जीवन को जीने के, लेकिन ये ख्वाब अधूरे रह गए। जीने की उम्मीद टूट गई और सांसें उखड़ गई, लेकिन उसकी आंखें अब दूसरे के जीवन को रोशन करेंगी। उसकी आंखों से कोई और देख सकेगा दुनिया के उजास को। पूरे कर सकेगा अपने ख्वाब।
जिस वक्त लोग नए साल का जश्न मना रहे थे उस वक्त एक परिवार ऐसा था जो शोक में डूबा था। विलाप कर रहा था अपने कलेजे के टुकड़े के काल कवलित होने का। उसकी उम्र भी महज तीन साल थी, लेकिन इस उम्र में उसका दिल धोखा दे गया। धड़कनें अचानक रुक गईं और वह हमेशा के लिए चला गया। नया साल उनको ऐसा जख्म दे गया जो कभी न भर सकेगा, लेकिन परिजनों ने उसकी आंखें दूसरे के जीवन में उजियारा करने के लिए दान कर दीं ताकि कोई और उन आंखों से देख सके, जी सके।
दरअसल निपानिया निवासी विभाकर नारायण के घर यह दुखद घटना घटी। परिवार के लाड़ले तीन वर्षीय पुत्र आयांश का हृदयगति रुकने से निधन हो गया। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटा, लेकिन संभलते हुए उन्होंने फैसला किया नेत्रदान का। बॉम्बे अस्पताल में उसकी आंखें दान की गई। इन आंखों से छोटी उम्र के दृष्टिबाधित बच्चे के जीवन में उजियारा हो सकेगा।
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मुस्कान ग्रुप के अनुसार आयांश को दिल की बीमारी थी और बॉम्बे अस्पताल में उसका ऑपरेशन भी हो चुका था। तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बच सकी। इसके चलते परिजनों ने नेत्रदान का संकल्प लिया। शनिवार को ही शंकरा आई बैंक ने भी नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न करवाई। वहीं शनिवार सुबह जयाबेन गोहिल का निधन हो गया था। परिजनों ने उनके नेत्रदान किए।
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जिस वक्त लोग नए साल का जश्न मना रहे थे उस वक्त एक परिवार ऐसा था जो शोक में डूबा था। विलाप कर रहा था अपने कलेजे के टुकड़े के काल कवलित होने का। उसकी उम्र भी महज तीन साल थी, लेकिन इस उम्र में उसका दिल धोखा दे गया। धड़कनें अचानक रुक गईं और वह हमेशा के लिए चला गया। नया साल उनको ऐसा जख्म दे गया जो कभी न भर सकेगा, लेकिन परिजनों ने उसकी आंखें दूसरे के जीवन में उजियारा करने के लिए दान कर दीं ताकि कोई और उन आंखों से देख सके, जी सके।
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दरअसल निपानिया निवासी विभाकर नारायण के घर यह दुखद घटना घटी। परिवार के लाड़ले तीन वर्षीय पुत्र आयांश का हृदयगति रुकने से निधन हो गया। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटा, लेकिन संभलते हुए उन्होंने फैसला किया नेत्रदान का। बॉम्बे अस्पताल में उसकी आंखें दान की गई। इन आंखों से छोटी उम्र के दृष्टिबाधित बच्चे के जीवन में उजियारा हो सकेगा।
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मुस्कान ग्रुप के अनुसार आयांश को दिल की बीमारी थी और बॉम्बे अस्पताल में उसका ऑपरेशन भी हो चुका था। तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी जान नहीं बच सकी। इसके चलते परिजनों ने नेत्रदान का संकल्प लिया। शनिवार को ही शंकरा आई बैंक ने भी नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न करवाई। वहीं शनिवार सुबह जयाबेन गोहिल का निधन हो गया था। परिजनों ने उनके नेत्रदान किए।
