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इंदौर: आसाराम आश्रम के खिलाफ जमीन हड़पने का केस दर्ज करवाने वाले बुजुर्ग लापता, पुलिस कर रही तलाश
Fri, 14 Jan 2022 03:54 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा
Updated Fri, 14 Jan 2022 03:54 PM IST
सार
आलीराजपुर जिले के निवासी बुजुर्ग की गुमशुदगी के मामले में आसाराम आश्रम से जुड़े लोगों पर शक जताया जा रहा है। बुजुर्ग का नाम छगन भगत जमरा है, जिन्होंने आसाराम आश्रम के खिलाफ जमीन हड़पने का केस दर्ज करवाया है।
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छगन भगत जमरा, जो लापता हुए
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
आलीराजपुर जिले के निवासी बुजुर्ग की गुमशुदगी के मामले में आसाराम आश्रम से जुड़े लोगों पर शक जताया जा रहा है। बुजुर्ग का नाम छगन भगत जमरा है, जिन्होंने आसाराम आश्रम के खिलाफ जमीन हड़पने का केस दर्ज करवाया है। इसी केस की सुनवाई के चलते 6 जनवरी को वे हाईकोर्ट इंदौर गए थे, लेकिन इसके बाद से ही लापता है। पुलिस तलाश कर रही है।
जानकारी के मुताबिक छगन भगत जमरा (60) आलीराजपुर जिले के निवासी हैं। आलीराजपुर से लगे हुए ग्राम लखनकोट की जमीन का मामला कोर्ट में चल रहा है। छगन भगत ने 2005 में खेत की जमीन आश्रम को दान में दी थी। धार्मिक कार्यों के लिए यह जमीन दान दी गई थी। कुछ समय तक तो ठीक चला लेकिन बाद में उनको लगा कि जमीन जिस मकसद से दी गई है उसका सदुपयोग नहीं हो रहा है तो वापस जमीन मांगी गई। इस पर आश्रम से जुड़े लोगों ने मना कर दिया। छगन भगत ने कलेक्टर न्यायालय में प्रकरण लगाया। वहां से उनके पक्ष में फैसला आया। इस पर दूसरे पक्ष ने हाईकोर्ट इंदौर में अपील कर स्टे ले लिया। इसकी सुनवाई कोर्ट में चल रही है। 6 जनवरी को इसकी तारीख थी। छगन भगत तारीख पर गए थे। इसके बाद से वे वापस नहीं लौटे। परिजनों ने अपने स्तर पर तलाश की लेकिन सुराग नहीं मिला। बाद में इंदौर के संयोगितागंज थाने में गुमशुदगी दर्ज करवाई। परिजनों ने पुलिस को बताया कि अपने वकील के साथ वाहन से वे इंदौर गए थे। यह भी आशंका जताई जा रही है कि जमीन विवाद के चलते आश्रम से जुड़े लोगों ने उनका अपहरण किया है। इस संबंध में आलीराजपुर पुलिस को भी आवेदन दिया है। इधर आदिवासी समाज ने कहा है कि यदि शीघ्र जांच नहीं हुई तो आंदोलन करेंगे।
अपरहण की जताई आशंका, पुलिस ने कहा- कर रहे हैं तलाश
छगन भगत के पुत्र राजू ने बताया कि वकील तो घर लौट आए लेकिन पिता का पता नहीं चला। वकील ने बताया था कि छगन भगत को इंदौर के नेहरू स्टेडियम के पास छोड़कर वाहन का कुछ काम करवाने गए थे। वापस लौटे तो उनका कुछ भी पता नहीं चला। जानकारी मिलने पर परिजन इंदौर पहुंचे थे। राजू ने बताया कि आसपास के सीसीटीवी फुटेज देखे लेकिन पता नहीं चल पाया। इस मामले में आदिवासी समाज के कुछ सामाजिक कार्यकर्ता कह रहे हैं कि यह साफ है कि यह आदिवासी परिवार की जमीन पर कब्जे का मामला है, इसलिए परिवार की आशंका को निराधार नहीं ठहराया जा सकता है। यह अपहरण का मामला भी हो सकता है। पुलिस को गंभीरता से त्वरित जांच करनी चाहिए। गुमशुदा को जल्द से जल्द तलाश किया जाए अन्यथा समाज सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को विवश होगा। इस मामले में संयोगितागंज थाना प्रभारी योगेश तोमर ने बताया कि गुमशुदगी दर्ज कर तलाश की जा रही है। घटनास्थल और आसपास के सीसीटीवी फुटेज देखे हैं। इनमें एक दो जगह पर बुजुर्ग अकेले जाते दिख रहे हैं। बैंक के सामने के फुटेज में भी वे अकेले जाते दिखे हैं। बाद में कहां गए यह पता नहीं चल पाया है।
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जानकारी के मुताबिक छगन भगत जमरा (60) आलीराजपुर जिले के निवासी हैं। आलीराजपुर से लगे हुए ग्राम लखनकोट की जमीन का मामला कोर्ट में चल रहा है। छगन भगत ने 2005 में खेत की जमीन आश्रम को दान में दी थी। धार्मिक कार्यों के लिए यह जमीन दान दी गई थी। कुछ समय तक तो ठीक चला लेकिन बाद में उनको लगा कि जमीन जिस मकसद से दी गई है उसका सदुपयोग नहीं हो रहा है तो वापस जमीन मांगी गई। इस पर आश्रम से जुड़े लोगों ने मना कर दिया। छगन भगत ने कलेक्टर न्यायालय में प्रकरण लगाया। वहां से उनके पक्ष में फैसला आया। इस पर दूसरे पक्ष ने हाईकोर्ट इंदौर में अपील कर स्टे ले लिया। इसकी सुनवाई कोर्ट में चल रही है। 6 जनवरी को इसकी तारीख थी। छगन भगत तारीख पर गए थे। इसके बाद से वे वापस नहीं लौटे। परिजनों ने अपने स्तर पर तलाश की लेकिन सुराग नहीं मिला। बाद में इंदौर के संयोगितागंज थाने में गुमशुदगी दर्ज करवाई। परिजनों ने पुलिस को बताया कि अपने वकील के साथ वाहन से वे इंदौर गए थे। यह भी आशंका जताई जा रही है कि जमीन विवाद के चलते आश्रम से जुड़े लोगों ने उनका अपहरण किया है। इस संबंध में आलीराजपुर पुलिस को भी आवेदन दिया है। इधर आदिवासी समाज ने कहा है कि यदि शीघ्र जांच नहीं हुई तो आंदोलन करेंगे।
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अपरहण की जताई आशंका, पुलिस ने कहा- कर रहे हैं तलाश
छगन भगत के पुत्र राजू ने बताया कि वकील तो घर लौट आए लेकिन पिता का पता नहीं चला। वकील ने बताया था कि छगन भगत को इंदौर के नेहरू स्टेडियम के पास छोड़कर वाहन का कुछ काम करवाने गए थे। वापस लौटे तो उनका कुछ भी पता नहीं चला। जानकारी मिलने पर परिजन इंदौर पहुंचे थे। राजू ने बताया कि आसपास के सीसीटीवी फुटेज देखे लेकिन पता नहीं चल पाया। इस मामले में आदिवासी समाज के कुछ सामाजिक कार्यकर्ता कह रहे हैं कि यह साफ है कि यह आदिवासी परिवार की जमीन पर कब्जे का मामला है, इसलिए परिवार की आशंका को निराधार नहीं ठहराया जा सकता है। यह अपहरण का मामला भी हो सकता है। पुलिस को गंभीरता से त्वरित जांच करनी चाहिए। गुमशुदा को जल्द से जल्द तलाश किया जाए अन्यथा समाज सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को विवश होगा। इस मामले में संयोगितागंज थाना प्रभारी योगेश तोमर ने बताया कि गुमशुदगी दर्ज कर तलाश की जा रही है। घटनास्थल और आसपास के सीसीटीवी फुटेज देखे हैं। इनमें एक दो जगह पर बुजुर्ग अकेले जाते दिख रहे हैं। बैंक के सामने के फुटेज में भी वे अकेले जाते दिखे हैं। बाद में कहां गए यह पता नहीं चल पाया है।
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