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इंदौर: संतों के दल ने किया इंदौर भ्रमण, प्रशासन ने सील की सांवेर क्षेत्र की पांच फैक्टरियां, कलेक्टर ने बनाई टीम जो दस दिन में देगी रिपोर्ट

Thu, 23 Dec 2021 01:17 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा Updated Thu, 23 Dec 2021 01:17 PM IST
सार

शिप्रा शुद्धिकरण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। संतों के दल ने इंदौर भ्रमण कर वस्तुस्थिति देखी थी। इसके बाद प्रशासन ने सांवेर क्षेत्र में स्थित पांच फैक्टरियों को सील कर दिया। देवास में भी हकीकत देखी। वस्तुस्थिति से सीएम को अवगत करवाएंगे।

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Indore: A team of saints visited Indore, the administration sealed five factories in the Saver area, the collector formed a team that would report in ten days.
इंदौर में संतों को ट्रीटमेंट प्लांट से साफ किया पानी दिखाया गया। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

शिप्रा शुद्धिकरण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। उज्जैन में संतों के धरने के बाद शासन-प्रशासन ने आश्वासन तो दिया, लेकिन हालात अब भी नहीं सुधर रहे हैं। बुधवार को संतों के दल ने इंदौर भ्रमण कर वस्तुस्थिति देखी थी। इसके बाद प्रशासन ने सांवेर क्षेत्र में स्थित पांच फैक्टरियों को सील कर दिया। संतों ने कहा है कि जो हकीकत उन्होंने देखी है उसकी जानकारी मुख्यमंत्री को दी जाएगी।
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जानकारी के मुताबिक संतों ने जब ट्रीटमेंट प्लांट देखे तो पाया कि सांवेर क्षेत्र की फैक्टरियों का गंदा पानी शिप्रा में मिल रहा है। इस पर प्रशासन ने जानकारी जुटाई। देर शाम को नगर निगम ने उक्त क्षेत्र की पांच फैक्टरियों को सील कर दिया। जिन फैक्टरियों पर कार्रवाई की गई उनमें मेसर्स जीएनएस इंडस्ट्रीज सेक्टर ई औद्योगिक क्षेत्र, मेसर्स जयश्री सालासर इंडस्ट्रीज सांवेर रोड, मेसर्स जीआरवी बिस्किट्स प्राइवेट लिमिटेड औद्योगिक क्षेत्र सांवेर रोड, मेसर्स कुंदन इंटरप्राइजेस सेक्टर एफ सांवेर रोड इंदौर और मेसर्स एस एंड श्रीफल कन्फेक्शनर प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। इन फैक्टरियों में काम करने वाले मजदूरों को बाहर किया गया। फैक्टरी में उत्पादन रुकवाया और बिजली कनेक्शन बंद किया।
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कलेक्टर मनीष सिंह ने कान्ह और सरस्वती नदी की स्वच्छता को लेकर टीम बनाई है। यह टीम दस दिन में कलेक्टर को रिपोर्ट सौंपेगी। टीम में छह अधिकारी शामिल हैं। इधर साधु-संत भी इंदौर, उज्जैन, देवास कलेक्टर को रिपोर्ट सौंपेंगे, जिसमें बताया जाएगा कि शिप्रा में कैसे और कहां से दूषित पानी मिल रहा है। 
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संतों ने पूछा- क्या पीने योग्य है शिप्रा का पानी

Indore: A team of saints visited Indore, the administration sealed five factories in the Saver area, the collector formed a team that would report in ten days.
भ्रमण के दौरान देखी नदियों की दुर्दशा और प्रशासन को करवाया अवगत। - फोटो : सोशल मीडिया
दरअसल बुधवार को साधु-संतों का दल उज्जैन से इंदौर पहुंचा था। इंदौर में नगर निगम और प्रशासनिक अफसरों ने उनकी अगवानी कर आजाद नगर और कबीटखेड़ी ट्रीटमेंट प्लांट दिखाया था। कान्ह नदी का भ्रमण भी करवाया। संतों ने कहा था कि सांवेर क्षेत्र की कुछ फैक्टरियों का प्रदूषित पानी शिप्रा में मिल रहा है। अफसरों ने संतों को प्रजेटेंशन देकर समझाया कि किस तरह गंदे पानी का ट्रीटमेंट किया जाता है। ट्रीटमेंट के बाद ही सीवरेज का पानी नदियों में जाता है। संतों ने इसके लिए प्रशासन की तारीफ की लेकिन यह भी कहा कि शिप्रा के पानी का हम आचमन करते हैं लेकिन क्या यह पानी पीने योग्य हैं। अफसरों ने भी माना कि पानी पीने योग्य नहीं है।

संतों ने सुझाव दिया कि गंदा पानी शिप्रा में छोड़ने के बजाय खेती के लिए प्रयुक्त किया जा सकता है। सांवेर में ट्रीटमेंट प्लांट लगना चाहिए ताकि फैक्टरियों का गंदा पानी शिप्रा में न जा सके। उज्जैन के महंत डॉ. रामेश्वर दास ने कहा कि सांवेर में भी ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाए तो हमें साफ पानी मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि इंदौर आने से पहले हमने पंथ पिपलई और सांवेर में कान्ह का पानी देखा तो बहुत गंदा नजर आया। शिप्रा को मोक्षदायिनी नदी कहा जाता है। प्रमुख पर्वों पर सभी शिप्रा में स्नान करते हैं। आचमन करते हैं। ऐसे में अगर पानी साफ नहीं होगा तो कैसे उपयोग करेंगे। संतों द्वारा बताई गई स्थिति और सुझाव के बाद ही प्रशासन ने बुधवार देर शाम को सांवेर क्षेत्र की पांच फैक्टरियों को सील किया।

देवास के उद्योगों का गंदा पानी मिल रहा शिप्रा में
संतों ने इंदौर के साथ ही देवास में भी स्थिति देखी। देवास में उद्योगों का गंदा पानी शिप्रा में बहाए जाने को लेकर प्रशासन से चर्चा की। देवास के औद्योगिक क्षेत्र में ऐसे कई उद्योग हैं जिनका पानी शिप्रा में मिल रहा है। पहले भी कई बार ये मामला सामने आया है लेकिन प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया। संतों के भ्रमण के बाद देवास प्रशासन दावा कर रहा है कि ट्रीटमेंट प्लांट के लिए टेंडर निकाल दिए गए हैं। जल्द ही पानी साफ करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। संतों ने कहा है कि जो हकीकत उन्होंने देखी है उसकी जानकारी मुख्यमंत्री को देंगे। हम चाहते हैं कि शिप्रा में मिलने वाले गंदे नालों को बंद किया जाए। संतों ने अपने भ्रमण के बाद बताया कि पंथ पिपलई में कान्ह नदी की स्थिति खराब है। इसमें गंदा पानी भरा है। देवास में नागधम्मन नदी से उद्योगों का गंदा पानी शिप्रा में मिल रहा है। गदइशा पिपलिया व हवनखेड़ी में नालों से सीधा पानी आ रहा है। 
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